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24 सितंबर 2011

Tarapith Temple


शक्तिपीठ तारापीठ | Shakti Peeth Tarapith


Maa Tara (Tarapith), Westbengal, Photo by : Rajesh Mishra

पश्चिम बंगल के प्रमुख पर्यटन स्थलों में एक है सिद्ध तारापीठ. इस स्थान का महत्व असम में स्थित कामख्या और राजगीर में स्थित छिन्नमस्तिका के समान ही है. तंत्र साधना में विश्वास रखने वालों के लिए यह परम पूज्य स्थल है. यहां पर तंत्र साधक श्रद्धा एवं विश्वास के साथ साधना करते हैं. तंत्र साधकों के अलावा भी लोग मुराद मांगने देवी तारा के मंदिर में आते हैं. यह मंदिर महाश्मशान के बीच में है.  

तारापीठ की प्राचीन कथा | Tarapith Katha in Hindi

तारापीठ की कथा इस प्रकार है. दक्ष प्रजापति के यज्ञ की अग्निकुण्ड में कूद कर सती द्वारा आत्म बलिदान करने के बाद शिव विचलित हो उठे और सती के शव को अपने कंधे पर लेकर आकाश मार्ग से चल दिये. उस समय देवताओं के अनुनय पर भगवान विष्णु ने अपने चक्र से सती के शव के खंडित कर दिया. जिन स्थान पर देवी सती के अंग पृथ्वी पर गिरे वह शक्तिपीठ के नाम से विख्यात हुआ. तारापीठ भी उन्हीं में से एक है.  माना जाता है कि इस स्थान पर देवी सती के नेत्र गिरे थे. प्राचीन काल में महर्षि वशिष्ठ ने इस स्थान पर देवी तारा की उपासना करके सिद्धियां प्राप्त की थी. उन्होंने इस स्थान पर एक मंदिर भी बनवाया था जो अब धरती में समा गया है. 

तारापीठ मंदिर | Tarapith Mandir

वर्तमान तारापीठ मंदिर का निर्माण जयव्रत नामक एक व्यापारी ने करवाया था. तारापीठ मंदिर निर्माण की कथा है कि एक बार जयब्रत नामक व्यापारी व्यापार के सिलसिले में तारापीठ के पास के गॉव में पहुंचा वहां रात्रि के अंतिम प्रहर में देवी तारा उसके सपने में आई और व्यापारी से कहा कि महाश्माशान के बीच में एक ब्रह्मशिला है उसे उखाड़कर विधिवत स्थापित करो. व्यापारी ने देवी के आदेश के अनुसार उस स्थान की खुदाई करवाकर ब्रह्मशिला को स्थापित किया. इसी स्थान पर जयब्रत ने देवी तारा का मंदिर बनवाया जिसमें देवी तारा की एक भव्यमूर्ति भी स्थापित करवाई. इस मूर्ति में देवी तारा की गोद में बाल रूप में भगवान शिव हैं जिस मॉ स्तनपान करा रही हैं. 

तारापीठ महाश्मशान | Tarapith Maha Shamshan

तारापीठ मंदिर का प्रांगण महाश्मशान में है फिर भी यहां किसी प्रकार का भय नहीं होता है. इस महाश्मशान की चिता कभी बुझती नहीं है. यह स्थान द्वारका नामक नदी घिरा हुआ है. यह भारतवर्ष की एक मात्र नदी है जो दक्षिण से उत्तर दिशा में यहां प्रवाहित होती है. 19 एवं 20 सदी के मध्य में यहां वामखेपा नामक एक भक्त ने देवी तारा की साधना करके उनसे सिद्धियां हासिल की थी. यह रामकृष्ण परमहंस के समान ही देवी के परम भक्तों में से एक थे.
Tarapith Shamshan

तारापीठ का महात्म्य | Tarapith Mahatmya

तारापीठ में देवी सती के नेत्र गिरे थे अत: इस स्थान को देवी तारा को नयन तारा भी कहा जाता है. तारापीठ का महात्म्य है कि यहां श्रद्धा-भक्ति के साथ देवी का ध्यान करके जो मुराद मांगा जाता है वह पूर्ण होता है. देवी तारा की सेवा आराधना से रोग से मुक्ति मिलती है. इस स्थान पर सकाम और निष्काम दोनों प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती है.


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