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27 अक्तूबर 2012

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दीवाली पूजा कैसे करे


दीवाली पूजा कैसे करे
How to Perform Deepavali Puja

deepavali_puja1दीवाली के दिन की विशेषता लक्ष्मी जी के पूजन से संबन्धित है. इस दिन हर घर, परिवार, कार्यालय में लक्ष्मी जी के पूजन के रुप में उनका स्वागत किया जाता है. दीवाली के दिन जहां गृहस्थ और वाणिज्य वर्ग के लोग धन की देवी लक्ष्मी से समृद्धि और वित्तकोष की कामना करते हैं, वहीं साधु-संत और तांत्रिक कुछ विशेष सिद्धियां अर्जित करने के लिए रात्रिकाल में अपने तांत्रिक कर्म करते हैं. 26 अक्तूबर 2012 के दिन दिवाली पूजन किया जायेगा.

पूजा की सामग्री
Materials Required for Puja


लक्ष्मी व श्री गणेश की मूर्तियां (बैठी हुई मुद्रा में). केशर, रोली, चावल, पान, सुपारी, फल, फूल, दूध, खील, बताशे, सिंदूर, शहद, सिक्के, लौंग. सूखे, मेवे, मिठाई, दही, गंगाजल, धूप, अगरबत्ती,11 दीपक. रूई तथा कलावा नारियल और तांबे का कलश चाहिए.

कैसे करें दीपावली पूजन की तैयारी
How to Do Deepavali Puja


एक थाल में या भूमि को शुद्ध करके नवग्रह बनायें या नवग्रह यंत्र की स्थापना करें. इसके साथ ही एक ताम्बें का कलश बनाएं, जिसमें गंगाजल, दूध, दही, शहद, सुपारी, सिक्के और लौंग आदि डालकर उसे लाल कपडे से ढक कर एक कच्चा नारियल कलावे से बांध कर रख दें.

जहां पर नवग्रह यंत्र बनाया गया है. वहां पर रुपया, सोना या चांदी का सिक्का, लक्ष्मी जी की मूर्ति या मिट्टी के बने हुए, लक्ष्मी - गणेश सरस्वती जी या ब्रह्मा, विष्णु, महेश और अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां या चित्र सजायें. कोई धातु की मूर्ति हो तो उसे साक्षात रुप मानकर दूध, दही ओर गंगाजल से स्नान कराकर अक्षत, चंदन का श्रंगार करके फूल आदि से सजाएं. इसके ही दाहिने और एक पंचमुखी दीपक अवश्य जलायें, जिसमें घी या तिल का तेल प्रयोग किया जाता है.

लक्ष्मी पूजन विधि
Method of Laxmi Puja


आप हाथ में अक्षत, पुष्प और जल ले लीजिए. कुछ द्रव्य भी ले लीजिए. द्रव्य का अर्थ है कुछ धन. यह सब हाथ में लेकर संकसंकल्प मंत्र को बोलते हुए संकल्प कीजिए कि मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हो. सबसे पहले गणेश जी व गौरी का पूजन कीजिए.

हाथ में थोड़ा-सा जल ले लीजिए और आह्वाहन व पूजन मंत्र (ऊँ दीपावल्यै नम:) बोलिए और पूजा सामग्री चढ़ाइए. हाथ में अक्षत और पुष्प ले लीजिए और नवग्रह स्तोत्र बोलिए. अंत में महालक्ष्मी जी की आरती के साथ पूजा का समापन किजिये.

बही-खाता पूजन
Mahi-Khata Puja


बही खातों का पूजन करने के लिए पूजा मुहुर्त समय अवधि में नवीन बहियों व खाता पुस्तकों पर केसर युक्त चंदन से अथवा लाल कुमकुम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाना चाहिए. इसके बाद इनके ऊपर "श्री गणेशाय नम:" लिखना चाहिए. इसके साथ ही एक नई थैली लेकर उसमें हल्दी की पांच गांठे, कमलगट्ठा, अक्षत, दुर्गा, धनिया व दक्षिणा रखकर, थैली में भी स्वास्तिक का चिन्ह लगाकर सरस्वती मां का स्मरण करना चाहिए. इसके साथ ही निम्न मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए.

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
या वीणावरदण्डण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।,
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभि र्देवै: सदा वन्दिता,
सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा।।
ऊँ वीणापुस्तकधारिण्यै श्रीसरस्वत्यै नम:

मंत्र जाप करने के बाद मां सरस्वती का निम्न ध्यान करें.
How to Do Deepavali Puja


जो अपने कर कमलों में घटा, शूल, हल, शंख, मूसल, चक्र, धनुष और बाण धारण करती है, चन्द्र के समान जिनकी मनोहर कांति है. जो शुंभ आदि दैत्यों का नाश करने वाली है. वाणी बीज जिनका स्वरुप है, तथा जो सच्चिदानन्दमय विग्रह से संपन्न हैं, उन भगवती महासरस्वती का मैं ध्यान करता हूं. ध्यान करने के बाद बही खातों का गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्ध से पूजन करना चाहीए व निम्न मंत्र बोलें,

