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22 जून 2011

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग | Nageshwar Jyotirlinga


8. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग- 12 ज्योतिर्लिंग | Nageshwar Jyotirlinga - 12 Jyotirlinga | Nageshwar Temple


NAGESHWAR JYOTIRLINGA
भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक नागेश्वर ज्योतिर्लिंग है. यह ज्योतिर्लिंग भारत के गुजरात राज्य के बाहरी क्षेत्र में  द्वारिका स्थान में स्थित है. धर्म शास्त्रों में भगवान शिव नागों के देवता है. तथा नागेश्वर का पूर्ण अर्थ नागों का ईश्वर है. भगवान शिव का एक अन्य नाम नागेश्वर भी है. द्वारका पुरी से भी नागेश्वर ज्योतिर्लिग की दूरी 17 मील की है. इस ज्योतिर्लिंग की शास्त्रों में अद्वभुत महिमा कही गई है. 
इस ज्योतिर्लिग की महिमा में कहा गया है, कि जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्वा और विश्वास के साथ यहां दर्शनों के लिए आता है. उसे जीवन के समस्त पापों से मुक्ति मिलती है. 

नागेश्वर ज्योतिर्लिग कथा | Nageshwar Jyotirlinga Katha in Hindi

नागेश्वर ज्योतिर्लिग के संम्बन्ध में एक कथा प्रसिद्ध है. कथा के अनुसार एक धर्म कर्म में विश्वास करने वाला व्यापारी था. भगवान शिव में उसकी अनन्य भक्ति थी. व्यापारिक कार्यो में व्यस्त रहने के बाद भी वह जो समय बचता उसे आराधना, पूजन और ध्यान में लगाता था. 
उसकी इस भक्ति से एक दारुक नाम का राक्षस नाराज हो गया. राक्षस प्रवृ्ति का होने के कारण उसे भगवान शिव जरा भी अच्छे नहीं लगते थे. 
वह राक्षस सदा ही ऎसे अवसर की तलाश में रहता था, कि वह किस तरह व्यापारी की भक्ति में बाधा पहुंचा सकें. एक बार वह व्यापारी नौका से कहीं व्यापारिक कार्य से जा रहा था. उस राक्षस ने यह देख लिया, और उसने अवसर पाकर नौका पर आक्रमण कर दिया. और नौका के यात्रियों को राजधानी में ले जाकर कैद कर लिया. 
कैद में भी व्यापारी नित्यक्रम से भगवान शिव की पूजा में लगा रहता था. 
बंदी गृ्ह में भी व्यापारी के शिव पूजन का समाचार जब उस राक्षस तक पहुंचा तो उसे बहुत बुरा लगा. वह क्रोध भाव में व्यापारी के पास कारागार में पहुंचा. व्यापारी उस समय पूजा और ध्यान में मग्न था. राक्षस ने उसपर उसी मुद्रा में क्रोध करना प्रारम्भ कर दिया. राक्षस के क्रोध का कोई प्रभाव जब व्यापारी पर नहीं हुआ तो राक्षस ने अपने अनुचरों से कहा कि वे व्यापारी को मार डालें. 
यह आदेश भी व्यापारी को विचलित न कर सकें. इस पर भी व्यापारी अपनी और अपने साथियों की मुक्ति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करने लगा. उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव उसी कारागार में एक ज्योतिर्लिंग रुप में प्रकट हुए.  और व्यापारी को पाशुपत- अस्त्र स्वयं की रक्षा करने के लिए दिया. इस अस्त्र से राक्षस दारूक तथा उसके अनुचरो का वध कर दिया. उसी समय से भगवान शिव के इस ज्योतिर्लिंग का नाम नागेश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुआ.  

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग हैदराबाद और अल्मोडा में | Nageshwar Jyotirlinga in Hyderabad and Almoda

भारत के कुछ अन्य स्थानों में स्थित ज्योतिर्लिंगों को भी नागेश्वर ज्योतिर्लिग का नाम दिया जाता है.  इस संबन्ध में कई मत सामने आते है. हैदराबाद, आन्घ्र प्रदेश का ज्योतिर्लिम्ग भी नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है. इसके अतिरिक्त उत्तराखंड के अल्मोडा नामक स्थान में भी योगेश या जागेश्वर शिवलिंग है, भक्त जन इसे भी नागेश्वर के नाम से बुलाते है. 
परन्तु शिवपुराण में केवल द्वारका के नागेश्वर ज्योतिर्लिंग को ही एक मात्र नागेश्वर ज्योतिर्लिग माना गया है. एक अन्य धार्मिक शास्त्र के अनुसार भारत के दस ज्योतिर्लिगों में नागेश दारूकावने का नाम आता है. यह स्थान आज जागेश्वर के नाम से जाना जाता है. नागेश्वर का नाम योगेश्वर या जोगेश्वर किस प्रकार बना इसका कारण स्थान परिवर्तन के कारण शब्दों में परिवर्तन से है. 

लोकमान्यताएं | Belief of Folks

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग अल्मोडा के विषय में यह लोकमान्यताएं है, पहाडी इलाकों में एक नाग प्रजाती रहती है. वहां से प्राप्त प्राचीन अवशेषों में नाग मूर्तिया, सांप के कुछ चिन्ह प्राप्त हुए है. नाग पूजा को आज भी यहां विशेष महत्व दिया गया है.  अल्मोडा में जहां यह मंदिर स्थित है, वहां आसपास के क्षेत्रों के नाम प्राचीन काल से ही नागों के नाम पर आधारित है. इन्हीं में से कुछ नाम वेरीनाग, धौलेनाग, कालियनाग आदि है. भूत प्रेतों से मुक्ति के लिए भी नाग पूजा की जाती है.

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