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25 जुलाई 2012

जन्माष्टमी । Janmashtami 2012


Janmashtami 2012 | Krishna Janmashtami | Janmashtami Festival
9 अगस्त 2012 को स्मार्तों का व्रत है और 10 अगस्त 2012 को वैष्णव संप्रदाय के लोगों द्वारा मनाया जाएगा


भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव का यह उत्सव हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है. जन्माष्टमी भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीयों द्वारा पूर्ण आस्था एवं श्रद्ध के साथ मनाया जाता है. भगवान विष्णु के अवतार रूप में श्रीकृष्ण जी का अवतरण भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में देवकी व श्रीवसुदेव के पुत्ररूप में हुआ था. स्मार्त और वैष्णव संप्रदाय के लोग भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अलग-अलग ढंग से मनाते हैं. श्रीमद्भागवत को प्रमाण मानकर स्मार्त संप्रदाय के मानने वाले चंद्रोदय व्यापनी अष्टमी अर्थात रोहिणी नक्षत्र में जन्माष्टमी मनाते हैं व इसी प्रकार वैष्णव मानने वाले उदयकाल व्यापनी अष्टमी एवं उदयकाल रोहिणी नक्षत्र को जन्माष्टमी का पर्व मनाते हैं. इस वर्ष जन्माष्टमी का त्यौहार 9 अगस्त 2012 को स्मार्तों का व्रत है और 10 अगस्त 2012 को वैष्णव संप्रदाय के लोगों द्वारा मनाया जाएगा. 

मथुरा में जन्माष्टमी | Janmashtami in Mathura

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर कृष्ण की जन्म स्थली मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है. जन्माष्टमी के शुभ अवसर समय भगवा कृष्ण के दर्शनों के लिएए दूर दूर से श्रद्धालु मथुरा पहुंचते हैं. श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मथुरा कृष्णमय हो जाता है.  मंदिरों को खास तौर पर सजाया जाता है श्रीकृष्ण की जन्मस्थली रोशनी से सजी होती है मथुरा के सभी मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों व फूलों से सजाया जाता है. मथुरा में जन्माष्टमी पर आयोजित होने वाले श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को देखने के लिए देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से लाखों की संख्या में कृष्ण भक्त पंहुचते हैं  भगवान के श्रीविग्रहपर हल्दी, दही, घी, तेल, गुलाबजल, मक्खन, केसर, कपूर आदि चढाकर ब्रजवासीउसका परस्पर लेपन और छिडकाव करते हैं. इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती है और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है और रासलीला का आयोजन किया जाता है. 

जन्माष्टमी पूजा विधि | Janmashtami Pooja Procedure

श्री कृष्ण जी की पूजा आराधना का यह पावन पर्व सभी को कृष्ण भक्ति से परिपूर्ण कर देता है. इस दिन व्रत-उपवास करने का विधान है. यह व्रत सनातन-धर्मावलंबियों के लिए अनिवार्य माना जाता है. इस दिन उपवास रखें जाते हैं तथा कृष्ण भक्ति के गीतों का श्रवण किया जाता है. घर के पूजागृह तथा मंदिरों में श्रीकृष्ण-लीला की झांकियां सजाई जाती हैं. भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति अथवा शालिग्राम का दूध, दही, शहद, यमुना जल आदि से अभिषेक किया जाता है तथा भगवान श्री कृष्ण जी का षोडशोपचार विधि से पूजन किया जाता है. भगवान का श्रृंगार करके उन्हें झूला झुलाया जाता है. श्रद्धालु भक्त मध्यरात्रि तक पूर्ण उपवास रखते हैं. जन्माष्टमी की रात्रि में जागरण, कीर्तन किए जाते हैं व अर्धरात्रि के समय शंख तथा घंटों के नाद से श्रीकृष्ण-जन्मोत्सव को संपन्न किया जाता है.

छप्पन भोग | Chhappan Bhog 

जन्माष्टमी के दिन कई स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाए जाते हैं. इस दिन दूध और दूध से बने व्यंजनों का सेवन किया जाता है. भगवान कृष्ण को दूध और मक्खन अति प्रिय था. अत: जन्माष्टमी के दिन खीर और पेडे़, माखन, मिस्री जैसे मीठे व्यंजन बनाए और खाए जाते हैं. जन्माष्टमी का व्रत, मध्य रात्रि को श्रीकृष्ण भगवान के जन्म के पश्चात भगवान के प्रसाद को ग्रहण करने के साथ ही पूर्ण होता है. 

मोहरात्रि | Mohratri

श्रीकृष्ण-जन्माष्टमी की रात्रि को मोहरात्रि भी कहा गया है. इस रात में योगेश्वर श्रीकृष्ण का ध्यान, नाम अथवा मंत्र जपते हुए जगने से संसार की मोह-माया से मुक्ति प्राप्त होती है. जन्माष्टमी का व्रत करने से  पुण्य की प्राप्ति होती है. 
श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव सम्पूर्ण विश्व को आनंद-मंगल का संदेश देता है. 

दही-हांडी समारोह | Dahi - Handi Function

जन्‍माष्‍टमी के अवसर पर मन्दिरों व घरों को सुन्‍दर ढंग से सजाया जाता है. इस त्‍यौहार को कृष्‍णाष्‍टमी अथवा गोकुलाष्‍टमी के नाम से भी जाना जाता है. इस त्‍यौहार के दौरान भजन किर्तन गाए जाते हैं व नृत्‍य एवं रास लीलाओं का आयोजन किया जाता है. इसके साथ ही साथ दही-हांडी जैसे आयोजन भी होते हैं. जिसमें एक मिट्टी के घडे़ में दही, मक्खन इत्यादि रख दिए जाते हैं तथा इस मटकी को काफी ऊँचाई पर लटका दिया जाता है जिसे फोडाना होता है. इसे दही हांडी आयोजन कहते हैं और जो भी इस मटकी को तोड़कर उसमें रखी सामग्री को प्राप्त कर लेता है. उसे ईनाम दिया जाता है. महाराष्‍ट्र में जन्‍माष्‍टमी के दौरान मटकी फोड़ने का आयोजन होता है. महाराष्ट्र में चारों ओर इस तरह के अनेक आयोजन एवं प्रतियोगिताओं का देखा जा सकता है.

जन्माष्टमी महत्व | Importance Of Janmashtami

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥7॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥8॥ 
गीता की इस अवधारण द्वारा भगवान श्री कृष्ण गीता में कहते हैं कि जब जब धर्म का नाश होता है तब तब मैं स्वयं इस पृथ्वी पर अवतार लेता हूँ और अधर्म का नाश करके धर्म कि स्थापना करता हूँ. अत: जब असुर एवं राक्षसी प्रवृतियों द्वारा पाप का आतंक व्याप्त होता है तब-तब भगवान विष्णु किसी न किसी रूप में अवतरित होकर इन पापों का शमन करते हैं. भगवान विष्णु इन समस्त अवतारों में से एक महत्वपूर्ण अवतार श्रीकृष्ण का रहा. भगवान स्वयं जिस दिन पृथ्व��� पर अवतरित हुए थे उस पवित्र तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं.

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