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आप जो पढना चाहते हैं इस ब्लॉग में खोजें :: राजेश मिश्रा

05 अप्रैल 2012

ईस्टर / What is Easter?

ईसाइयों का सबसे बड़ा पर्व

 

Jisus

मान्यता है कि मृत्यु (गुड फ्राइडे) के तीन दिन बाद यीशु पुनर्जीवित हो गए थे और लोगों ने एक-दूसरे से इसकी प्रसन्नता बांटी थी। तब से इसे ईस्टर के रूप में मनाया जाता है। यह एक प्रकार से बुराई के विरुद्ध लड़ने के लिए अच्छाई का पुनर्जीवन था। मनुष्य में शैतान भी है और देवता भी। इसलिए मनुष्य का व्यवहार सदैव एक-सा नहीं होता। उसके मन में देवासुर सग्राम चलता ही रहता है। हमारे अपने व्यवहार के कारण ही निराशा, हताशा एव चिता हमें घेरे हुए है। यीशु ने कहा है-'तुम पृथ्वी के नमक हो। यदि नमक का स्वाद बिगड़ जाए तो वह कैसे नमकीन किया जाएगा? वह किसी काम का नहीं, केवल इसके कि बाहर फेंका जाए।'

लेकिन आज मनुष्य अपना प्रेम व आत्मीयता खोता जा रहा है। ईष्र्या, दुख, बैर, क्लेश, द्वेष, शत्रुता और दुख में डूबता जा रहा हैं। इन परिस्थितियों से बाहर निकलने के लिए प्रभु यीशु ने अपने उपदेश में कहा है कि मनुष्य मन के दीन बनें, नम्र रहें, दयावान हों, मन से शुद्ध रहें और एक-दूसरे से प्रेम रखें।

यीशु मसीह का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण संदेश है-'अपने दुश्मनों से भी प्रेम करो। अपने सताने वालों के लिए भी प्रार्थना करो।' जिन्होंने उन्हे क्रॉस पर चढ़ाया, उनके लिए यीशु मसीह ने प्रार्थना की- 'हे प्रभु, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि यह क्या कर रहे है।' चिता के बारे में यीशु मसीह कहते हैं- 'अपने प्राण के लिए चिता न करना कि हम क्या खाएंगे और क्या पिएंगे, न शरीर के लिए कि क्या पहनेंगे। क्या प्राण भोजन से और शरीर वस्त्र से बढ़कर नहीं? भारतीय चितन परंपरा में तो जीवों के प्रति भी सहिष्णुता और अहिंसा का सिद्धात हजारों वर्षों से चला आ रहा है। जिस जगह सहिष्णुता है, वहा क्षमा है। जहा क्षमा है, वहा सौहार्द है। जहा सौहार्द है, वहा सहयोग और समन्वय है। जहा समन्वय है, वहा शाति है। जहा शाति है, वहा मानव, समाज, राष्ट्र और विश्व का विकास है। आज के समय में हमें यीशु मसीह के पुनर्जीवन को याद रखना चाहिए। ईस्टर का पर्व यह अवसर देता है कि हम अपने भीतर की शक्तियों को पुनर्जीवित कर सकें। जिस प्रकार यीशु के विरुद्ध सारी शक्तियां नकाम हो गईं। वे अकेले होकर भी जीत गए, क्योंकि उनके साथ सत्य था। यीशु ने कहा-'तुम सत्य को जानो, सत्य तुम्हें स्वतत्र करेगा।' अंतिम विजय सत्य की ही होती है।

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