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31 अगस्त 2011

LALBAGCHA KE RAJA (GANESHJI) KA DARSHAN KAREN

लालबाग के राजा का दर्शन करें
Lalbagcha ka RAJA Ganeshji ki Pratima : Rajesh Mishra
हर किसी के लिए संभव नहीं होता की लालबाग के राजा (गणेशजी) का
मुंबई जाकर दर्शन करें इसलिए हमने ये फोटो उपलब्ध कराइ है अपने 
पाठकों, ब्लोगर दोस्तों के लिए. 
जोर से बोलें : गणपति बाप्पा मोरया

लालबागचा राजा की सुरक्षा व बीमा राशि बढ़ी

मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा गणेश मंडल के निकट 13 जुलाई को हुए बम विस्फोटों के मद्देनजर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है। इस मंडल की बीमा राशि भी बढ़कर 14 करोड़ रुपए हो गई है। महाराष्ट्र में व्यापक तौर पर मनाया जाने वाला गणेश उत्सव गुरुवार से शुरू हो रहा है। मुंबई स्थित लालबागचा सबसे पुराने और प्रसिद्ध पूजा मंडलों में से एक है, जहां फिल्म से लेकर राजनीतिक हस्तियों समेत करीब एक करोड़ श्रद्धालु आते हैं।
लालबागचा मंडल के अध्यक्ष अशोक पवार ने कहा, ऐसा देखा गया है कि प्रत्येक साल गणेश उत्सव शुरू होने से पूर्व कोई न कोई अशुभ घटना घट जाती है। इसके मद्देनजर हम लोगों ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। पिछले साल के 200 निजी सुरक्षाकर्मियों की जगह इस साल इनकी संख्या बढ़ाकर 300 कर दी गई है। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों की संख्या 35 से बढ़ाकर 70 कर दी गई है। उन्होंने कहा कि मेटल डिटेक्टर दरवाजा आदि की भी व्यवस्था की जा रही है। पुलिस के अतिरिक्त 2,500 स्वयंसेवक कार्यरत होंगे।

गणेश जी की पौराणिक महिमा
पूर्वकाल में पार्वती देवी को देवताओं ने अमृत से तैयार किया हुआ एक दिव्य मोदक दिया। मोदक देखकर दोनों बालक (कार्तिकेय तथा गणेश) माता से मांगने लगे।

तब माता ने मोदक के महत्व का वर्णन कर कहा कि तुममें से जो धर्माचरण के द्वारा श्रेष्ठता प्राप्त करके सर्वप्रथम सभी तीर्थों का भ्रमण कर आएगा, उसी को मैं यह मोदक दूंगी।

माता की ऐसी बात सुनकर कार्तिकेय ने मयूर पर आरूढ़ होकर मुहूर्तभर में ही सब तीर्थों का स्नान कर लिया। इधर गणेश जी का वाहन मूषक होने के कारण वे तीर्थ भ्रमण में असमर्थ थे। तब गणेशजी श्रद्धापूर्वक माता-पिता की परिक्रमा करके पिताजी के सम्मुख खड़े हो गए।

यह देख माता पार्वतीजी ने कहा कि समस्त तीर्थों में किया हुआ स्नान, सम्पूर्ण देवताओं को किया हुआ नमस्कार, सब यज्ञों का अनुष्ठान तथा सब प्रकार के व्रत, मन्त्र, योग और संयम का पालन- ये सभी साधन माता-पिता के पूजन के सोलहवें अंश के बराबर भी नहीं हो सकते।

इसलिए यह गणेश सैकड़ों पुत्रों और सैकड़ों गणों से भी बढ़कर है। अतः यह मोदक मैं गणेश को ही अर्पण करती हूं। माता-पिता की भक्ति के कारण ही इसकी प्रत्येक यज्ञ में सबसे पहले पूजा होगी।

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