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24 सितंबर 2011


49. महामाया शक्ति पीठ

Mahamaya Shakti Peeth


माता के 51 शक्ति पीठ सदा से ही श्रद्वालुओं के लिये विशेष पूजा का स्थान रहे है. माता के शक्ति पीठों की संख्या की सही जानकारी उपलब्ध नहीं है. अलग- अलग शास्त्र  शक्ति पीठों कि संख्या के विषय में विभिन्न मत रखते है. पर सामान्यत: 51 शक्ति पीठ माने जाते है. देवी भागवत पुराण के अनुसार माता के शक्ति पीठों की संख्या 108 है. कालिका पुराण में शक्ति पीठ 26 बताये गये है. जबकि शिव चरित्र में इन्हें 51 कहा गया है. इसके अलावा दुर्गा शप्तसती और तंत्रचूडामणि में शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है. 

Mahamaya Shakti Peeth- 51 Shakti Peeth

जिसमें कुछ प्रसिद्ध शक्ति पीठ इस प्रकार है.  1. नंदीपूर, यशोर, वक्रेश्वर आदि प्रमुख है.   
शक्ति पीठों की स्थापना से संबन्धित एक प्राचीन पौराणिक कथा प्रसिद्ध है, इसके अनुसार भगवान शिव की प्रिया देवी सती के पिता राजा दक्ष ने अपने घर के समारोह में देवी सती के पति भगवान शिव को बुलाने से इंकार किया तो, अपने पति का अपमान न सहन करते हुए देवी ने हवन की अग्नि में कूद कर प्राण दे दिये; 
इस घटना की जानकारी भगवान शिव को होने पर भगवान शिव माता के मृ्त शरीर को लेकर  ब्रह्माण्ड भ्रमण कर रहे थे तब भगवती सती के शरीर के अंग एशिया के विभिन्न भागों में गिरे, इन्हीं स्थानों को शक्ति पीठ के नाम से जाना जाता है.
भारत के कश्मीर में पहलगाँव के निकट माता का कंठ गिरा था. इसी स्थान को माता के 51 शक्ति पीठों में शामिल किया गया. यहां शक्ति को महामाया और भैरव को त्रिसंध्येश्वर कहा जाता है.   
यह स्थान उतर भारत में कश्मीर राज्य में पड्ता है.  अमरनाथ की इस पवित्र गुफा में जहां भगवान शिव के हिमलिंग का दर्शन होता है वहीं हिमनिर्मित एक पार्वतीपीठ भी बनता है. यहीं पार्वतीपीठ महामाया शक्तिपीठ के रूप में मान्य है. श्रावण पूर्णिमा को अमरनाथ के दर्शन के साथ-साथ यह शक्तिपीठ भी दिखाई देता है.

महामाया शक्ति पीठ के दर्शनों का महत्व | Mahamaya Shakti Peeth Darshan Importance

महामाया शक्तिपीठ में दर्शन-पूजन का अपना एक अलग महत्व है. यहां भगवती सती के अंग तथा अंगभूषण की पूजा होती है. आस्थावान भक्तों में मान्यता है कि जो यहां भक्ति और श्रद्धापूर्वक भगवती महामाया के साथ-साथ अमरनाथ वासी भगवान भोलेनाथ के हिमलिंग रूप की पूजा करता है, वह इस लोक में सारे सुखों का भोगकर शिवलोक में स्थान प्राप्त करता है.

माता शक्ति के दर्शनों का सर्वोतम शुभ समय | Auspicious Time for Mata Shakti Darshan

मां महामाया देवी मंदिर के लिये नवरात्र मुख्य उत्सव हैं. नवरात्र वर्ष में दो बार आते हैं: 9-9 दिन के लिये. नवरात्रों के दौरान विराट उत्सव, विशेष पूजा अर्चना एवं देवी के अभिषेक का आयोजन किया जाता है. श्रद्धालु सभी 9 दिन उपवास रखकर देवी की आराधना करते हैं. हज़ारों की संख्या में श्रद्धालुगण मीलों पैदल चलकर माता के दर्शनों के लिये यहां आते हैं. 
माता को शक्ति का रुप कहा गया है, बिना शक्ति के शिव भी अधूरे है. शिव को प्रसन्न करना हों. माता के किसी भी शक्ति पीठ में दर्शन के लिये जाते हुए श्रद्धालु को पूर्ण ब्रह्राचार्य का पालन करना चाहिए. ऎसा न करने से अशुभ होता है

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