आपका स्वागत है...

मैं
135 देशों में लोकप्रिय
इस ब्लॉग के माध्यम से हिन्दू धर्म को जन-जन तक पहुचाना चाहता हूँ.. इसमें आपका साथ मिल जाये तो बहुत ख़ुशी होगी.. इस ब्लॉग में पुरे भारत और आस-पास के देशों में हिन्दू धर्म, हिन्दू पर्व त्यौहार, देवी-देवताओं से सम्बंधित धार्मिक पुण्य स्थल व् उनके माहत्म्य, चारोंधाम,
12-ज्योतिर्लिंग, 52-शक्तिपीठ, सप्त नदी, सप्त मुनि, नवरात्र, सावन माह, दुर्गापूजा, दीपावली, होली, एकादशी, रामायण-महाभारत से जुड़े पहलुओं को यहाँ देने का प्रयास कर रहा हूँ.. कुछ त्रुटी रह जाये तो मार्गदर्शन करें...
वर्ष भर (2017) का पर्व-त्यौहार नीचे है…
अपना परामर्श और जानकारी इस नंबर
9831057985 पर दे सकते हैं....

धर्ममार्ग के साथी...

लेबल

आप जो पढना चाहते हैं इस ब्लॉग में खोजें :: राजेश मिश्रा

28 फ़रवरी 2013

TOURISM RAJASTHAN


"राजस्थान के तीर्थ स्थल"

राजस्थान को देव भूमि भी कहा जाता है। राजस्थान में तीर्थ न केवल अपने धार्मिक महत्व के कारण जाने जाते हैं, बल्कि तीर्थ स्थल का प्राकृतिक सौंदर्य और वातावरण इसे परिपूर्ण बनाता है। यहां के कुछ तीर्थ स्थलों को बहुत ही जाग्रत (सिद्ध) माना जाता है।

1.तीर्थराज पुष्कर -

यह अजमेर से 11 किमी दूर है। पुष्कर ब्रह्माजी के मंदिर के लिए विश्व प्रसिद्ध है। बद्रीनाथ, केदारनाथ, रामेश्वरम आदि तीर्थोँ के बाद पुष्कर में भी स्नान करना आवश्यक माना है । कहा जाता है कि विश्वामित्र ने यहाँ पर तपस्या की थी व भगवान राम ने यहाँ गया कुंड पर पिता दशरथ का पिण्ड तर्पण किया था। पांडवो ने भी अपने निर्वासित काल का कुछ समय पुष्कर में बिताया था। पुष्कर को गायत्री का जन्मस्थल भी माना जाता है। यहाँ प्रतिदिन तीर्थयात्री आते हैं लेकिन प्रसिद्ध पुष्कर मेले में हजारों देशी-विदेशी तीर्थयात्री आते हैं। यह मेला कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से पूर्णिमा तक चलता है।

2. कपिलमुनि का कोलायत -

सांख्य दर्शन के प्रणेता महर्षि कपिल की तपोभूमि कोलायत बीकानेर से लगभग 50 किमी दूर है। कार्तिक माह (विशेषकर पूर्णिमा) में यहाँ झील में स्नान का विशेष महत्व है।

3. भर्तृहरि -

अलवर से 35 किमी दूर है यह नाथपंथ की अलख जगाने वाले राजा से संत बने भर्तृहरि का समाधि स्थल। यहाँ भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की सप्तमी और अष्टमी को मेला लगता है । कनफडे नाथ साधुओं के लिए इस तीर्थ की विशेष मान्यता है।

4. रामद्वारा, शाहपुरा (भीलवाड़ा) -

यह भीलवाडा करीब 50 किमी दूर है व सडक मार्ग द्वारा जिला मुख्यालय से जुडा हुआ हैं। यह रामस्नेही सम्प्रदाय के श्रद्धालुओं का प्रमुख तीर्थ स्थल हैं। इस संप्रदाय का मुख्य मंदिर रामद्वारा के नाम से जाना जाता हैं। यहॉ पूरे भारत से और विदेशों तक से तीर्थयात्री आते हैं। यह शहर लोक देवताओं की फड पेंटिंग्स के लिए भी प्रसिद्ध है। प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी वीर बाँकुरे केसरसिंह बारहठ की हवेली एक स्मारक के रूप में यहाँ विद्यमान हैं। यहॉ होली के दूसरे दिन प्रसिद्ध फूलडोल मेला लगता हैं, जो लोगों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र होता हैं। यहॉं के ढाई इंची गुलाब जामुन मिठाई बहुत प्रसिद्ध है।

