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11 अक्तूबर 2011

लक्ष्मी-गणेश पूजन क्यों?



यूं तो गणेश जी अपनी पत्नियों देवी रिद्धि और सिद्धि के साथ पूजे जाते हैं लेकिन दीपावली के दिन श्री लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी-गणेश पूजन करने से विघ्नों का नाश होता है व घर में धन-धान्य की कोई कमी नहीं रहती। लक्ष्मी के साथ गणेश जी का पूजन क्यों? क्योंकि लक्ष्मी धन-धान्य और समृद्धि का प्रतीक है और ये सब बिना विवेक किसी के पास ज्यादा समय तक नहीं रह सकते। समृद्घि के लिए विवेक का होना बहुत जरूरी है और गणेश जी विवेक और बुद्धि के देवता है। बिना विवेक के लक्ष्मी कहीं भी नहीं टिक सकती इसीलिए दीपावली की रात को लक्ष्मी के साथ गणेश जी का भी पूजन किया जाता है। वैसे शास्त्र में यह भी कहा गया है की इस दौरान विष्णुजी शयनकाल में रहते हैं इसलिए लक्ष्मीजी के साथ गणेशजी की पूजा की जाती है..

लक्ष्मी और गणेश
परंपरानुसार दीपावली की रात गणेशजी और लक्ष्मीजी को एक ही वेदी पर बैठाया जाता है, जहां लक्ष्मी दाहिनी ओर तथा गणेश जी बाईं और विराजते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार लक्ष्मीजी और गणेशजी एक दूसरे से भिन्न है। जहां प्रत्येक शुभ कार्य की शुरूआत और विघ्नों का नाश करने वाले देवता गणेशजी शिव और पार्वती के पुत्र हैं वहीं धन की देवी लक्ष्मीजी श्री हरि विष्णु जी की पत्नी हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार गणेशजी बहुत सारे कार्य करते हैं। वह विघ्नों को नाश करने वाले हैं। जबकि सोने के पत्तों वाले कमल पर आसीन लक्ष्मीजी धन, संपन्नता, सुंदरता, दया और आकर्षण की देवी हैं। लेकिन जब लक्ष्मी और गणेश की पूजा एक साथ की जाती है दोनों ही भगवान अपने भक्त को वर्ष भर इच्छाओं की पूर्ति का वचन देते हैं। इसलिए लक्ष्मीजी और श्रीगणेश की पूजा साथ-साथ की जाती है।

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