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02 अगस्त 2011

हनुमान चालीसा : HANUMAN CHALISA


हनुमान चालीसा

HANUMANJI CHARITRA










श्री गुरु चरण सरोज रज निज माने मुकुर सुधारी
बरनाऊ रघुवर विमल जासू जो दायक फल चारी
बुद्धि हीन तनु  जानीके सुमीरौ पवन कुमार
बल बुद्धि विद्या देहु मोहे हरहू कलेस विकार

जई हनुमान ज्ञान गुण सागर
जई कपिस तिंहू लोक उजागर
राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनी-पुत्र पवन सूत नामा
महावीर विक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के सांगी
कंचन वरण विराज सुबेसा
कानन कुंडल कुंचित केसा
हाथ वज्र और ध्वजा विराजे
कंधे मूंज जनेऊ साजे

शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जग वंदन
विद्यावान गुणी अति चतुर
राम काज करिबे को आतुर
प्रभु चरित्रा सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मान बसिया
सूक्ष्म रूप धरी सियाही दिखावा
विकट रूप धरी लंका जलावा
भीम रूप धरी असुर संघारे
रामचंद्रा के काज संवारे

लाए संजीवन लखन ज़ियाए
श्री रघुवीर हरषी उर लाए
रघुपति किन्ही बहुत बधाई
तुम मम प्रिय भरत-ही सम भाई
सहस बदन तुम्हारो यश गावे
अस कही श्रीपति कंठ लगावे
सनकादिक ब्रह्मदी मुनीसा
नारद सारद सहित आहीसा
यम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कवि कोविद कही सके कहाँ ते

तुम उपकार सुग्रीवहीं कीन्हा
राम मिलाय राजपद दीन्हा
तुम्हारो मंत्र विभीषण माना
लंकेश्वर भय सब जाग जाना
युग सहस्त्र जोजान पर भानु
लीलयो त्राहि मधुर फल जानू
प्रभु मुद्रिका मेली मुख माही
जलधि लँघी गये अचरज नाही
दूरगाम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रहा तुम्हरे तेते

राम द्वारे तुम रखवारे
होत ना आज्ञा बीनू पैसारे
सब सुख ल़ई तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहु को डरना
आपन तेज संहारो आपै
तीन्हों लोक हांक ते कापे
भूत पिसाच निकट नहीं आवे
महावीर जब नाम सुनवाई
नासे रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमंत बीरा

संकट से हनुमान छुडावे
मन करम वचन ध्यान जो लावे
सब पर राम तपस्वी राजा
तिनके काज सकल तुम साजा
और मनोरथ जो कोई लावे
सोही अमित जीवन फल पाए
चारों युग परताप तुम्हारा
है प्रसिद्ध जगत उजियारा
साधु संत के तुम रखवारे
असुर निकंदन राम दुलारे

अष्ट सीधी नव निधि के दाता
उस वार दीं जानकी माता
राम रसायन तुम्हारे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा
तुम्हारे भजन राम को पावे
जनम जनम के दुख बिसरावे
अंत काल रघुवीर पूर जाई
जहाँ जनम हरी-भक्तिकहाई
और देवता चित ना धरेही
हनुमंत सेही सर्वे सुख करेही

संकट कटे मिटे सब पीरा
जो सुमिरे हनुमत बलबीरा
जय जय जय हनुमान गोसहिं
कृपा करहू गुरुदेव की न्याहीं
जो सत बार पाठ करे कोई
छुटेही बँधी महा सुख होई
जो यह पढ़े हनुमान चालीसा
होये सिद्धि सखी गौरीसा
तुलसीदास सदा हरी चेरा
कीजै नाथ ह्रदय में डेरा

             
पवन तनय संकट हरण  मंगल मूर्ति रूप
राम लखन सीता सहित ह्रदय बसहू सुर भूप

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