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11 अक्तूबर 2011

इतिहास और दीवाली

सम्राट विक्रामादित्य का राज्याभिषेक दीवाली के दिन हुआ था। कार्तिक अमावस्या के दिन सिखों के छठे गुरु हरगोविन्दसिंहजी बादशाह जहांगीर की कैद से मुक्त होकर अमृतसर वापस लौटे थे। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर का निर्माण भी दीवाली के ही दिन शुरू हुआ था। 2500 वर्ष पूर्व गौतम बुद्ध के समर्थकों ने उनके स्वागत में लाखों दीपक जलाकर दीवाली मनाई थी।

जैन धर्म में दीपावाली
जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर ने भी दीपावली के दिन ही बिहार के पावापुरी में शरीर त्यागा था। महावीर-निर्वाण संवत इसके दूसरे दिन से शुरू होता है। इसलिए अनेक प्रातों में इसे वर्ष के आरंभ की शुरूआत मानते हैं। दीपोत्सव का उल्लेख प्राचीन जैन ग्रंथों में मिलता है। कल्पसूत्र में कहा गया है, ‘महावीर-निर्वाण के साथ जो अन्तर्ज्योति सदा के लिए बुझ गई है, आओ हम उसकी क्षतिपूर्ति के लिए बहिर्ज्योति के प्रतीक दीपक जलाएं।’

आर्यसमाज के संस्थापक महर्षि दयानंद ने दीवाली के दिन अजमेर के पास अवसान लिया था। स्वामी रामतीर्थ का जन्म व महाप्रयाण दीवाली के दिन हुआ था।

मुगलों की दीपावली
मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में दौलतखाने के सामने 40 गज ऊंचे बांस पर एक बड़ा आकाशदीप दीपावली के दिन लटकाया जाता था। बादशाह जहांगीर भी दीवाली धूमधाम से मनाते थे। बहादुर शाह जफर से लेकर शाह आलम द्वितीय तक के समय में भी दीपोत्सव मनाया जाता था। यहां तक की लाल किले में कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे जिसमें हिन्दू और मुसलमान सौहार्द के साथ भाग लेते थे।

प्राचीन सभ्यता में दीपावाली
500 ईसा वर्ष पूर्व मोहनजोदड़ो सभ्‍यता के प्राप्त अवशेषों में मिट्टी की एक मूर्ति के अनुसार उस समय भी दीवाली मनाई जाती थी।

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