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01 अक्तूबर 2012

नवरात्री-नवदुर्गा : नौ रूपों का पूजन



नवरात्रि का त्योहार नौ दिनों तक चलता है। इन नौ दिनों में तीन देवियों पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरुपों की पूजा की जाती है। पहले तीन दिन पार्वती के तीन स्वरुपों (कुमार, पार्वती और काली), अगले तीन दिन लक्ष्मी माता के स्वरुपों और आखिरी के तीन दिन सरस्वती माता के स्वरुपों की पूजा करते हैं।
वासन्तिक नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति माता दुर्गा के उन नौ रूपों का भी पूजन किया जाता है। माता के इन नौ रूपों को नवदुर्गा के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि के इन्हीं नौ दिनों पर मां दुर्गा के जिन नौ रूपों का पूजन किया जाता है वे हैं – पहला शैलपुत्री, दूसरा ब्रह्माचारिणी, तीसरा चन्द्रघन्टा, चौथा कूष्माण्डा, पाँचवा स्कन्द माता, छठा कात्यायिनी, सातवाँ कालरात्रि, आठवाँ महागौरी, नौवां सिद्धिदात्री।

प्रथम दुर्गा : श्री शैलपुत्री

नवरात्री प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा  विधि

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्द्वकृत शेखराम।
वृषारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम॥
श्री दुर्गा का प्रथम रूप श्री शैलपुत्री हैं। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण ये शैलपुत्री कहलाती हैं। नवरात्र के प्रथम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। गिरिराज हिमालय की पुत्री होने के कारण भगवती का प्रथम स्वरूप शैलपुत्री का है, जिनकी आराधना से प्राणी सभी मनोवांछित फल प्राप्त कर लेता है।

द्वितीय दुर्गा : श्री ब्रह्मचारिणी

नवरात्री दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा  विधि

“दधना कर पद्याभ्यांक्षमाला कमण्डलम।
देवी प्रसीदमयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥“
श्री दुर्गा का द्वितीय रूप श्री ब्रह्मचारिणी हैं। यहां ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य तपश्चारिणी है। इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप से प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। अतः ये तपश्चारिणी और ब्रह्मचारिणी के नाम से विख्यात हैं। नवरात्रि के द्वितीय दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है।
जो दोनो कर-कमलो मे अक्षमाला एवं कमंडल धारण करती है। वे सर्वश्रेष्ठ माँ भगवती ब्रह्मचारिणी मुझसे पर अति प्रसन्न हों। माँ ब्रह्मचारिणी सदैव अपने भक्तो पर कृपादृष्टि रखती है एवं सम्पूर्ण कष्ट दूर करके अभीष्ट कामनाओ की पूर्ति करती है।

तृतीय दुर्गा : श्री चंद्रघंटा

नवरात्री तीसरा दिन माता चंद्रघंटा की पूजा  विधि

“पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैयुता।
प्रसादं तनुते मद्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥“
श्री दुर्गा का तृतीय रूप श्री चंद्रघंटा है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। नवरात्रि के तृतीय दिन इनका पूजन और अर्चना किया जाता है। इनके पूजन से साधक को मणिपुर चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं तथा सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।
इनकी आराधना से मनुष्य के हृदय से अहंकार का नाश होता है तथा वह असीम शांति की प्राप्ति कर प्रसन्न होता है। माँ चन्द्रघण्टा मंगलदायनी है तथा भक्तों को निरोग रखकर उन्हें वैभव तथा ऐश्वर्य प्रदान करती है। उनके घंटो मे अपूर्व शीतलता का वास है।

चतुर्थ दुर्गा : श्री कूष्मांडा

नवरात्री चौथे दिन माता कूष्माण्डा की पूजा  विधि

”सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।
दधानाहस्तपद्याभ्यां कुष्माण्डा शुभदास्तु में॥“
श्री दुर्गा का चतुर्थ रूप श्री कूष्मांडा हैं। अपने उदर से अंड अर्थात् ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से पुकारा जाता है। नवरात्रि के चतुर्थ दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। श्री कूष्मांडा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं।
इनकी आराधना से मनुष्य त्रिविध ताप से मुक्त होता है। माँ कुष्माण्डा सदैव अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि रखती है। इनकी पूजा आराधना से हृदय को शांति एवं लक्ष्मी की प्राप्ति होती हैं।

