आपका स्वागत है...

मैं
135 देशों में लोकप्रिय
इस ब्लॉग के माध्यम से हिन्दू धर्म को जन-जन तक पहुचाना चाहता हूँ.. इसमें आपका साथ मिल जाये तो बहुत ख़ुशी होगी.. इस ब्लॉग में पुरे भारत और आस-पास के देशों में हिन्दू धर्म, हिन्दू पर्व त्यौहार, देवी-देवताओं से सम्बंधित धार्मिक पुण्य स्थल व् उनके माहत्म्य, चारोंधाम,
12-ज्योतिर्लिंग, 52-शक्तिपीठ, सप्त नदी, सप्त मुनि, नवरात्र, सावन माह, दुर्गापूजा, दीपावली, होली, एकादशी, रामायण-महाभारत से जुड़े पहलुओं को यहाँ देने का प्रयास कर रहा हूँ.. कुछ त्रुटी रह जाये तो मार्गदर्शन करें...
वर्ष भर (2017) का पर्व-त्यौहार नीचे है…
अपना परामर्श और जानकारी इस नंबर
9831057985 पर दे सकते हैं....

धर्ममार्ग के साथी...

लेबल

आप जो पढना चाहते हैं इस ब्लॉग में खोजें :: राजेश मिश्रा

31 मार्च 2012

गंगा दशहरा- गंगा का धरती पर अवतरण

गंगा दशहरा के अवसर पर्व पर मां गंगा में डुबकी लगाने से सभी पाप धुल जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। वैसे तो गंगा स्नान का अपना अलग ही महत्व है, लेकिन इस दिन स्नान करने से मनुष्य सभी दुःखों से मुक्ति पा जाता है। ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की दशमी यानी 11 जून को गंगा दशहरा मनाया जाएगा। इस पर्व के लिए गंगा मंदिरों सहित अन्य मंदिरों पर भी विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इस दिन स्वर्ग से गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में स्नान करने से दस पापों का हरण होकर अंत में मुक्ति मिलती है। गंगा दशहरा के दिन दान पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन दान में सत्तू, मटका और हाथ का पंखा दान करने से दोगुना फल प्राप्त होता है। ज्योतिषियों के अनुसार गंगाजी को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने के लिए अंशुमान के पुत्र दिलीप व दिलीप के पुत्र भागीरथ ने बड़ी तपस्या की। उसकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर माता गंगा ने उन्हें दर्शन दिए और कहा कि मैं तुम्हें वर देनी आई हूं। राजा भागीरथ ने बड़ी नम्रता से कहा कि आप मृत्युलोक में चलिए। गंगा ने कहा कि जिस समय मैं पृथ्वीतल पर गिरूं, उस समय मेरे वेग को कोई रोकने वाला होना चाहिए। ऐसा न होने पर पृथ्वी को फोड़कर रसातल में चली जाऊंगी। भागीरथ ने अपनी तपस्या से रुद्रदेव को प्रसन्न किया तथा समस्त प्राणियों की आत्मा रुद्रदेव ने गंगाजी के वेग को अपनी जटाओं में धारण किया। शास्त्रों में उल्लेख है कि जीवनदायिनी गंगा में स्नान, पुण्यसलिला नर्मदा के दर्शन और मोक्षदायिनी शिप्रा के स्मरणमात्र से मोक्ष मिल जाता है। शिप्रा तट पर विशेष तिथियों के साथ हर दिन ही श्रद्घालुओं का तांता लगा रहता है। गंगा दशहरा उत्सव का उजास शिप्रा नदी के तट पर भ‍ी फैला है। श्रद्धालु शिप्रा की आरती में शामिल होने के साथ-साथ गर्मी के चलते घाटों पर भी बैठकर शीतलता और सुकून पा रहे हैं गंगा आज प्रदूषण के अत्यंत भयानक दौर से गुजर रही है। पर्यावरण की सुरक्षा से उदासीन भोगवादी प्रवृत्ति ने ग्लोबल वार्मिग अर्थात पृथ्वी का तापमान बढा कर इस महानदी के अस्तित्व पर भीषण संकट खडा कर दिया है। गंगावतरण की तरह उनका लुप्त होना भी ऐतिहासिक घटना होगी, जो भारत वर्ष का मानचित्र ही नहीं बल्कि उसकी युगों पुरानी सभ्यता को भी बदल सकती है। पुराणों में यह कथा प्रसिद्ध है कि भगवती लक्ष्मी देवी सरस्वती और गंगाजी परस्पर शापवश नदी बनकर भारत वर्ष में पधारी। ब्रह्मवैवर्त्तपुराण के प्रकृति खण्ड में इस कथानक का विस्तार से वर्णन है। जब इन देवियों ने भगवान नारायण से यह पूछा कि उन्हें कब तक पृथ्वी पर रहना होगा तब श्रीहरि ने उनको यह आश्वासन दिया – ”कलौ पच्चसहस्रे च गते वर्षे च मोक्षणम। युष्मांक सरितां भूयो मदगृहे चा५५मविष्यथ।