जहां पर नवग्रह यंत्र बनाया गया है. वहां पर रुपया, सोना या चांदी का सिक्का, लक्ष्मी जी की मूर्ति या मिट्टी के बने हुए, लक्ष्मी - गणेश सरस्वती जी या ब्रह्मा, विष्णु, महेश और अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां या चित्र सजायें. कोई धातु की मूर्ति हो तो उसे साक्षात रुप मानकर दूध, दही ओर गंगाजल से स्नान कराकर अक्षत, चंदन का श्रंगार करके फूल आदि से सजाएं. इसके ही दाहिने और एक पंचमुखी दीपक अवश्य जलायें, जिसमें घी या तिल का तेल प्रयोग किया जाता है.

" ऊँ वीणा पुस्तक धारिणी सरस्वती" आपको नमस्कार हैं.

संक्षेप में कुबेर पूजन विधि
Kuber Puja Method in Brief


कुबेर पूजन करने के लिये प्रदोष काल व निशिथ काल को लिया जा सकता है. ऊपर दिये गये शुभ समय में कुबेर पूजन करना लाभकारी रहेंगा.

कुबेर पूजन करने के लिये सबसे पहले तिजोरी अथवा धन रखने के संदुक पर स्वास्तिक का चिन्ह बनायें, और कुबेर का आह्वान करें. आह्वान के लिये निम्न मंत्र बोलें.

आवाहयामि देव त्वामिहायाहि कृपां कुरु।
कोशं वद्र्धय नित्यं त्वं परिरक्ष सुरेश्वर।।

आह्वान करने के बाद ऊँ कुबेराय नम: इस मंत्र को 108 बार बोलते हुए धन संदूक कि गंध, पुष्प आदि से पूजन करना चाहिए. साथ ही निम्न मंत्र बोलते हुए कुबेर देव से प्रार्थना करें.

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,


या वीणावरदण्डण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।,


या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभि र्देवै: सदा वन्दिता,


सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा।।


ऊँ वीणापुस्तकधारिण्यै श्रीसरस्वत्यै नम:



मंत्र जाप करने के बाद मां सरस्वती का निम्न ध्यान करें.

जो अपने कर कमलों में घटा, शूल, हल, शंख, मूसल, चक्र, धनुष और बाण धारण करती है, चन्द्र के समान जिनकी मनोहर कांति है. जो शुंभ आदि दैत्यों का नाश करने वाली है. वाणी बीज जिनका स्वरुप है, तथा जो सच्चिदानन्दमय विग्रह से संपन्न हैं, उन भगवती महासरस्वती का मैं ध्यान करता हूं.
ध्यान करने के बाद बही खातों का गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्ध से पूजन करना चाहीए व निम्न मंत्र बोलें,

" ऊँ वीणा पुस्तक धारिणी सरस्वती" आपको नमस्कार हैं.

संक्षेप में कुबेर पूजन विधि
Kuber Puja Method in Brief


कुबेर पूजन करने के लिये प्रदोष काल व निशिथ काल को लिया जा सकता है. ऊपर दिये गये शुभ समय में कुबेर पूजन करना लाभकारी रहेंगा.

कुबेर पूजन करने के लिये सबसे पहले तिजोरी अथवा धन रखने के संदुक पर स्वास्तिक का चिन्ह बनायें, और कुबेर का आह्वान करें. आह्वान के लिये निम्न मंत्र बोलें.

आवाहयामि देव त्वामिहायाहि कृपां कुरु।
कोशं वद्र्धय नित्यं त्वं परिरक्ष सुरेश्वर।।


आह्वान करने के बाद ऊँ कुबेराय नम: इस मंत्र को 108 बार बोलते हुए धन संदूक कि गंध, पुष्प आदि से पूजन करना चाहिए. साथ ही निम्न मंत्र बोलते हुए कुबेर देव से प्रार्थना करें.

धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च।
भगवान् त्वत्प्रसादेन धनधान्यादिसम्पद:।।


इस प्रकार प्रार्थनाकर पूर्व पूजित हल्दी, धनिया, कमलगट्टा, द्रव्य, दूर्वादि से युक्त थैली तिजोरी मे रखें.

13, November. 2012 Deepavali Puja Muhurt


दिपावली पूजन मुहूर्त : 13 नवम्बर, 2012 



श्री महालक्ष्मी पूजन व दीपावली का महापर्व कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष की अमावस्या में प्रदोष काल, स्थिर लग्न समय में मनाया जाता है. धन की देवी श्री महा लक्ष्मी जी का आशिर्वाद पाने के लिये इस दिन लक्ष्मी पूजन करना विशेष रुप से शुभ रहता है.


