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19 दिसंबर 2011

Constraints on Bhagavad Gita?

भगवद्‍गीता पर लग सकता है बैन?

 


हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ भगवद्‍गीता को समूचे रूसमें कट्टरपंथी साहित्य करार देते हुए बैन किए जाने कीआशंका पैदा हो गई है। पब्लिक प्रॉसिक्यूटरों ने गीता परबैन लगाने के लिए साइबेरिया के तोमस्क शहर की एकअदालत में मामला दर्ज कराया है। इस पर सोमवार कोअदालत अपना अंतिम फैसला सुनाने वाली है।

भगवद्‍गीता के बारे में यह फैसला प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह का रूस दौरा समाप्त होने के ठीक दो दिन बाद आनेवाला है। मनमोहन सिंह रूसी राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव केसाथ द्विपक्षीय शिखर बैठक के लिए 15 से 17 दिसंबर तकरूस के दौरे पर थे।

मामला तोमस्क की अदालत में इस साल जून से चल रहाहै। इस मामले में इस्कॉन के संस्थापक ए . सी . भक्तिवेदांतस्वामी प्रभुपाद द्वारा रचित ' भगवद्‍गीता एज इट इज ' पर प्रतिबंध लगाने और इसे सामाजिक कलह फैलानेवाला साहित्य घोषित करने की मांग की गईहै। साथ ही रूस में इसके बांटने - बेचने को भी गैरकानूनी घोषितकरने की भी मांग की गई है।

मॉस्को में बसे लगभग 15 हजार भारतीयों और इस्कॉन के अनुयायियों ने मनमोहन सिंह से अपील की है कि वेभगवद्‍गीता के पक्ष में इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कूटनीतिक हस्तक्षेप करें। रूस में इस्कॉन के अनुयायियों ने भीनई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने के लिए लिखा है।


मॉस्को के 40 वर्ष पुराने श्रीकृष्ण मंदिर के पुजारी और इस्कॉन से जुडे़ साधु प्रिय दास ने कहा , ' इस मामले मेंसोमवार को तोमस्क अदालत का अंतिम फैसला आने वाला है। हम चाहते हैं कि भारत सरकार रूस में हिंदुओं केधार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए हरसंभव कोशिश करे। '

पब्लिक प्रॉसिक्यूटरों द्वारा मामला दायर किए जाने के बाद अदालत ने इस ग्रंथ पर विशेषज्ञों की राय लेने केलिए इसे इस साल 25 अक्टूबर को तोमस्क यूनिवर्सिटी भेज दिया था। रूस के हिंदू संगठनों , खासतौर से इस्कॉनके अनुयायियों का कहना है कि यूनिवर्सिटी इस काम में सक्षम नहीं है , क्योंकि वहां इंडॉलॉजिस्ट्स नहीं हैं।

हिंदुओं ने अदालत में कहा है कि यह मामला धार्मिक पक्षपात और रूस के एक बहुसंख्यक धार्मिक समूह कीअसहिष्णुता से प्रेरित है। हिंदुओं ने मांग की है कि धार्मिक परंपराओं के पालन के लिए उनके अधिकारों की रक्षाकी जानी चाहिए।

दास ने कहा , ' उन्होंने न केवल भगवद्‍गीता पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की है , बल्कि हमारे धार्मिकविश्वासों और उपदेशों को चरमवादी करार देने की भी कोशिश की है। '

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