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18 अगस्त 2011

Shri Krishna Janmashtmi (22 August 2011)


NatKhat Goipal_ShriKrishna : Photo by : Rajesh Mishra


श्री कृष्ण जन्माष्टमी


भादव कृष्णाष्टमी को जन्माष्टमी कहते हैं। इसी दिन मथुरा में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इस तिथि की रात्रि में यदि रोहिणी नक्षत्र हो तो कृष्ण जयन्ती होती है। रोहिणी नक्षत्र के अभाव में केवल जन्माष्टमी व्रत का ही योग होता है। इस सभी स्त्री-पुरुष नदी के जल में तिल मिलाकर नहाते हैं पंचामृत से भगवान कृष्ण की प्रतिमा को स्नान कराया जाता है , उन्हें सुन्दर वस्त्राभूषणों से सजाकर सुन्दर हिन्डोले में विराजमान करते हैं। धूप-दीप पुष्पादि से पूजन करते हैं, आरती उतारते हैं तथा माखन-मिश्री आदि का भोग लगाते हैं। कीर्तन-हरिगुनगान करते हैं। 12 बजे रात को खीरा चीरकर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कराते हैं। रात में मूर्ति के पास ही पृथ्वी पर शयन करना चाहिये। इस दिन गऊ दान का बहुत महत्व है। इस अकेले व्रत से करोड़ों एकादशी व्रतों का पुण्यफल प्राप्त होता है। इस दिन श्रीमद् भागवत महापुराण के दशम स्कंध में वर्णित भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं के श्रवन-मनन का विशेष माहात्म्य है।
आप सभी को जन्माष्टमी शुभ हो। प्रत्येक परिवार प्रसन्नता से भरपूर रहे। ( विस्तार से जानने के लिए और भी आलेख हैं..उन्हें पढ़ें)...निचे बाल-गोपाल कृष्ण कन्हैया की मनमोहिनी फोटो है उसे जरुर दर्शन करें... जय श्रीकृष्ण



दो दिन जन्माष्टमी! 
 
कृष्ण जन्माष्टमी सरकारी कलैण्डरों में भले 22 अगस्त को हो, लेकिन कई कृष्णभक्त 21 अगस्त को ही यह पर्व मनाने की तैयारी में है। रक्षाबंधन के आठ दिन बाद भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाई जाने वाले जन्माष्टमी को लेकर इस बार चतुर्थी दो बार आने से भ्रम की स्थिति बनी है। तिथि दोहराव होने से भाद्रपद माह का आठवां दिन 21 अगस्त को ही आ रहा है, जबकि इस दिन सप्तमी ही है।

भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव कई भक्त 22 अगस्त को दोपहर 2.14 बजे अष्टमी रोहिणी नक्षत्र आने के कारण कृष्ण जन्मोत्सव मनाने की तैयारी में है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में ही हुआ था।

अपनी-अपनी मान्यता
सम्प्रदायों की अलग-अलग मान्यता के चलते दो जन्माष्टमी की स्थिति बनी है। बलवाधीश भगवान को मानने वाले स्र्मात एवं शैव सम्प्रदाय के लोग सप्तमी (21 अगस्त) को ही जन्माष्टमी मान रहे हैं।

निम्बार्क एवं वैष्णव मत में यकीन रखने वाले भक्त अष्टमी (22 अगस्त) को ही जन्माष्टमी मनाएंगे।
राजेश मिश्रा 

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