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19 अगस्त 2011

motive in all of Krishna Leela

कृष्ण की हर लीला में कोई मकसद छुपा है

RADHA KE SANG KRISHNA



कृष्ण की लीलाएं कोई साधारण लीलाएं नहीं हैं। उनके पीछे एक बड़ा मकसद छुपा हुआ है। आज के युवा कहते हैं कि जब कृष्ण ने रासलीला की थी, तो हम क्यों नहीं कर सकते? लेकिन कृष्ण की रासलीला का मतलब और मकसद कोई नहीं जानता। कृष्ण सिखाते हैं कि प्यार कैसे किया जाता है। जिन प्रेमियों में एक दूसरे के प्रति आदर और सम्मान नहीं, जिनमें एक दूसरे का ख्याल रखने की भावना नहीं, उनमें प्यार कैसे हो सकता है? यह कहना है मशहूर कथक नृत्यांगना उमा शर्मा और इस्कॉन कम्यूनिकेशंस इंडिया के डायरेक्टर व्रजेंद्र नंदन दास का, जिन्होंने पाठकों के लिए श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी लीलाओं से जुड़ी गहन बातें बताईं और अपना संदेश भी दिया-

कृष्ण का हर रूप है मन मोहक
उमा शर्मा ने बताया कि वैसे तो मैं कृष्ण को ईश्वरीय रूप में ही देखती हूं, लेकिन जब मैं नृत्य करती हूं तो उसमें उनके अन्य रूपों का विस्तार नजर आता है। वैसे तो कृष्ण का हर रूप मोहक है, लेकिन मुझे उनका श्रृंगार रूप से सबसे ज्यादा लुभाता है। इसमें कोई शक नहीं कि कृष्ण से बड़े रंगीले थे, लेकिन उनके जैसा कोई दूसरा प्रशासनिक भी नहीं था। कृष्ण के विविध रूपों को देखकर बड़ा आश्चर्य होता है। कहां गीता का उनका विशाल रूप और कहां उनका श्रृंगार रूप, कहां उनका बाल रूप और कहां महाभारत के रचयिता का रूप।

वृजेंद्र नंदन दास भी कृष्ण के ईश्वरीय स्वरूप को ही देखते हैं। उनका मानना है कि कृष्ण का हर काम दिव्य है। उनके जैसा कोई नर्तक नहीं है। वह संगीत और नृत्य के आधार हैं। जो नाग के फन पर नृत्य कर सकता हो, उससे बड़ा नर्तक और कौन हो सकता है? ऐसा तो सिर्फ भगवान ही कर सकते हैं। कृष्ण हर तरह से संपूर्ण हैं और हमें यही संदेश देते हैं कि हम उनसे सीखकर अपने आप को भी संपूर्ण बनाएं।


लीलाओं को समझना आसान नहीं
व्रजेंद्र नंदन दास कहते हैं कि कृष्ण की तरह उनकी लीलाएं भी अनंत हैं और उनकी हर लीला के पीछे कोई मकसद छुपा हुआ है। कृष्ण का जन्म ही नहीं, बल्कि उनका कर्म भी दिव्य था। उन्होंने जेल की विषम परिस्थितियों में जन्म लिया, लेकिन उनके जन्म लेते ही वे विषम परिस्थितियां दूर होती चली गईं। उन्होंने जन्म लेते ही नंद बाबा को निर्देश दिया और उनका मार्गदर्शन किया। ऐसा कोई दिव्य आत्मा ही कर सकती है। माखन चुराने और मटकी फोड़ने के पीछे भी उनका मकसद यही था कि कंस गोकुल से जो सारा दूध, दही और माखन कर के रूप में अपने पास मंगवा लेता था, वह उसके पास न पहुंच पाए।

ऐसा करके उन्होंने कंस की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया। जब कंस ने गोकुल की सारी गायों को एक बाड़े में बंद करवा दिया, तो उन्होंने ऐसी मुरली बजाई कि सारी गाएं बाड़ा तोड़कर उनकी तरफ दौड़ी चली आईं। उमा शर्मा ने कहा कि कृष्ण ने अपनी अलग-अलग लीलाओं से हर तरह की शिक्षा दी है। वे सबको सुख देना चाहते थे, सबके साथ रहना चाहते थे और सबका ख्याल रखना जानते थे। अपनी लीलाओं में उन्होंने यही सब दर्शाया है।


