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14 जून 2011

PRATHAM PUJA GANESHJI KI

प्रथम पूजा गणेशजी की
प्रत्येक मंगल कार्य के अवसर पर हम सबसे पहले गणेश जी की पूजा करते हैं। ये स्थूल शरीर वाले देवता हैं। इनका मस्तक हाथी जैसा है।
मूषक इनका वाहन है, जो इनके आकार की अपेक्षा काफी छोटा है। भगवान सभी जीवों के प्रति समान भाव रखते हैं, उनके लिए न कोई बडा है और न कोई छोटा। गणेश जी ने भी मूषक को अपना वाहन बनाकर यही भाव व्यक्त किया है। कहते हैं कि हाथी को अपना दांत बहुत प्यारा होता है, वह उसकी सुंदरता पर हमेशा इतराता है, लेकिन हाथी के समान मस्तक वाले गणेश जी अपने दांतों को भी कार्य में ले आए।
राजेश मिश्रा, कोलकाता 
मान्यता है कि उन्होंने अपने एक दांत को तोड कर उसके अग्रभाग को तीक्ष्ण कर लिया और लेखनी तैयार कर ली। इस लेखनी से उन्होंने पूरी महाभारत की कथा लिख डाली। सच तो यह है कि विद्या अर्जित करने, धर्म और न्याय के लिए हमें प्रिय से प्रिय वस्तु का भी त्याग कर देना चाहिए। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि प्रभु को लेखनी जैसे साधन की आवश्यकता नहीं होती है। गणेश जी ने मात्र भक्तों को सीख देने के लिए ऐसा किया।
हिंदू धर्म में मान्यता है कि किसी भी मंगल कार्य के पहले यदि गणेश जी की पूजा होती है, तो कार्य में किसी भी प्रकार के बाधा की शंका मिट जाती है, क्योंकि सभी विघ्नों को वे हर लेते हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने चक्र पाने के लिए उनके समक्ष दोर्भिकर्णकिया और अपना आदर भाव प्रकट किया। दोर्भिकर्णका अर्थ होता है-कान को हाथों से पकडना। उन्होंने प्रणाम करते हुए कहा कि जिनका आदि, मध्य और अंत नहीं है, उन अद्वितीय एकदंतधारीभगवान गणेश को नमन है।

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