पंचम दुर्गा : श्री स्कंदमाता

नवरात्री पंचमी दिन स्कंदमाता की पूजा  विधि

“सिंहासनगता नित्यं पद्याञ्चितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥“
श्री दुर्गा का पंचम रूप श्री स्कंदमाता हैं। श्री स्कंद (कुमार कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। नवरात्रि के पंचम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। इनकी आराधना से विशुद्ध चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं।
इनकी आराधना से मनुष्य सुख-शांति की प्राप्ति करता है। सिह के आसन पर विराजमान तथा कमल के पुष्प से सुशोभित दो हाथो वाली यशस्विनी देवी स्कन्दमाता शुभदायिनी है।

षष्ठम दुर्गा : श्री कात्यायनी

 

नवरात्री पूजा - छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा  विधि

“चन्द्रहासोज्जवलकरा शार्दूलावरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्यादेवी दानव घातिनी॥“
श्री दुर्गा का षष्ठम् रूप श्री कात्यायनी। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं। नवरात्रि के षष्ठम दिन इनकी पूजा और आराधना होती है।
इनकी आराधना से भक्त का हर काम सरल एवं सुगम होता है। चन्द्रहास नामक तलवार के प्रभाव से जिनका हाथ चमक रहा है, श्रेष्ठ सिंह जिसका वाहन है, ऐसी असुर संहारकारिणी देवी कात्यायनी कल्यान करें।

सप्तम दुर्गा : श्री कालरात्रि

नवरात्री पूजा - सप्तमी दिन माता कालरात्रि की पूजा  विधि

“एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।
वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥“
श्रीदुर्गा का सप्तम रूप श्री कालरात्रि हैं। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। नवरात्रि के सप्तम दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) में स्थिर कर साधना करनी चाहिए।
संसार में कालो का नाश करने वाली देवी ‘कालरात्री’ ही है। भक्तों द्वारा इनकी पूजा के उपरांत उसके सभी दु:ख, संताप भगवती हर लेती है। दुश्मनों का नाश करती है तथा मनोवांछित फल प्रदान कर उपासक को संतुष्ट करती हैं।

अष्टम दुर्गा : श्री महागौरी

नवरात्री की अष्टमी दिन माता महागौरी की पूजा विधि

“श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बर धरा शुचि:।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥“
श्री दुर्गा का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं। इनका वर्ण पूर्णतः गौर है, इसलिए ये महागौरी कहलाती हैं। नवरात्रि के अष्टम दिन इनका पूजन किया जाता है। इनकी उपासना से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
माँ महागौरी की आराधना से किसी प्रकार के रूप और मनोवांछित फल प्राप्त किया जा सकता है। उजले वस्त्र धारण किये हुए महादेव को आनंद देवे वाली शुद्धता मूर्ती देवी महागौरी मंगलदायिनी हों।

नवम् दुर्गा : श्री सिद्धिदात्री

नवरात्री पूजा की नवमी दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा विधि