5. खाटूश्यामजी -

जयपुर से करीब 80 किमी दूर सीकर जिले मेँ स्थित खाटूश्यामजी का बहुत ही प्राचीन मंदिर स्थित है। यहाँ भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक की पूजा श्याम के रूप में की जाती है। ऐसी मान्यता है कि महाभारत युद्ध के समय भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को वरदान दिया था कि कलयुग में उसकी पूजा श्याम (कृष्ण स्वरूप) के नाम से होगी। खाटू में श्याम के मस्तक स्वरूप की पूजा होती है, जबकि निकट ही स्थित रींगस में धड़ स्वरूप की पूजा की जाती है। प्रतिवर्ष यहाँ फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष में नवमी से द्वादशी तक विशाल मेला भरता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों भक्तगण पहुँचते हैं। हजारों लोग यहाँ पदयात्रा करके भी पहुँचते हैं, वहीं कई लोग दंडवत करते हुए श्याम के दरबार में अर्चना करने आते हैं। प्रत्येक एकादशी व रविवार को भी यहाँ भक्तों की लंबी कतारें लगी रहती हैं।

6. हनुमानगढ़ का सिल्ला माता मंदिर-

सिल्ला माता का मंदिर 18 वीं शताब्दी में स्थापित है। यह कहा जाता है कि मंदिर में स्थापित माता जी सिल्ल पत्थर घग्घर नदी में बहकर आया था। यह मंदिर हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर वैदिक नदी सरस्वती के प्राचीन बहाव क्षेत्र में स्थित है। इस मंदिर की मान्यता है कि सिल्ला माता के सिल पीर में जो कोई भी दूध व पानी चढ़ाता है, उसके त्वचा सम्बन्धी रोगों का निवारण हो जाता है। इस मंदिर में प्रत्येक गुरुवार को मेला लगता है।

7. सालासर बालाजी-

राजस्थान के चुरू जिले के सालासर में स्थित हनुमानजी का मंदिर है। यह बालाजी का मंदिर बीकानेर सड़क मार्ग पर जयपुर से 130 किमी व सीकर से 57 किमी की दूरी पर है। यहाँ हर दिन हजारों की संख्या में देशी-विदेशी भक्त मत्था टेकने आते हैं। इस मंदिर में हनुमानजी की वयस्क मूर्ति स्थापित है अतः भक्तगण इसे बड़े हनुमानजी भी पुकारते हैं। चैत्र पूर्णिमा व आश्विन पूर्णिमा के दिन सालासर में विशाल मेला लगता है।

8. चौहानों की कुल देवी जीणमाता-

जीणमाता का मंदिर सीकर से 29 किमी दक्षिण में अरावली की पहाड़ियों के मध्य स्थित है। इसमें लगे शिलालेखों में सबसे प्राचीन विक्रम संवत 1029 (972 A.D.) का शिलालेख है। इससे पता चलता है कि यह मंदिर इससे भी प्राचीन है। जीण माता चौहानों की कुल देवी है। इस मंदिर में जीणमाता की अष्टभुजी प्रतिमा है। यहाँ चैत्र व आसोज के नवरात्रि में शुक्ल पक्ष की एकम से नवमी तक लक्खी मेला भरता है। राजस्थानी लोक साहित्य में जीणमाता का गीत सबसे लम्बा माना जाता है। इस गीत को कनफ़टे जोगी केसरिया कपड़े पहन कर, माथे पर सिन्दूर लगाकर, डमरू व सारंगी पर गाते हैं। इस मंदिर के पश्चिम में महात्मा का तप स्थान है जो धूणा के नाम से प्रसिद्ध है। जीण माता मंदिर के पहाड़ की श्रंखला में ही रेवासा पीठ व प्रसिद्ध हर्षनाथ पर्वत है।

