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19 सितंबर 2011

Durgapuja Theam-2011


मोहम्मद अली पार्क में दिखेंगे नारी के विविध रूप

महानगर की चर्चित दुर्गापूजा यूथ एसोसिएशन (मोहम्मद अली पार्क) में इस बार पूजा घूमने आए दर्शकों को नारी या शक्ति का विविध रूप दिखेंगे। बीते साल यानी 2010 में थाईलैंड का बौद्ध मंदिर, 2009 में पर्यावरण के महत्व, 2008 में आतंकवाद के खतरे, 2007 में कन्या भ्रूण हत्या, 2006 में नारी शक्ति और 2005 में विज्ञान का तरक्की यानी सेटेलाइट की थीम पर यूथ एसोसिएशन ने दुर्गापूजा आयोजित कर न केवल वाहवाही लूटी थी, बल्कि कई पुरस्कार भी हासिल किए थे।

एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष रमेश लखोटिया और प्रधान सचिव विनोद शर्मा ने बताया कि नदिया जिले के जागुलिया के कार्तिक सेन नारी के विविध रूपों के अनुसार पंडाल और प्रतिमा बनाने में जुटे हैं। वहीं, बिजली सज्जा का काम विनस इलेक्ट्रिक को दिया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि इस बार की बिजली सज्जा नारी के विविध रूपों पर रोशनी डालने के साथ-साथ देखने लायक होगी।

लखोटिया ने बताया कि दुर्गोत्सव के बहाने एसोसिएशन का उद्देश्य रहता है कि पूजा देखने आए लोग जाते वक्त मां के प्रसाद कुछ नसीयत भी लेते जाएं। उन्होंने बताया कि इसके मद्देनजर बीते कुछ सालों में पर्यावरण, आतंकवाद, कन्या भ्रूण हत्या, नारी शक्ति और सेटेलाइट की थीम पर देवी दुर्गा समेत गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी और सरस्वती का आराधना की गई थी।

बजट, उद्घाटन और विसर्जन बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में कार्यकारी अध्यक्ष ने बताया कि बजट करीब 22-23 लाख का है। पूजा पंडाल का उद्घाटन 30 सितंबर को और विसर्जन आठ अक्तूबर को होगा। उद्घाटन कौन करेगा? इसका उत्तर देते हुए लखोटिया ने बताया कि राज्यपाल एमके नारायणन व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से संपर्क साधा जा रहा है। फिलहाल कोई स्वीकृति नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि 1969 से एसोसिएशन के बैनर तले पूजा आयोजित होती आ रही है। 1976 तक पूजा ताराचंद दत्त स्ट्रीट में होती थी, लेकिन अत्याधिक भीड़ व कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहने के कारण कोलकाता पुलिस व कोलकाता नगर निगम की सलाह पर 1977 से दुर्गापूजा मोहम्मद अली पार्क में आयोजित की जाने लगी।

उन्होंने बताया कि थीम के मुताबिक पंडाल को सजाने, संवारने और अंतिम रूप देने में सैंकड़ों कारीगर लगे हैं। थर्माकोल, कपड़ा, प्लाईवुड, प्लास्टर आफ पेरिस और मिट््टी से नारी के विविध रूपों को अंकित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह पूजा आयोजन का 43वां वर्ष है। एसोसिएशन के पूजा पंडाल में आने वाले दर्शकों को कहीं गर्भ में पल रहे बच्चे की हत्या करवाती नारी, कहीं गर्म तेल में जलती नारी तो कहीं अबला और कहीं सबला के रूप में नारी को देख पाएंगे।




कांच की कला में दिखेंगे दुर्गा के 16 रूप

विवेकानंद रोड और अमहर्स्ट स्ट्रीट के मुहाने पर मानिकतला-चलताबागान लोहापट््टी दुर्गा पूजा कमिटी के पूजा पंडाल में इस बार दर्शनार्थियों को कांच की कलाओं को बीच देवी दुर्गा के सोलह रूप दिखेंगे।
पूजा कमिटी के चेयरमैन संदीप भूतोड़िया और उपाध्यक्ष अशोक जायसवाल ने बताया कि 20 फीट चौड़े, 80 फीट लंबे और करीब 45 फीट ऊंचे पंडाल के पूर्व मेदिनीपुर कांथी के सुतनु माइती की परिकल्पना से बनाया जा रहा है। जायसवाल के मुताबिक करीबन 70 कारीगर बीते तीन महीने से पंडाल के लिए कांच के भाड़, कांच के गिलास, कांच की प्लेट, कांच की चूड़ियों से सजावट की सामग्री बने में जुटे हैं।

उन्होंने बताया कि चलता बागान के पूजा पंडाल में आने वाले लोगों को कांच से बनी दुर्गा के नारायणी, अंबिका व गौरी समेत कुल 16 रुप दिखेंगे। इसके अलावा दर्शक कांच की बारीक कला को भी निहार सकेंगे।
जायसवाल के मुताबिक 30 सितंबर को कई जाने माने व विशिष्ठ व्यक्तियों की मौजूदगी में पूजा पंडाल का उद्घाटन होगा और पूजा