“सिद्धगंधर्वयक्षादौर सुरैरमरै रवि।
सेव्यमाना सदाभूयात सिद्धिदा सिद्धिदायनी॥“
श्री दुर्गा का नवम् रूप श्री सिद्धिदात्री हैं। ये सब प्रकार की सिद्धियों की दाता हैं, इसीलिए ये सिद्धिदात्री कहलाती हैं। नवरात्रि के नवम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है।
सिद्धिदात्री की कृपा से मनुष्य सभी प्रकार की सिद्धिया प्राप्त कर मोक्ष पाने मे सफल होता है। मार्कण्डेयपुराण में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्वये आठ सिद्धियाँ बतलायी गयी है। भगवती सिद्धिदात्री उपरोक्त संपूर्ण सिद्धियाँ अपने उपासको को प्रदान करती है। माँ दुर्गा के इस अंतिम स्वरूप की आराधना के साथ ही नवरात्र के अनुष्ठान का समापन हो जाता है।
इस दिन को रामनवमी भी कहा जाता है और शारदीय नवरात्रि के अगले दिन अर्थात दसवें दिन को रावण पर राम की विजय के रूप में मनाया जाता है। दशम् तिथि को बुराई पर अच्छाकई की विजय का प्रतीक माना जाने वाला त्योतहार विजया दशमी यानि दशहरा मनाया जाता है। इस दिन रावण, कुम्भकरण और मेघनाथ के पुतले जलाये जाते हैं। 

Rajesh Mishra
('
Jagkalyan' News Editor)Kolkata, West Bengal



श्री गणेश स्तुती : Shri Ganesh Stuti

श्री गणेश स्तुती – श्री गणेश मन्त्र 
 Sri Ganesha Mantra Stuti


वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजंबूफलचारुभक्षणम्‌ ।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्‌ ॥
सुमुखश्चैकदंतश्च कपिलो गजकर्णकः ।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो गणाधिपः ।
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः ।
द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि ।
विद्यारंभे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा ।
संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते ॥
शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥
मूषिकवाहन् मोदकहस्त चामरकर्ण विलम्बित सूत्र ।
वामनरूप महेश्वरपुत्र विघ्नविनायक पाद नमस्ते ॥
Sri Ganesha Mantra with Meaning
वक्रतुंड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

“Oh! Lord (Ganesha), of huge body and curved elephant trunk, whose brilliance is equal to billions of suns, always remove all obstacles from my endeavors.”
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजंबूफलचारुभक्षणम्‌ ।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्‌ ॥

“Salutations to Lord Ganesha who has an elephant head, who is attended by the band of his followers, who eats his favorite wood-apple and rose-apple fruits, who is the son of Goddess Uma, who is the cause of destruction of all sorrow. And I salute to his feet which are like lotus.”
सुमुखश्चैकदंतश्च कपिलो गजकर्णकः ।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो गणाधिपः ।
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः ।
द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि ।
विद्यारंभे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा ।
संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते ॥

Sumukha, Ekadanta, Kapila, Gajakarnaka, Lambodara, Vikata, Vighnanaasha, Ganaadhipa, Dhuumraketu, Ganaadhyaksha, Bhaalachandra, Gajaanana –

No obstacles will come in the way of one who reads or listens to these 12 names of Lord Ganeshaat the beginning of education, at the time of marriage, while entering or exiting anything, during a battle or calamity.
शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥

“In order to remove all obstacles, one should meditate on (the Lord Ganesha) as wearing a white garment, as having the complexion like the moon, and having four arms and a pleasantcountenance.”
मूषिकवाहन् मोदकहस्त चामरकर्ण विलम्बित सूत्र ।
वामनरूप महेश्वरपुत्र विघ्नविनायक पाद नमस्ते ॥

“Oh God who has the mouse as his vehicle, and the sweet modhaka (rice ball) in your hand, whose ears are wide like fans, wearing the sacred thread. Oh son of Lord Shiva who is of short stature and who removes all obstacles, Lord Vinayaka, I bow at your feet.”

भजन-स्तुति-आरतियाँ Bhajan_Satuti_Artiyan



श्री मधुराष्टकम 


अधरं मधुरं वंदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम्‌ 

ह्रुदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌ 

वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम्‌ 

चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌ 
वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुर: पाणिर्मधुर: पादौ मधुरौ 
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌ 
गीतं मधुरं पीतं मधुरं मुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम्‌ 
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌ 
करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम्‌ 
वमितं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌ 
गुंजा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा 
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌ 
गोपि मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम्‌ 
ईष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌ 
गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा 
दलितं मधुरं फ़लितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌ 