9. मेवाड़ अधिपति एकलिंग महादेव-

उदयपुर से 25 किमी उत्तर में महादेव शिवजी का एक प्राचीन व अत्यंत प्रसिद्ध मंदिर है जिसे एकलिंग जी का मंदिर कहते है। यह अरावली की पहाड़ियों के मध्य स्थित है। इस गाँव का नाम कैलाशपुरी है। एकलिंग जी मेवाड़ के महाराणा के इष्टदेव हैं। महाराणा "मेवाड़-राज्य" के मालिक के रुप में एकलिंग जी को ही मानते हैं तथा वे स्वयं को उनका दीवान ही कहते हैं । इसके निर्माण के काल के बारे में तो ऐसा कोई लिखित साक्ष्य उपलब्ध नहीं है लेकिन एक जनश्रुति के अनुसार सर्वप्रथम इसे गुहिल वंश के बापा रावल ने बनवाया था। फिर महाराणा मोकल ने उसका जीर्णोद्धार कराया। महाराणा रायमल ने नये सिरे से वर्तमान मंदिर का निर्माण करवाया। इस मंदिर के अहाते में कई और भी छोटे बड़े मंदिर बने हुए हैं, जिनमें से एक महाराणा कुम्भा का बनवाया हुआ विष्णु का मंदिर है। लोग इसे मीराबाई का मंदिर के रुप में भी जानते हैं।

