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01 अक्तूबर 2012

भजन-स्तुति-आरतियाँ Bhajan_Satuti_Artiyan



श्री मधुराष्टकम 


अधरं मधुरं वंदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम्‌ 

ह्रुदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌ 

वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम्‌ 

चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌ 
वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुर: पाणिर्मधुर: पादौ मधुरौ 
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌ 
गीतं मधुरं पीतं मधुरं मुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम्‌ 
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌ 
करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम्‌ 
वमितं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌ 
गुंजा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा 
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌ 
गोपि मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम्‌ 
ईष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌ 
गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा 
दलितं मधुरं फ़लितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌ 

===***=== 


शान्ताकारं भुजगशयनं विश्वाधारं गगनसद्रशं मेघव्रणं शुभांगम्‌ लक्ष्मीकांतं कमलनयनं पद्मनाभं सुरेशम्‌ 




योगिभिर्ध्यानगम्यम्‌ वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलौकेकनाथम्‌ 



===***=== 
ओम जय जगदिश हरे स्वामी जय जगदिश हरे 
भक्त जनोंके संकट (२) क्षण मे दूर करे, ओम जय... 
जो ध्यावे फल पावे, दुख वीनसे मनका ....प्रभु दुख.. (२) 
सुख संपति घर आवे (२) कष्ट मिटे तनका ओम जय... 
मात पिता तुम मेरे, शरण ग्रहु मैं किसकी....प्रभु शरण..(२) 
तुम बिन और न दूजा (२) आस करू मैं जिसकी, ओम जय... 
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यागी....प्रभु तुम (२) 
पर ब्रह्म परमेश्वर (२) तुम सबके स्वामी, ओम जय... 
तुम करूणा के सागर, तुम पालन कर्ता....प्रभु तुम.. (२) 
मैं सेवक तुम स्वामी (२) कृपा करो भर्ता, ओम जय... 
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राण पति...प्रभु सबके (२) 
किस विध मिलू दयामय (२) तुमको मैं कुमति, ओम जय... 
दिन बन्धु दुख हर्ता, तुम रक्षक मेरे....प्रभु तुम..(२) 
अपने हस्त उठाओ (२) द्वार पडा तेरे, ओम जय... 
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा....प्रभु पाप (२) 
श्रद्धा भक्ति बढाओ (२) संतनकी सेवा, ओम जय... 
ओम जय जगदिश हरे प्रभु जय जगदिश हरे 
भक्त जनोंके संकट (२) क्षण में दूर करे, ओम जय... 

===***=== 

कपूरगौरं करूणावतारं ,  

संसारसारं भुजगेन्द्रहारं 


सदावसंतं ह्र्दयार्विन्दे ,  

भवं भवानि सहितं नमामि 



===***=== 

मंगल भगवान विष्णु, मंगल गरूडध्वज, 


मंगल पूण्यकरीकाक्ष मंगलाय तनो हरी: 



===***=== 

सर्व मंगल मांगल्ये, 

शिवे सवार्थ  साधिके, 


शरण्ये त्र्यंबके गौरी,  

नारायणी नमोस्तुते (३




===***=== 

यानि कानि च पापानि,  

जन्मान्तर कृतानि च, 


तानि सर्वाणि नश्षंतु प्रदक्षिणां पदे पदे 




===***=== 


श्री कृष्ण कनैयालाल की जय,  

श्री रामचंद्र भगवान की जय, 


श्री उमापति महादेव की जय, 




===***=== 

शिव शिव शिव ओम नम: शिवाय (२)
नम: शिवाय ओम नम: शिवाय (२) 
उमापति महादेव की जय 

महादेव की आरती 


ओम जय कैलाशपति प्रभु जय कैलाशपति 
कृपा करिने अर्पो (२) सौने शुत्र मति ... ओम जय कैलाशपति 
मस्तबनी जंगल मा कायम विचरता..प्रभु कायम..(२) 
मानव दानव देवो (२) तुम चरणे करता ... ओम जय कैलाशपति 
मुकुट जटानो सुंदर, शीर गंगाधार..प्रभु शीर..(२) 
व्याघाम्बरना वस्त्रो (२) मावे सजनारा ... ओम जय कैलाशपति 
फ़णीधरना शणगार, नंदी पर स्वारी..प्रभु नंदी..(२) 
विष पचावनदारा (२) जय जय त्रिपुरारी ... ओम जय कैलाशपति 
रामभक्त भई प्रेमे कायम गान करे..प्रभु कायम...(२) 
पुनित चरणो सेवे (२) ते भवपार तरे ... ओम जय कैलाशपति 