===***=== 


शान्ताकारं भुजगशयनं विश्वाधारं गगनसद्रशं मेघव्रणं शुभांगम्‌ लक्ष्मीकांतं कमलनयनं पद्मनाभं सुरेशम्‌ 




योगिभिर्ध्यानगम्यम्‌ वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलौकेकनाथम्‌ 



===***=== 
ओम जय जगदिश हरे स्वामी जय जगदिश हरे 
भक्त जनोंके संकट (२) क्षण मे दूर करे, ओम जय... 
जो ध्यावे फल पावे, दुख वीनसे मनका ....प्रभु दुख.. (२) 
सुख संपति घर आवे (२) कष्ट मिटे तनका ओम जय... 
मात पिता तुम मेरे, शरण ग्रहु मैं किसकी....प्रभु शरण..(२) 
तुम बिन और न दूजा (२) आस करू मैं जिसकी, ओम जय... 
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यागी....प्रभु तुम (२) 
पर ब्रह्म परमेश्वर (२) तुम सबके स्वामी, ओम जय... 
तुम करूणा के सागर, तुम पालन कर्ता....प्रभु तुम.. (२) 
मैं सेवक तुम स्वामी (२) कृपा करो भर्ता, ओम जय... 
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राण पति...प्रभु सबके (२) 
किस विध मिलू दयामय (२) तुमको मैं कुमति, ओम जय... 
दिन बन्धु दुख हर्ता, तुम रक्षक मेरे....प्रभु तुम..(२) 
अपने हस्त उठाओ (२) द्वार पडा तेरे, ओम जय... 
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा....प्रभु पाप (२) 
श्रद्धा भक्ति बढाओ (२) संतनकी सेवा, ओम जय... 
ओम जय जगदिश हरे प्रभु जय जगदिश हरे 
भक्त जनोंके संकट (२) क्षण में दूर करे, ओम जय... 

===***=== 

कपूरगौरं करूणावतारं ,  

संसारसारं भुजगेन्द्रहारं 


सदावसंतं ह्र्दयार्विन्दे ,  

भवं भवानि सहितं नमामि 



===***=== 

मंगल भगवान विष्णु, मंगल गरूडध्वज, 


मंगल पूण्यकरीकाक्ष मंगलाय तनो हरी: 



===***=== 

सर्व मंगल मांगल्ये, 

शिवे सवार्थ  साधिके, 


शरण्ये त्र्यंबके गौरी,  

नारायणी नमोस्तुते (३




===***=== 

यानि कानि च पापानि,  

जन्मान्तर कृतानि च, 


तानि सर्वाणि नश्षंतु प्रदक्षिणां पदे पदे 




===***=== 


श्री कृष्ण कनैयालाल की जय,  

श्री रामचंद्र भगवान की जय, 


श्री उमापति महादेव की जय, 




===***=== 

शिव शिव शिव ओम नम: शिवाय (२)
नम: शिवाय ओम नम: शिवाय (२) 
उमापति महादेव की जय 

महादेव की आरती 


ओम जय कैलाशपति प्रभु जय कैलाशपति 
कृपा करिने अर्पो (२) सौने शुत्र मति ... ओम जय कैलाशपति 
मस्तबनी जंगल मा कायम विचरता..प्रभु कायम..(२) 
मानव दानव देवो (२) तुम चरणे करता ... ओम जय कैलाशपति 
मुकुट जटानो सुंदर, शीर गंगाधार..प्रभु शीर..(२) 
व्याघाम्बरना वस्त्रो (२) मावे सजनारा ... ओम जय कैलाशपति 
फ़णीधरना शणगार, नंदी पर स्वारी..प्रभु नंदी..(२) 
विष पचावनदारा (२) जय जय त्रिपुरारी ... ओम जय कैलाशपति 
रामभक्त भई प्रेमे कायम गान करे..प्रभु कायम...(२) 
पुनित चरणो सेवे (२) ते भवपार तरे ... ओम जय कैलाशपति 


===***=== 


श्री अंबे मातकी जय, श्री बहुचर मातकी जय, श्री खोडीयार मातकी जय, श्री गायत्री मातकी जय 