कुछ अन्य मंदिरों की सूचि :-

karni-mataकरनी माता का मंदिर अपने आप में एक आश्चर्य है। राजस्थान में बीकानेर के निकट स्थित मंदिर अद्भुत है। करनी माता को दुर्गा का अवतार माना जाता है। यहां सफेद चूहा, जिसे काबास कहते हैं, को देखना अच्छा माना जाता है।
kela-deviकेला देवी का मंदिर करौली ज़िला में स्थित है। हर साल नवरात्रि के दौरान इस मंदिर का आकर्षण बढ़ जाता है। 1600 ई. में निर्मित इस मंदिर में दुर्गा मां की पूजा होती है।
birla-mandir
जयपुर में स्थित बिरला मंदिर राजस्थान के प्रसिद्ध मंदिरों में से है।1988 में एक व्यवसायी की ओर से निर्मित मंदिर लक्ष्मी नारायण जी को समर्पित है।
dwarkadhishकनक्रोली राजसमंद में स्थित द्वारिकाधीश मंदिर कृष्ण जी के सात रूपों में से एक रूप है। 1676 में मूर्ति को मथुरा से महाराजा राज सिंह के जरिये लाया गया था।
shiv-mandirउदयपुर के उत्तर में स्थित एकलिंगजी का शिव मंदिर शिव भगवान को समर्पित है। एकलिंगजी मंदिर 108 मंदिरों का समूह है। यहां हमेशा धूप सामग्री से खुशबू फैली रहती है।
rankapur-jain-mandirरणकपुर जैन मंदिर पाली ज़िले के पर्वत शृंखला में स्थित है। 15वीं सदी में राणा कुंभा की ओर से निर्मित यह मंदिर भगवान ऋषभदेव जी को समर्पित है।
nathdwara-mandirनाथद्वारा मंदिर उदयपुर के उत्तर में स्थित है। इस मंदिर में भगवान कृष्ण की मूर्ति काले संगमरमर के एक टुकड़े से बनायी गयी है।
durga-mahakali-mandirदुर्गा महाकाली मंदिर अजमेर के तारागढ़ की तलहटी में बना है। पं. जगमोहन जी की ओर से स्थापित यह मंदिर भक्तों की इच्छाओं को पूर्ण करता है तथा कष्टों का निवारण होता है।
balaji-mandirराजस्थान के सवाई माधोपुर और जयपुर की सीमा रेखा पर मेंहंदीपुर बालाजी मंदिर स्थित है, जहां पर बजरंगबली की स्वयंभू 1000 वर्ष प्राचीन मूर्ति है। भूत-प्रेतों और ऊपरी बाधाओं से परेशान लोगों का यहां तांता लगा रहता है।
puskarअजमेर के पास पुष्कर नगरी में स्थित पुष्कर मंदिर में साधु-संतोंका जमावड़ा देखा जा सकता है। ब्रह्मा की इस धरती को ब्रह्म सरोवर कहा जाता है। ब्रह्मा मंदिर पुष्कर घाटी के नागा पर्वत और अन्नासागर के आगे स्थित है। दुनिया में एक ही मंदिर है, जहां ब्रह्मांड के निर्माता भगवान ब्रह्मा को पूजा जाता है।
pitalhar-mandirमाउंट आबू में स्थित पीतलहार मंदिर में ऋषभदेवजी की मुख्य धातु पीतल से बनी एक विशाल मूर्ति है। यह गुढ मंडप और नवचौकी से मिलकर बना है।
nasiyan-jain-mandirराजस्थान के अजमेर ज़िले में स्थित दिगंबर नसियान जैन मंदिर का निर्माण 1865 में हुआ था। इसे लाल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
suryanarayan-mandirरणकपुर में स्थित सूर्यनारायण स्टोन मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी में हुआ था। यह सात घोड़ों के शानदार रथ पर स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है।
chisti-ki-darghaअजमेर में ग़रीब नवाज के नाम से मशहूर मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है,जहां प्रवेश करते ही ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी नयी दुनिया में प्रवेश कर लिया हो।
dilwada-maindirमाउंट आबू में स्थित दिलवाड़ा जैन मंदिर जैन तीर्थंकरों का महत्वपूर्णतीर्थाटन है। 13वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर संगमरमर के प्रभावशाली उपयोग के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
galta-mandirजयपुर में स्थित गलता मंदिर सूर्य भगवान को समर्पित है। यह मंदिर अपने प्राकृतिक पानी के कुंड के लिए प्रसिद्ध है, जिससे लगातार पानी बहता है।
gaytri-mandirपुष्कर के दूसरी ओर गायत्री मंदिर स्थित है। ब्रह्मा के औपचारिकबलिदान के दौरान सावित्री की अनुपस्थिति में ब्रह्मा के साथ बैठी गायत्री के सम्मान में इस मंदिर का निर्माण हुआ।
kiradu-mandirकिराडू प्राचीन मंदिर बाड़मेर शहर से 39 किमी.. दूर हथमा गांव में स्थित है। पांच मंदिरों के समूह से यह मंदिर बना है।
osiyan-mandir10वीं सदी में निर्मित जोधपुर का ओसियान मंदिर जोधपुर से 65 किमी. दूर उत्तर-पश्चिम में स्थित है।
parsvnath-mandirपार्श्वनाथ मंदिर जैन तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ को समर्पित है। 1458-59 ई. में मांडलिक परिवार के जरिये इसका निर्माण हुआ।
saas-bahu-mandirसास बहू मंदिर उदयपुर में स्थित है। 10वीं सदी में यशोमति की ओर से निर्मित यह मंदिर सास बहू को समर्पित है।
sitla-mata-mandirशीतला माता मंदिर भीलवाड़ा के पास धानोपा गांव में स्थित है। इस मंदिर को बहुत ही जाग्रत माना जाता है।
ramdev-mandirश्री रामदेव मंदिर जैसलमेर ज़िले के पोकराम से 13 किमी. दूर रामदेवड़ा में स्थित है। सभी धर्म के लोग यहां श्रद्धांजलि देते हैं।
varah-mandirवराह मंदिर का निर्माण 12वीं सदी में हुआ था। इस मंदिर में वराह की विशाल मूर्ति है।



1. हवामहल – जयपुर
2. जंतर मंतर – जयपुर
3. गलता जी – जयपुर
4. आमेर किला – आमेर, जयपुर
5. बिड़ला तारामंडल – जयपुर
6. सरगासूली (ईसर लाट) – जयपुर (RPSC Exam)
7. गेटोर की छतरियां – जयपुर
8. नाहरगढ़ – जयपुर
9. गोविन्दजी का मंदिर – जयपुर
10. मुबारक महल – जयपुर (RPSC Exam)
11. आभानेरी मंदिर – दौसा