===***=== 


श्री अंबे मातकी जय, श्री बहुचर मातकी जय, श्री खोडीयार मातकी जय, श्री गायत्री मातकी जय 

जय जय बोलो आंनदे अंबे मातनी जय (२) अंबे मातनी जय बहुचर मातनी है (२) 
जय जय बोलो आंनदे बहुचर मातनी जय (२) बहुचर मातनी जय खोडीयार मातनी जय (२) 
जय जय बोलो आंनदे खोडीयार मातनी जय (२) 
खोडीयार मातनी जय श्री अंबे मातकी जय 

माताजी की आरती 


ओम जय आद्याशक्ति मा जय आद्याशक्ति 
चरण कमळमा बेसी (२) करवी हे भक्ति...ओम जय 
सचराचरमां व्यापक तारू तेज दिशे..मां (२) 
जे कोई शरण आवे (२) अमृत रस पीसे...ओम जय 
मुख तारू ममताणु, करूणामय दृष्टी..मां 
बाळंक पर वर्षावे (२) कृपातणी वृष्टि...ओम जय 
दानवने संहारी देवोने तार्या..मां (२) 
परहीत काजे मा़ढी (२) विध विध रूप धार्या...ओम जय 
पुनित प्रेमामृतने प्रेम भक्ति पाजे..मां (२) 
रामभक्तनी द्वारे(२) दो़डिने धाजे...ओम जय आद्या 

*********==:*:=********

गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्णू गुरूर्देवो महेश्वर, 
गुरूसाक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नम: 

त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव 
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्व मम: देव देव 

कायन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा, बुद्धात्माना वा प्रकृतेर्स्वभावात 
करोनी यज्ञं सकलं परस्मै, नारायणायेति समर्पयामि. 

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामय: सर्वे भद्राणि पष्यन्तु मा कश्र्यिद दुख भागभवेत 

ओम घौ: शान्ति अंतरिक्ष: शान्ति पृथ्वी, शान्ति राप:, शान्ति ओषधय: शान्ति वनस्पतय:, 
शान्ति विश्वेदेवा, शान्ति ब्रह्म, शान्ति सर्व (गुं) शान्ति शान्ति रेव, शान्ति सामा 
शान्ति रेघि, ओम शान्ति शान्ति सुशान्ति: भवतु 

श्री कृष्णकनैया लालकी जय, श्री रामचन्द्र भगवान की जय, श्री अंबे मातकी जय 
श्री उमापति महादेवकी जय, श्री गजानन गणपती महाराज की जय, पवनसुत हनुमानकी जय 
सब संतनकी जय अपना अपना गुरूदेवकी जय, सत्य सनातन धर्म की जय 
ओम नम: पार्वति पतये हर हर महादेव हर 

=====****====== 

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथोंमें (२) 
है जीत तुम्हारे हाथोंमें, और हार तुम्हारे हाथों में (२) 
मेरा निश्चय बस एक यही, इक बार तुम्हे पा जाऊ मैं (२) 
अर्पण करदु दुनियां भर का, सब प्यार तुम्हारे हाथों मैं (२) 
जो जग में रहु तो ऎसे रहु, जो जल में कमल का फ़ूल रहे (२) 
मेरे सब गुण दोष समर्पित हो, करतार तुम्हारे हाथों में भगवान (२) 
यदि मानव का मुझे जन्म मिले, तो तव चरणॊं का पुजारी बनु (२) 
इस पुजक की एक दूक रग का, हो तार तुम्हारे हाथों में (२) 
जब जब संसार का कैदी बनु, निष्काम भावसे कर्म करू (२) 
फ़िर अन्त समय में प्राण तजु, निराकार तुम्हारे हाथों में साकार (२) 
मुझमें तुझमें बस भेद यही, मैं नर हु तुम नारायण हो (२) 
मैं हु संसार के हाथों में, संसार तुम्हारे हाथों में (२) 
अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में (२) 