संपन्न होने के बाद आठ अक्तूबर को नम आंखों से मां दुर्गा समेत गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी और सरस्वती को विदाई दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि जितेंद्र चंद्र पाल और बादल चंद्र पाल चतला बागान के पूजा पंडाल के लिए देवी दुर्गा के प्रतिमा बनाने में जुटे हैं। वहीं, बिजली सज्जा का काम नंदी इलेक्ट्रिक को दिया गया है। उपाध्यक्ष ने बताया कि बिजली की बचत के मद्देनजर ज्यादा से ज्यादा एलईडी लाइट लगाई जाएगी और कुछ स्थानों पर सोलर लाइट (सौर ऊर्जा) का प्रयोग किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि कमिटी हर वर्ष नई थीम और नई सोच के साथ पूजा आयोजित करती है। बीते साल यानी 2010 में मुगल इतिहास, 2009 में दक्षिण भारतीय मंदिर, 2008 में लोहे की जाल व स्प्रिंग, 2007 में नौका (बजरा), 2006 में महाभारत का रथ, 2005 में कुश, 2004 में काली सुराई, 2003 में बद्रीनाथ धाम और 2002 में 108 दुर्गा का पंडाल बना कर पूजा कमिटी के कई पुरस्कार जीते हैं। जायसवाल के मुताबिक पूजा कमिटी को बिगत में सीईएससी, द टेलीग्राफ, बीएसएनएल, ईटीवी बांग्ला, जामिनी साड़ी, दूरदर्शन कोलकाता, रोटरी क्लब और आनंद बाजार पत्रिका सम्मान मिल चुका है।




दुर्गापूजा में इस बार प्रकृति और पर्यावरण का नजारा

उत्तर कोलकाता स्थित अमहर्स्ट रो में सजने वाली दुर्गापूजा में दर्शक इस बार प्रकृति और पर्यावरण की खूबियों को महसूस कर पाएंगे। राम मोहन स्मृति संघ की ओर से अमहर्स्ट रो में आयोजित होने वाली सार्वजनीन दुर्गोत्सव कमिटी के सदस्य ने बताया कि कमिटी के सदस्यों की थीम पर पंडाल, प्रतिमा, बिजली सज्जा प्रकृति व पर्यावरण पर केंद्रित है।

सदस्यों ने बताया कि 1959 से रोम मोहन स्मृति संघ लगातार पूजा आयोजित करता आ रहा है। इस हिसाब से 52वां साल है। जायसवाल ने बताया कि साल-दर-साल हमारी पूजा के प्रति दर्शकों का रुझान बढ़ा है। उन्होंने खुलासा किया कि बीते कुछ सालों के दौरान पूजा कमिटी को कई पुरस्कारों से नवाजा गया है।

उन्होंने बताया कि संघ के सदस्य पूजा के तीन-चार महीने पहले से ही थीम सोचने लगते हैं। और बाद में पूजा कमिटी की बैठक में थीम के बारे में अंतिम निर्णय लिया जाता है। उनके मुताबिक इस बार प्रकृति और पर्यावरण की थीम पर पूजा आयोजित की जा रही है।
उन्होंने बताया कि उनके पूजा पंडाल में आने वाले लोगों को पंडाल के बाहर तक आदिकालीन (रावण युग) की लंका और पंडाल के भीतर राम राज्य का नजारा दिखेगा। उन्होंने बताया कि पंडाल बनाने वाले कारीगर प्लाईवुड पर मिट््टी से रामायण की झांकिया बनाने में व्यस्त हैं। वहीं पंडाल के बाहर सीमेंट का विशाल अंगद बनाया गया। उन्होंने बताया कि पूर्व मेदिनीपुर जिले स्थित कांथी के सुकुमार बैरागी की परिकल्पना को साकार रूप देने में दर्जनों कारीदर बीते एक महीने से जुटे हैं।

जायसवाल ने बताया कि बिजली सज्जा के माध्यम से भी प्रकृति, पर्यावरण और हरियाली के महत्व पर प्रकाश डाला डाएगा। बिजली सज्जा का काम तन्मय इलेक्ट्रिक को दिया गया है।

प्रतिमा के बारे में जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि महिषासुर मर्दनी देवी दुर्गा के दर्शन हमारे पंडाल के दर्शक शांति देवी के रूप में कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि शांति के प्रतीक के तौर पर बनी मूर्ति के हाथों में किसी प्रकार का कोई अस्त्र-शस्त्र नहीं होगा। मां दुर्गा का आठों हाथों में कमल के फूल होंगे।

उन्होंने बताया कि मूल रूप से हमारा प्रयास रहेगा कि लोग पूजा घूमने का आनंद लेने के साथ-साथ कुछ सीख भी लें, जो उनके और समाज के लिए हितकर हो।

बजट, उद्घाटन और विसर्जन के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देने हुए उन्होंने बताया कि इस बार पूजा का बजट सात लाख रुपए निर्धारित किया गया है। पूजा पंडाल का उद्घाटन एक अक्तूबर को और विसर्जन सात अक्तूबर को होगा।

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