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13 सितंबर 2011

Ekdashi Fasts And Ekadashi Dates


वर्ष भर की एकादशियां, Ekdashi Fasts And Ekadashi Dates, एकादशी व्रत

BHAGWAN VISHNU (VISHVARUP)

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। यहाँ 26 एकादशियों के नामों के वर्णन के साथ ही उनकी जानकारी भी हैं।

सभी उपवासों में एकाद्शी व्रत श्रेष्ठतम कहा गया है. एकाद्शी व्रत की महिमा कुछ इस प्रकार की है, जैसे सितारों से झिलमिलाती रात में पूर्णिमा के चांद की होती है. इस व्रत को रखते वाले व्यक्ति को अपने चित, इंद्रियों, आहार और व्यवहार पर संयम रखना होता है. एकाद्शी व्रत का उपवास व्यक्ति को अर्थ-काम से ऊपर उठकर मोक्ष और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है.

एकादशी - यथानाम-तथाफल
EKADASHI - RESULT, SO AS THE NAME

प्रत्येक वर्ष में बारह माह होते है. और एक माह में दो एकादशी होती है. अमावस्या से ग्यारहवीं तिथि, एकाद्शी तिथि, शुक्ल पक्ष की एकाद्शी कहलाती है. इसी प्रकार पूर्णिमा से ग्यारहवीं तिथि कृ्ष्ण पक्ष की एकाद्शी कहलाती है. इस प्रकार हर माह में दो एकाद्शी होती है. जिस वर्ष में अधिक मास होता है. उस साल दो एकाद्शी बढने के कारण 26 एकाद्शी एक साल में आती है. यह व्रत प्राचीन समय से यथावत चला आ रहा है. इस व्रत का आधार पौराणिक, वैज्ञानिक और संतुलित जीवन है.


एकाद्शी व्रत के फल
RESULT OF EKADASHI VRAT

एकाद्शी का व्रत जो जन पूर्ण नियम, श्रद्धा व विश्वास के साथ रखता है, उसे पुन्य, धर्म, मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस उपवास के विषय में यह मान्यता है कि इस उपवास के फलस्वरुप मिलने वाले फल अश्वमेघ यज्ञ, कठिन तपस्या, तीर्थों में स्नान-दान आदि से मिलने वाले फलों से भी अधिक होते है. यह उपवास, उपवासक का मन निर्मल करता है, शरीर को स्वस्थ करता है, ह्रदय शुद्ध करता है, तथा सदमार्ग की ओर प्रेरित करता है. तथा उपवास के पुन्यों से उसके पूर्वज मोक्ष प्राप्त करते है.

एकाद्शी व्रत के नियम
LAW OF EKADASHI VRAT

व्रतों में एकादशी के व्रत को सबसे उच्च स्थान दिया गया है, इसलिये इस व्रत के नियम भी अन्य सभी व्रत- उपवास के नियमों से सबसे अधिक कठोर होते है. इस उपवास में तामसिक वस्तुओं का सेवन करना निषेध माना जाता है. वस्तुओं में मांस, मदिरा, प्याज व मसूर दाल है. दांम्पत्य जीवन में संयम से काम लेना चाहिए.

दातुन में नींबू, जामून या आम की टहनी को प्रयोग करना चाहिए. यहां तक की उपवास के दिन पेड का पत्ता भी नहीं तोडना चाहिए. सूक्ष्म से सूक्ष्म जीवों को भी हानि न हो, इस बात का ध्यान रखना चाहिए. झूठ बोलने और निंदा सुनना भी उपवास के पुन्यों में कमी करता है.

सभी एकादशियों के नाम व तिथियां इस प्रकार है. इन्हें पढने के लिए एकादशी के नाम को क्लिक करें....

एकादशी का नाममासपक्ष 
  1. कामदा एकादशीचैत्रशुक्ल
  2. वरूथिनी एकादशीवैशाखकृष्ण
  3. मोहिनी एकादशीवैशाखशुक्ल
  4. अपरा एकादशीज्येष्ठकृष्ण
  5. निर्जला एकादशीज्येष्ठशुक्ल
  6. योगिनी एकादशीआषाढ़कृष्ण
  7. देवशयनी एकादशीआषाढ़शुक्ल
  8. कामिका एकादशीश्रावणकृष्ण
श्रावणशुक्ल
10. अजा एकादशीभाद्रपदकृष्ण
11. पद्मा एकादशीभाद्रपदशुक्ल
12. इंदिरा एकादशीआश्विनकृष्ण
13. पापांकुशा एकादशीआश्विनशुक्ल
14. रमा एकादशीकार्तिककृष्ण
15. देव प्रबोधिनी एकादशीकार्तिकशुक्ल
16. उत्पन्ना एकादशीमार्गशीर्षकृष्ण
17. मोक्षदा एकादशीमार्गशीर्षशुक्ल
18. सफला एकादशीपौषकृष्ण
19. पुत्रदा एकादशीपौषशुक्ल
20. षटतिला एकादशीमाघकृष्ण
21. जया एकादशीमाघशुक्ल
22. विजया एकादशीफाल्गुनकृष्ण
23. आमलकी एकादशीफाल्गुनशुक्ल
24. पापमोचिनी एकादशीचैत्रकृष्ण
25. पद्मिनी एकादशीअधिकमासशुक्ल
26. परमा एकादशीअधिकमासकृष्ण

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