रासलीला और राधा कृष्ण का प्रेम
उमा शर्मा के मुताबिक राधा के बिना कृष्ण अधूरे हैं, लेकिन महारास में राधा कहीं नहीं है। दरअसल उस वक्त कृष्ण राधा को छोड़कर गोपियों के पास चले जाते हैं। कृष्ण को अपने पास पाकर पहले तो गोपियां फूली नहीं समाती, लेकिन जब गोपियां में घमंड आ जाता है, तो कृष्ण अंतर ध्यान होकर उन्हें शिक्षा भी देते हैं। लेकिन इस बीच राधा कृष्ण से रूठ जाती हैं और उनका माननीय रूप देखने को मिलता है। जब कृष्ण उन्हें मनाने के लिए उनके घर जाते हैं, तो वह उन्हें ताने भी देती हैं।

रसखान ने राधा की इस जलन और कृष्ण के प्रति उनके प्रेम का अद्भुत वर्णन किया है। उन्होंने लिखा है : 'मोर पखा सिर ऊपर डारि के, कुंज की माल गरे पहरूंगी, ओढ़ी पितांबर लै लकुटि, बन गौ धन ग्वान संग फिरौंगी, भावत होते यही रसखान, तो तेरे लिए सब स्वांग करौंगी, पै मुरली मुरली धर की, अधरान धरे अधरा न धरौंगी।' उमा का कहना है कि राधा और कृष्ण का संबंध इतना अटूट और गहरा है कि उसकी गहराई में उतरना मुश्किल है। उसमें आत्मा और परमात्मा का मिलन तो है ही, वे स्त्री और पुरुष के संबंधों की गहराई को भी दिखाते हैं। दरअसल राधा के बगैर कृष्ण कृष्ण नहीं थे। वही उनकी शक्ति, प्रेरणा और विचारधारा थी। इसीलिए कई कवियों ने राधा को कृष्ण से उच्च कोटि पर रखा है।

व्रजेंद्र नंदन का कहना है कि राधा कृष्ण का प्रेम सर्वोच्च कोटि का प्रेम था। वे सिखाते हैं कि अगर आप किसी से प्रेम करते हो, तो उसका सम्मान करना और उसका पूरा ध्यान रखना भी जरूरी है। कृष्ण प्रेम करना जानते हैं, तो सुरक्षा करना भी जानते हैं। आदर और देखभाल जब जुड़ते हैं, तभी प्यार का वास्तविक रूप सामने आता है।

प्यार की गहराई समझें युवा
उमा का कहना है कि आजकल के युवा प्यार की गहराई को नहीं समझते और न उसमें उतरना चाहते हैं। यही वजह है कि आज प्यार की जगह अश्लीलता बढ़ रही है। एक दूसरे के प्रति आदर खत्म हो रहा है। एक दूसरे की परवाह नहीं रही। आए दिन ऐसी खबरें आती हैं कि कल तक जो प्रेमी अपने प्यार का ढिंढोरा पीटता रहता था, वह अपनी प्रेमिका के ऊपर तेजाब फेंक गया। यह प्यार कैसे हो सकता है? औरत और मर्द दोनों को यह समझना चाहिए कि अगर आपके मन में एक दूसरे के प्रति आदर और सम्मान नहीं है और एक दूसरे का ख्याल रखने की भावना नहीं है, तो फिर आपके बीच प्यार नहीं हो सकता।

व्रजेंद्र नंदन दास का कहना है कि आज की पीढ़ी कृष्ण और उनके प्रेम के बारे में ज्यादा नहीं जानती है। आज के दौर में युवा जिस लव (प्रेम) की बात कहते हैं, दरअसल वो लस्ट (वासना) होता है जोकि लव का विकृत रूप है और युवा पीढ़ी इसी से पीड़ित है। उन्हें लव और लस्ट के अंतर को समझकर उससे उभरना चाहिए और प्रेम के वास्तविक अर्थ को समझकर उसे आत्मसात करना चाहिए।

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