जय जय बोलो आंनदे अंबे मातनी जय (२) अंबे मातनी जय बहुचर मातनी है (२) 
जय जय बोलो आंनदे बहुचर मातनी जय (२) बहुचर मातनी जय खोडीयार मातनी जय (२) 
जय जय बोलो आंनदे खोडीयार मातनी जय (२) 
खोडीयार मातनी जय श्री अंबे मातकी जय 

माताजी की आरती 


ओम जय आद्याशक्ति मा जय आद्याशक्ति 
चरण कमळमा बेसी (२) करवी हे भक्ति...ओम जय 
सचराचरमां व्यापक तारू तेज दिशे..मां (२) 
जे कोई शरण आवे (२) अमृत रस पीसे...ओम जय 
मुख तारू ममताणु, करूणामय दृष्टी..मां 
बाळंक पर वर्षावे (२) कृपातणी वृष्टि...ओम जय 
दानवने संहारी देवोने तार्या..मां (२) 
परहीत काजे मा़ढी (२) विध विध रूप धार्या...ओम जय 
पुनित प्रेमामृतने प्रेम भक्ति पाजे..मां (२) 
रामभक्तनी द्वारे(२) दो़डिने धाजे...ओम जय आद्या 

*********==:*:=********

गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्णू गुरूर्देवो महेश्वर, 
गुरूसाक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नम: 

त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव 
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्व मम: देव देव 

कायन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा, बुद्धात्माना वा प्रकृतेर्स्वभावात 
करोनी यज्ञं सकलं परस्मै, नारायणायेति समर्पयामि. 

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामय: सर्वे भद्राणि पष्यन्तु मा कश्र्यिद दुख भागभवेत 

ओम घौ: शान्ति अंतरिक्ष: शान्ति पृथ्वी, शान्ति राप:, शान्ति ओषधय: शान्ति वनस्पतय:, 
शान्ति विश्वेदेवा, शान्ति ब्रह्म, शान्ति सर्व (गुं) शान्ति शान्ति रेव, शान्ति सामा 
शान्ति रेघि, ओम शान्ति शान्ति सुशान्ति: भवतु 

श्री कृष्णकनैया लालकी जय, श्री रामचन्द्र भगवान की जय, श्री अंबे मातकी जय 
श्री उमापति महादेवकी जय, श्री गजानन गणपती महाराज की जय, पवनसुत हनुमानकी जय 
सब संतनकी जय अपना अपना गुरूदेवकी जय, सत्य सनातन धर्म की जय 
ओम नम: पार्वति पतये हर हर महादेव हर 

=====****====== 

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथोंमें (२) 
है जीत तुम्हारे हाथोंमें, और हार तुम्हारे हाथों में (२) 
मेरा निश्चय बस एक यही, इक बार तुम्हे पा जाऊ मैं (२) 
अर्पण करदु दुनियां भर का, सब प्यार तुम्हारे हाथों मैं (२) 
जो जग में रहु तो ऎसे रहु, जो जल में कमल का फ़ूल रहे (२) 
मेरे सब गुण दोष समर्पित हो, करतार तुम्हारे हाथों में भगवान (२) 
यदि मानव का मुझे जन्म मिले, तो तव चरणॊं का पुजारी बनु (२) 
इस पुजक की एक दूक रग का, हो तार तुम्हारे हाथों में (२) 
जब जब संसार का कैदी बनु, निष्काम भावसे कर्म करू (२) 
फ़िर अन्त समय में प्राण तजु, निराकार तुम्हारे हाथों में साकार (२) 
मुझमें तुझमें बस भेद यही, मैं नर हु तुम नारायण हो (२) 
मैं हु संसार के हाथों में, संसार तुम्हारे हाथों में (२) 
अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में (२) 

श्री जगद्‍गुरू शंकराचार्य महाराजकी जय श्री रामचन्द्र भगवानकी जय, पवनसुत हनुमानकी जय 