वर्ष 2012 में दिपावली, 13 नवम्बर, मंगलवार के दिन की रहेगी. इस दिन चित्रा नक्षत्र, परन्तु प्रदोषकाल के बाद स्वाती नक्षत्र का काल रहेगा, इस दिन प्रीति योग तथा चन्दमा तुला राशि में संचार करेगा. दीपावली में अमावस्या तिथि, प्रदोष काल, शुभ लग्न व चौघाडिया मुहूर्त विशेष महत्व रखते है. बुधवार की दिपावली व्यापारियों, क्रय-विक्रय करने वालों के लिये विशेष रुप से शुभ मानी जाती है.

1. प्रदोष काल मुहूर्त कब
1. When comes Pradosh Kaal Muhurta


13 नवम्बर 2012, मंगलवार के दिन सूर्यास्त 17:26 पर होगा. इस अवधि से लेकर 02 घण्टे 24 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा. इसे प्रदोष काल का समय कहा जाता है. प्रदोष काल समय को दिपावली पूजन के लिये शुभ मुहूर्त के रुप में प्रयोग किया जाता है. प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न समय सबसे उतम रहता है. इस दिन प्रदोष काल व स्थिर लग्न दोनों 17:33 से लेकर 19:28 का समय रहेगा. इसके बाद 19:02 से 20:36 तक शुभ चौघडिया भी रहने से मुहुर्त की शुभता में वृ्द्धि हो रही है.

प्रदोष काल का प्रयोग कैसे करें
How to Perform the Pradosh Kaal Activity


प्रदोष काल में मंदिर में दीपदान, रंगोली और पूजा से जुडी अन्य तैयारी इस समय पर कर लेनी चाहिए तथा मिठाई वितरण का कार्य भी इसी समय पर संपन्न करना शुभ माना जाता है.

इसके अतिरिक्त द्वार पर स्वास्तिक और शुभ लाभ लिखने का कार्य इस मुहूर्त समय पर किया जा सकता है. इसके अतिरिक्त इस समय पर अपने मित्रों व परिवार के बडे सदस्यों को उपहार देकर आशिर्वाद लेना व्यक्ति के जीवन की शुभता में वृ्द्धि करता है. मुहूर्त समय में धर्मस्थलो पर दानादि करना कल्याणकारी होगा.

2. निशिथ काल
2. Nishith Kaal


13 नवम्बर, मंगलवार के दिन निशिथ काल लगभग 20:10 से 22: 52 तक रहेगा. स्थानीय प्रदेश के अनुसार इस समय में कुछ मिनट का अन्तर हो सकता है. निशिथ काल में लाभ की चौघडिया भी रहेगी, ऎसे में व्यापारियों वर्ग के लिये लक्ष्मी पूजन के लिये इस समय की विशेष शुभता रहेगी.

दिपावली पूजन में निशिथ काल का प्रयोग कैसे करें
How to perform TXT Nishith Kaal in Deepavali Puja


धन लक्ष्मी का आहवाहन एवं पूजन, गल्ले की पूजा तथा हवन इत्यादि कार्य सम्पूर्ण कर लेना चाहिए. इसके अतिरिक्त समय का प्रयोग श्री महालक्ष्मी पूजन, महाकाली पूजन, लेखनी, कुबेर पूजन, अन्य मंन्त्रों का जपानुष्ठान करना चाहिए.

3. महानिशीथ काल
3. Maha Nishith Kaal


धन लक्ष्मी का आहवाहन एवं पूजन, गल्ले की पूजा तथा हवन इत्यादि कार्य सम्पूर्ण कर लेना चाहिए. इसके अतिरिक्त समय का प्रयोग श्री महालक्ष्मी पूजन, महाकाली पूजन, लेखनी, कुबेर पूजन, अन्य मंन्त्रों का जपानुष्ठान करना चाहिए.

13 नवम्बर, मंगलवार 2012 के रात्रि में 22:52 से लेकर अगले दिन प्राप्त: 25:34 मिनट तक महानिशीथ काल रहेगा. महानिशीथ काल में कर्क लग्न भी हों, तो विशेष शुभ माना जाता है. महानिशीथ काल व कर्क लग्न एक साथ होने के कारण यह समय अधिक शुभ हो गया है. जो जन शास्त्रों के अनुसार दिपावली पूजन करना चाहते हो, उन्हें इस समयावधि को पूजा के लिये प्रयोग करना चाहिए.

महानिशीथ काल का दिपावली पूजन में प्रयोग कैसे करें
How to Include Maha Nishith Kaal in Deepavali Puja


महानिशीथकाल में मुख्यतः तांत्रिक कार्य, ज्योतिषविद, वेद् आरम्भ, कर्मकाण्ड, अघोरी,यंत्र-मंत्र-तंत्र कार्य व विभिन्न शक्तियों का पूजन करते हैं एवं शक्तियों का आवाहन करना शुभ रहता है. अवधि में दीपावली पूजन के पश्चात गृह में एक चौमुखा दीपक रात भर जलता रहना चाहिए. यह दीपक लक्ष्मी एवं सौभाग्य में वृध्दि का प्रतीक माना जाता है.

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