“ यानि कलियुग के पांच हजार वर्ष व्यतीत हो जाने पर तुम नदीरुपिणी देवियों का उद्धार हो जाएगा। तदन्तर तुम लोग मेरे पास वापस लौट जाओगी। ब्रह्मवैवर्त्तपुराण इस श्लोक में भगवान विष्णु, गंगा, सरस्वती एवं लक्ष्मीजी को कलियुग में मात्र पांच हजार वर्ष तक ही पृथ्वी पर नदी के स्वरुप में रहने का निर्देष देते हैं। ब्रह्मवैवर्त्तपुराण में प्रकृति खण्ड के सातवें अध्याय के दसवें श्लोक से भी उपयुक्त तथ्य सामने आता है- कलौ पच्जसहस्रं च वर्ष स्वित्वा च भारते। जम्मुस्ताश्च सरिप्रदूपं विहाय श्रीहरेः पद्प। भारत में कलियुग के पांच सहस्र वर्ष व्यतीत होने पर वे सभी (गंगा आदि) आपना नदी रुप त्याग कर श्रीहरि के धाम में चली जाएगी। ब्रह्मवैवर्त्तपुराण प्रकृति खण्ड के दसवें अध्याय में वर्णित भगवती गंगा एवं पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण का संवाद ध्यान देने योग्य है। गंगाजी कहती हैं- हे भगवान, सरस्वती के शाप, आपकी इच्छा और महाराज भगीरथ के तप के कारण मैं अभी तक भारत वर्ष जा रही हूं किन्तु हे प्रभो! वहां पापी लोग अपने पाप का बोझ मुझ पर लाद देगें। यह स्थिति कैसे खत्म होगी? मुझे भारत वर्ष में कितने वर्षो तक रहना पडेगा। इस पर परमेष्वर श्रीकृष्ण ने कहा- अद्यप्रभूति देवेशि कलेः पज्चसहस्रकं, वर्ष स्थितिस्ये भारस्या भुवि शापेन भारते।। ”देवेशि! कलियुग के पांच हजार वर्ष तक तुम्हें सरस्वती के शाप से भारत वर्ष में रहना होगा।“ श्रीमद्देवी भागतवत के नवम स्कन्ध में भी यही सारी बातें शब्दतशः कही गयी हैं। इसमें सम्पूर्ण कथानक एवं श्लोक ब्रह्मवैवर्त्तपुराण के समान ही हैं। धर्मग्रन्थों में वर्णित कथाओं में आए तथ्यों का सुक्ष्मतापूर्वक अध्ययन करने पर यह निर्ष्षक निकलता है कि भागीरथी गंगा की पृथ्वी पर कलियुग के 5000 वर्ष तक विराजमान रहने का विधान ही भगवान द्वारा निर्दिष्ट किया गया था। अन्तर्यामी प्रभु ने अपनी दिव्य दृश्टि से यह देख लिया था कि कलियुग में पांच हजार वर्ष बीत जाने के उपरांत मनुष्य दुर्बुद्विवश गंगाजी की पवित्रता एवं शुद्धता को भंग करके इसे प्रदूषित करने में कोई कसर नहीं छोडेगे। तब इस देवनदी को धरती पर प्रदूषण की गंभीर स्थिति से गुजरना पडेगा। आज यह सत्य सामने आ चुका है। भारतीय काल गणना के अनुसार वर्तमान विक्रम संवत 2069 तक कलियुग के 5113 वर्ष व्यतीत हो चुके हैं। धरा पर गंगाजी के रहने की भगवान द्वारा निर्दिश्ट अवधि पांच हजार वर्श से 113 वर्ष ज्यादा बीत गये हैं। इस प्रकार गंगाजी की धरती पर रहने की अवधि तो पूरी हो चुकी है। गंगा ती को ईमानदारी के साथ मानवकृत प्रदूशण से मुक्त करने के लिए न जुटे तो भगवती गंगा हम सबको छोडकर निष्चय ही अपने धाम वापस चली जाएगी। हिमालय (उत्तराखण्ड) में गंगाजी के जल का मुख्य स्रोत ग्लेशियर जिस तेजी से पिघल रहा है उससे भविष्य में गंगाजी के सूख जाने का संकट पैदा हो सकता है। गंगोत्री से गोमुख निरंतर आगे खिसक रहा है। प्रकृति