श्री जगद्‍गुरू शंकराचार्य महाराजकी जय श्री रामचन्द्र भगवानकी जय, पवनसुत हनुमानकी जय 

=====****====== 

श्री रामचन्द्र कृपालु भज मन हरण भवभय दारूणम्‌ 
नवकंज लोचन कंजमुख करकंज पदकंजारूण्म्‌ 
कंदर्प अगणित अमित छबि नवनीत नीरद सुन्दरम्‌ 
पटपीत मानहु तड़ित रूचि शुचि नौमि जनक सुतावरम्‌... श्री रामचन्द्र शिर मुकुट कुंडल तिलक चारू उदार अंग विभूषणम्‌ 
आजानुभुज शर चाप घर संग्रामजित स्वरदूषणम्‌....श्री रामचन्द्र 
मज दीन बन्धु दिनेश दानव दलन दुष्ट निकन्दनम्‌ 
रघुनंद आनंद कंद चंद दशरथ नंदनम्‌... श्री रामचन्द्र 
इति वदीत तुलसीदास शंकर शेष मुनि मनरंजनम्‌ 
मम ह्र्दयकुंज निवास कुरू कामादि खलदल गंजनम्‌...श्री रामचन्द्र 

श्री सियावर रामचन्द्र भगवान की जय, श्री कृष्ण कनैया लाल की जय 

हरि ओम हरि ओम हरी ओम हरि ओम ततसत्‌ हरि ओम शान्ति शान्ति शान्ति 

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श्री गणेशाय नम: 
गजानन रे गजानन रे, हो गणपति देवा 
गणपति देवा करू तमारी सेवा... गजानन रे... 
माता जेना पार्वति ने पिता महादेवा... गजानन रे... 
फूल चढे सिन्दूर चढे और चढे मेवा... गजानन रे... 
पार्वतिजी पुजा करे, शेष करे सेवा... गजानन रे... 
प्रथम पहेला पूजा तारी मनवांछित फल लेवा... गजानन रे... 
रिद्धि सिद्धि चम्मर ढोले, नाम दुंदालो लेवा... गजानन रे... 
भक़्तो तमने नमन करे छे, अविचल भक्ति लेवा... गजानन रे... 
श्री गजानन गणपति महाराज की जय 

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थाण 

प्रेमे परोणां आवो कनैया हो नंदलाला, शा माटे शरमावो कनैया हो नंदलाला 
भात भात ना भोजन बनावु (२) कहो तो कोणिया भरावु ...कनैया ...प्रेमे 
जण जमनानी भ्पारी भरी लावु (२) कहो तो आचमन करावु...कनैया ..प्रेमे 
प्रेमे पदारथ पान बनावु (२) लवींग एलची धरावु...कनैया ..प्रेमे 
भाव थकी प्रभु था़ड धरावु (२) तुलसी दण मधरावु ...कनैया ..प्रेमे 

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राधा कृष्णजी आरती 

जय का'ना काळा, प्रभु जय का'ना काळा 
मीठी मोरली वाळा (२) गोपिना प्यारा...ओम जय का'ना काळा. 
कामणगारा का'न कामण कई कीधां प्रभु कामण (२) 
माखण चोरी मोहन (२) चित्त चोरी लीधां ...ओम जय का'ना काळा. 
नंद यशोदा घेर वैकुंन्ठ उतारी, प्रभु वैकुंन्ठ...(२) 
कलिया मर्दन कीधुं (२) गायोने चारी ...ओम जय का'ना काळा. 
गुणतणो तुजपार केमे नहि आवे, प्रभु केमे...(२) 
नेति वेद पोकारे (२) पुनित शुं गावे ...ओम जय का'ना काळा. 

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे 
हे नाथ नारायण वासुदेव 
जुहते पिवस्वामृतमेतदेव 
गोविंद दामोदर माधवेति 

अच्युतं केशवं श्री रामनारायणम्‌ 
श्री कृष्ण दामोदरं वासुदेवं हरिम्‌ 
श्रीधरं माधवं गोपिका वल्लभम्‌ 
श्री जानकी नायकं श्री रामचंद्र भजे 

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Rajesh Mishra, Kolkata, West Bengal
(Old Add. Vill+Post:Bheldi,
Dist.-Chhapra (saran), Bihar

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