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22 सितंबर 2011

Diwali Puja Method

दीपावली पूजन – सुख-समृद्धि
दायक है श्रीगणेश-लक्ष्मी पूजा


दीपावली यानी दीप पक्तियां, अमावस्या को जब चन्द्रमा और सूर्य दोनों किसी भी एक डिग्री पर होते हैं तो गहन अंधकार को जन्म देते हैं। दीपावली गहन अंधकार में भी प्रकाश फैलने का पर्व है, यह त्योहार हम सभी को प्रेरणा देता है कि अज्ञान रूपी अंधकार में भटकने के बजाये हम अपने जीवन में ज्ञान रूपी प्रकाश से उजाला करें और जगत के कल्याण में सहभागिता करें।




दीपावली की रात्रि को माता महालक्ष्मी की कृपा जिस व्यक्ति या परिवार पर हो जाये, वह कभी भी धन अभाव महसूस नहीं करता और हमेशा सुख-समृद्धि से युक्त हो जाता है।


धन की आवश्यकता हर किसी को होती है। धन के बिना जीवन अधूरा है क्योंकि आवश्यकताओं की पूर्ति धन के अभाव में नहीं हो सकती। जीवन जीने के लिये धन तो चाहिये ही! दीपावली के शुभ अवसर पर महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिये कुछ पूजा-आराधना इस प्रकार से करनी चाहिये कि पूरे वर्ष धन-धान्य में वृद्धि होकर सुख-समृद्धि बनी रहे और निरन्तर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहे। रावण के पास जो सोने की लंका थी, कहते हैं वह लंका रावण को महालक्ष्मी की कृपा से ही प्राप्त हुई थी। रावण के भाई कुबेर जो धनाधिपति के रूप में भी जाने जाते हैं, उनके साथ भी लक्ष्मी का शुभ आर्शीवाद ही था।

दीपावली-गणेश-लक्ष्मी संक्षिप्त पूजन विधि

दीपावली के शुभ अवसर पर भगवती श्री महालक्ष्मी जी एवं श्रीगणेश जी का ही विशेष पूजन किया जाता है, क्योंकि पूरे वर्ष में एक यही पर्व है जिसमें लक्ष्मी का पूजन भगवान विष्णु के साथ नहीं होता क्योंकि भगवान विष्णु तो चार्तुमास शयन कर रहे हैं इसलिये लक्ष्मी जी के साथ श्री गणेश जी का पूजन दीपावली के शुभ अवसर पर किया जाता है।


जो व्यक्ति शास्त्रोक्त विधि से पूजन नहीं कर सकते, उनके लिये बिल्कुल ही सरल विधि दी जा रही है। महालक्ष्मी पूजन के लिये लक्ष्मी-गणेश की नवीन मूर्ति, श्रीयंत्रा, कुबेर मंत्रा, फल-फूल, धूप-दीपक, खील-बतासे, मिठाई, पंचमेवा, दूध, दही, शहद, गंगाजल, रोली, कलावा, कच्चा नारियल, तेल के दीपक, श्रद्धा व सामथ्र्य अनुसार दीपकों की कतार और एक घी के दीपक की आवश्यकता होती है।




पूजन के लिये एक थाली में रोली से ओम और स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर गणेश जी व माता लक्ष्मी जी को स्थापित करे। थाली में एक तरफ षोडस् मातृका पूजन के लिये रोली से 16 बिन्दु लगायें। नवग्रह पूजन के लिये रोली से ही खाने बनायें, सर्प आकृति बनायें, एक तरफ अपने पितरों को स्थान दें (थाली में एक बिन्दु लगायें) अब सर्वप्रथम पूर्वाभिमुख अथवा उत्तराभिमुख बैठकर आचमन, पवित्रा-धारण-प्राणायाम कर अपने ऊपर तथा पूजा-सामग्री पर निम्न मंत्र पढ़ते हुये गंगाजल छिड़के-



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ओइम् अपवित्राः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोडपि वा।

य स्मरेत पुण्डरीकाक्षं सः बाह्य अत्यंतरः शुचि।।



इसके पश्चात् सभी देवी-देवताओं को गंगाजल छिड़ककर स्नान करायें, तिलक करें, डोरी (कलावा), तत्पश्चात गंगाजल मिले हुए जल से भरा लोटा या कलश का पूजन करे, डोरी बांधे, रोली से तिलक करे, पुष्प व चावल कलश पर वरूण देवता को नमस्कार करते हुये अर्पित करें।