=====****====== 

श्री रामचन्द्र कृपालु भज मन हरण भवभय दारूणम्‌ 
नवकंज लोचन कंजमुख करकंज पदकंजारूण्म्‌ 
कंदर्प अगणित अमित छबि नवनीत नीरद सुन्दरम्‌ 
पटपीत मानहु तड़ित रूचि शुचि नौमि जनक सुतावरम्‌... श्री रामचन्द्र शिर मुकुट कुंडल तिलक चारू उदार अंग विभूषणम्‌ 
आजानुभुज शर चाप घर संग्रामजित स्वरदूषणम्‌....श्री रामचन्द्र 
मज दीन बन्धु दिनेश दानव दलन दुष्ट निकन्दनम्‌ 
रघुनंद आनंद कंद चंद दशरथ नंदनम्‌... श्री रामचन्द्र 
इति वदीत तुलसीदास शंकर शेष मुनि मनरंजनम्‌ 
मम ह्र्दयकुंज निवास कुरू कामादि खलदल गंजनम्‌...श्री रामचन्द्र 

श्री सियावर रामचन्द्र भगवान की जय, श्री कृष्ण कनैया लाल की जय 

हरि ओम हरि ओम हरी ओम हरि ओम ततसत्‌ हरि ओम शान्ति शान्ति शान्ति 

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श्री गणेशाय नम: 
गजानन रे गजानन रे, हो गणपति देवा 
गणपति देवा करू तमारी सेवा... गजानन रे... 
माता जेना पार्वति ने पिता महादेवा... गजानन रे... 
फूल चढे सिन्दूर चढे और चढे मेवा... गजानन रे... 
पार्वतिजी पुजा करे, शेष करे सेवा... गजानन रे... 
प्रथम पहेला पूजा तारी मनवांछित फल लेवा... गजानन रे... 
रिद्धि सिद्धि चम्मर ढोले, नाम दुंदालो लेवा... गजानन रे... 
भक़्तो तमने नमन करे छे, अविचल भक्ति लेवा... गजानन रे... 
श्री गजानन गणपति महाराज की जय 

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थाण 

प्रेमे परोणां आवो कनैया हो नंदलाला, शा माटे शरमावो कनैया हो नंदलाला 
भात भात ना भोजन बनावु (२) कहो तो कोणिया भरावु ...कनैया ...प्रेमे 
जण जमनानी भ्पारी भरी लावु (२) कहो तो आचमन करावु...कनैया ..प्रेमे 
प्रेमे पदारथ पान बनावु (२) लवींग एलची धरावु...कनैया ..प्रेमे 
भाव थकी प्रभु था़ड धरावु (२) तुलसी दण मधरावु ...कनैया ..प्रेमे 

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राधा कृष्णजी आरती 

जय का'ना काळा, प्रभु जय का'ना काळा 
मीठी मोरली वाळा (२) गोपिना प्यारा...ओम जय का'ना काळा. 
कामणगारा का'न कामण कई कीधां प्रभु कामण (२) 
माखण चोरी मोहन (२) चित्त चोरी लीधां ...ओम जय का'ना काळा. 
नंद यशोदा घेर वैकुंन्ठ उतारी, प्रभु वैकुंन्ठ...(२) 
कलिया मर्दन कीधुं (२) गायोने चारी ...ओम जय का'ना काळा. 
गुणतणो तुजपार केमे नहि आवे, प्रभु केमे...(२) 
नेति वेद पोकारे (२) पुनित शुं गावे ...ओम जय का'ना काळा. 

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे 
हे नाथ नारायण वासुदेव 
जुहते पिवस्वामृतमेतदेव 
गोविंद दामोदर माधवेति 

अच्युतं केशवं श्री रामनारायणम्‌ 
श्री कृष्ण दामोदरं वासुदेवं हरिम्‌ 
श्रीधरं माधवं गोपिका वल्लभम्‌ 
श्री जानकी नायकं श्री रामचंद्र भजे 

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Rajesh Mishra, Kolkata, West Bengal
(Old Add. Vill+Post:Bheldi,
Dist.-Chhapra (saran), Bihar

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