की चेतावनी को नजरअंदाज किया गया और गंगा को प्रदूषण से मुक्त कराने का अभियान चलाने के साथ पहाडों पर हो रही अंधाधुंध खुदाई तथा वनों की कटाई को नहीं रोका गया तो भावी पीढयां गंगाजी के दर्षन से वंचित हो जाएगी। हमारे सुख और समृद्धि के स्रोत वन हिमालय पहाड की देन हैं। इस पहाड की ऊॅची चोटियां सदैव बर्फ से ढकी रहती हैं। फिर बीच-बीच में गंगोत्री हिमनद ग्लेषियर बर्फ के लम्बे चौडे मैदान हैं। सतत बर्फ के नीचे ढके रहने वाले क्षेत्र साल में छह माह बर्फ से ढके रहते हैं। बसंत ऋतु आते ही बर्फ पिघलने लगती है और इसके नीचे मखमली घास यानि बुग्याल उग आती हैं। पहाडी ढालों के जंगल नदियों की मॉ हैं। मिट्टी बनाने के कारखाने हैं। हिमालय इतना विशाल और महान हैं कि वह केवल उसकी गोद में बसने वाले पर्वतीय लोगों का पिता की पालन पोषण ही नहीं करता बल्कि इससे निकलने वाली नदियां समुद्र में मिलती हैं। 2500 किमी० लम्बी और कई किमी० चौडी यह पर्वतवाला अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, नेपाल, चीन, भूटान, वर्मा और बंगलादेश के जीवन को प्रभावित करता है। यह इस्लाम, बौद्ध, हिन्दू और अन्य संस्कृति का संगम है। हजरत बल, अमरनाथ, गंगोत्री, बदरीनाथ, केदारनाथ, रुमटेक बौद्ध मठ जैसे धर्मो के पवित्र तीर्थ हिमालय में है। हिमालय और खासतौर से इसके अन्तर्गत उत्तराखण्ड का पवित्र क्षेत्र तपोभूमि के नाम से विख्यात है। अनादिकाल से यहां पर कई तपस्वियों ने तप किया। मानव जाति कल्याण के लिए चिंतन किया और महान ग्रंथों की रचना की। व्यास देव ने बदरी वन में १८ पुराणों की रचना की। भगीरथ जी की तपोभूमि गंगोत्री थी। हिमालय की बेटी गंगा जो सब नदियों की प्रतीक है। करोडों लोग अपनी मॉ मानते हैं। गंगा मैय्या ने मॉ की तरह पालन पोषण किया। गंगा जल के पान और स्नान से कई रोगों से मुक्ति होती हैं। गंगा और हिमालय केवल पर्वतवासियों और भारतवासियों की ही नहीं सारी मानव जाति की अनमोल विरासत हैं। परन्तु आज अनमोल विरासत पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हिमालय खल्वाट हो गया है। इससे निकलने वाली नदी-नालों में पानी या तो बहुत कम दिखाई देता है या कभी तबाही मचाने वाली बाढे आती हैं। हिमालय अब कुद्ध पिता की तरह कठोर दण्ड देने वाला दिखाई दे रहा है परन्तु यह शुरुआत हमारी ओर से पहले शुरु हुई। वनों की व्यापारिक कटाई, इसके बाद चीड जैसे पेडों को पनपाया गया, मिट्टी और पानी का संरक्षण करने, चारा और खाना देने वाले वन लुप्त हो गये। पानी के स्रोत सूखने लगे। तीखे ढालों पर खेती होने से उपजाऊ मिट्टी बहकर चली गयी। हिमालय का प्राकृतिक सौन्दर्य लौटाने के प्रयास नहीं हुए। वन, हिमालय, गंगा का महत्व नजरअंदाज हो रहा है। प्राकृतिक विरासत की ओर ध्यान न दिये जाने का खामियाजा सम्पूर्ण मानव जाति को भुगतना पडे तो आश्चर्य नहीं।

मेरी ब्लॉग सूची

  • World wide radio-Radio Garden - *प्रिये मित्रों ,* *आज मैं आप लोगो के लिए ऐसी वेबसाईट के बारे में बताने जा रहा हूँ जिसमे आप ऑनलाइन पुरे विश्व के रेडियों को सुन सकते हैं। नीचे दिए गए ल...
    6 माह पहले
  • जीवन का सच - एक बार किसी गांव में एक महात्मा पधारे। उनसे मिलने पूरा गांव उमड़ पड़ा। गांव के हरेक व्यक्ति ने अपनी-अपनी जिज्ञासा उनके सामने रखी। एक व्यक्ति ने महात्मा से...
    6 वर्ष पहले

LATEST:


Windows Live Messenger + Facebook