इसके पश्चात् थाली में जो 9 खाने वाली जगह है, उस पर रोली, डोरी, पुष्प, चावल, फल, मिठाई आदि चढ़ाते हुये नवग्रह का ध्यान व प्रणाम करे और प्रार्थना करें कि सभी नवग्रह सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, बृह॰, शुक्र, शानि, राहू, केतू शान्ति प्रदान करें।


तत्पश्चात् माता महालक्ष्मी जी का पूजन ’ओइम् महालक्ष्म्मै नमः‘ मन्त्र बोलते हुये सभी वस्तुएं यथा रोली, कलावा (डोरी), पुष्प, मीठा व फल आदि लक्ष्मी जी को अर्पित करें। लक्ष्मी जी के पास बही खाते, कलम-दवात, कुबेर-यंत्र, श्रीयंत्र आदि रखे।


कुबेर यंत्र पर ओम कुबेराय नमः मंत्र बोल कर पुष्प, चावल, रोली, कलावा (डोरी), फल व मिठाई आदि अर्पित करें। व्यापारी वर्ग बाट-तराजू की पूजा पुष्प चावल हाथ में लेकर ’ओम तुलाधिवठातृ देवतायें नमः ‘ बोलते हुये अर्पित करे, इसके पश्चात् तेल के सभी दीपक जलाएं और पुष्प व चावल हाथ में लेकर ओम दीपावल्यै नमः का उच्चारण कर अर्पित करें।


इसके पश्चात अन्त में थाली में कपूर और घी का दीपक रखकर गणेश जी तथा लक्ष्मी जी की आरती करें। स्वयं व परिवार के सभी सदस्यों को भी तिलक करें व रक्षा-सूत्रा हाथ में बांधें, इसके पश्चात् हाथ में पुष्प व चावल लेकर संकल्प करें, अपना नाम और गोत्रा बोलते हुये कि मैं सपरिवार आज दीपावली के शुभ अवसर पर महालक्ष्मी का पूजन, कुबेर व गौरी-गणपति के साथ धन-धान्यादि, पुत्र-पौत्रादि, सुख समृद्धि हेतु कर रहा हूं। हाथ के पुष्प व चावल नीचे छोड़ दें। फिर निम्न प्रार्थना करें:-


इन्द्र, पूषा, बृहस्पति हमारा कल्याण करें, पृथ्वी, जल अग्नि, औषधि हमारे लिये हितकारी हो, भगवान विष्णु हमारा कल्याण करे। अग्नि देवता, सूर्य देवता, चन्द्रमा देवता, वायु देवता, वरूण देवा व इन्द्र आदि देवता हमारी रक्षा करें। सभी दिशाओं और पृथ्वी पर शांति रहे। हम गणेश जी, लक्ष्मी-नारायण, उमा-शिव, सरस्वती, इन्द्र, माता-पिता व कुल देवता ग्राम या नगर देवता, वास्तुदेवता, स्थान देवता, एवम् सभी देवताओं और ब्राहमणों को प्रमाण करते हैं।


इसके बाद ’ओम श्री गणेशाय नमः‘ बोलते हुये गणेश जी का पुष्प, दूर्बादल आदि से पूजन करें। भगवान गणेश जी को नैवेद्य मिठाई, फल समर्पित करें। फिर पुष्प व चावल (अक्षत) हाथ में लेकर ओम भूभुर्वः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः बोलते हुये माता पार्वती का पूजन करे, नैवेद्य व फल समर्पित करें। हाथ जोड़कर प्रणाम करें।


तत्पश्चात् पुष्प व अक्षत हाथ में लेकर 16 बिन्दु अर्थात षोडशमात् का पूजन करें, पुष्प, चावल, फल, मिठाई, डोरी (कलावा) रोली आदि समर्पित करें, प्रमाण करें, प्रार्थना करें:-

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’हे विष्णु प्रिये लक्ष्मी जी हमें धन-धान्य से परिपूर्ण रखें। आप ही सर्व हैं। हमें पूजन, मंत्र, क्रिया नहीं आती, हम अपराधी हैं, पापी हैं। आपके इस पूजन में किसी प्रकार की, किसी भी वस्तु की कमी या त्रुटी हो, कमी हो तो हमें क्षमा करना। यह कहते हुये पुष्प और अक्षत लक्ष्मी जी पर अर्पित कर दें और फिर हाथ जोड़कर पूरी श्रद्धा से यह प्रार्थना करें कि भगवान गणेश जी व माता लक्ष्मी जी हमारे घर में स्थायी निवास करें और अन्य सभी देवी देवता हमें आर्शीवाद देते हुये अपने-अपने स्थान पर प्रस्थान करने की कृपा करें। इसके पश्चात् भोग लगाकर प्रसाद को घर में सबको बांटकर ग्रहण करें।

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