12. सोनीजी की नसियाँ – अजमेर
13. ढाई दिन का झोंपड़ा – अजमेर
14. दौलत बाग – अजमेर
15. अकबर का किला – अजमेर
16. दरगाह शरीफ्  – अजमेर
17. ब्रह्मा मंदिर – पुष्कर
18. नव ग्रह मंदिर – किशन गढ़

19. सास-बहू के मंदिर ( प्राचीन नागदा के मंदिर) – कैलाशपुरी, उदयपुर
20. सहेलियों की बाड़ी – उदयपुर
21. सज्जनगढ़ – उदयपुर
22. आहड़ संग्रहालय – उदयपुर
23. जगत के प्राचीन मंदिर – जगत गाँव उदयपुर
24. कुम्भा श्याम मंदिर – उदयपुर
25. द्वारकाधीश मंदिर – कांकरोली राजसमंद
26. कुंभलगढ़ – केलवाड़ा राजसमंद
27. श्रीनाथजी मंदिर – नाथद्वारा, राजसमंद

 28. विजय स्तम्भ – चित्तौड़
29. कीर्ति स्तम्भ – चित्तौड़
30. रानी पद्मनी महल – चित्तौड़गढ़
31. सांवलिया जी मंदिर – मंडफिया, चित्तौड़गढ़
32. विनय निवास महल – चित्तौड़गढ़

33. जसवंत थड़ा – जोधपुर
34. उम्मेद भवन – जोधपुर
35. मंडोर – जोधपुर
36. सच्चिया माता मंदिर – ओसियां ( जोधपुर)

 48. श्री गणेश जी का मंदिर – रणथम्भौर
49. उषा मंदिर – बयाना
50. लक्ष्मण जी का मंदिर – भरतपुर
51. केलादेवी मंदिर – करौली

52. नक्की झील – माउंट आबू
53. दिलवाड़ा जैन मंदिर – माउंट आबू
54. अचल गढ़ दुर्ग - माउंट आबू, सिरोही

55. पटवों की हवेली – जैसलमेर
56. सालिम सिंह की हवेली – जैसलमेर
57. रामगढ़ की हवेलियां – जैसलमेर
58. नथमल की हवेली – जैसलमेर
59. बाबा रामदेव मंदिर – रामदेवरा, जैसलमेर
60. बादल महल – जैसलमेर

61. करनी माता मंदिर – देशनोक ( बीकानेर )
62. कपिल देव जी का मंदिर – कोलायत ( बीकानेर )
63. भांडासर जैन मंदिर – बीकानेर
64. अरथूना के प्राचीन मंदिर – बाँसवाड़ा
65. नाकोड़ा पार्श्वनाथ मंदिर – बालोतरा (बाड़मेर)
66. कोलवी की गुफाएँ – झालावाड़
67. सूर्य मंदिर – झालावाड़
68. गैप सागर – डूंगरपुर
69. फखरुद्दीन की दरगाह – गलियाकोट, डूंगरपुर
70. देव सोमनाथ मंदिर – डूंगरपुर
71. रणकपुर जैन मंदिर – सादड़ी, पाली
72. जल महल – जयपुर, डीग व उदयपुर

मेरी ब्लॉग सूची

  • World wide radio-Radio Garden - *प्रिये मित्रों ,* *आज मैं आप लोगो के लिए ऐसी वेबसाईट के बारे में बताने जा रहा हूँ जिसमे आप ऑनलाइन पुरे विश्व के रेडियों को सुन सकते हैं। नीचे दिए गए ल...
    8 माह पहले
  • जीवन का सच - एक बार किसी गांव में एक महात्मा पधारे। उनसे मिलने पूरा गांव उमड़ पड़ा। गांव के हरेक व्यक्ति ने अपनी-अपनी जिज्ञासा उनके सामने रखी। एक व्यक्ति ने महात्मा से...
    6 वर्ष पहले

LATEST:


Windows Live Messenger + Facebook