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26 दिसंबर 2013

Gadhdevi Maa, Madhaura, Chhapra

सबकी मनोकामना पूर्ण करती हैं मढ़ौरा वाली गढ़देवी माई

भेल्दी से राजेश मिश्रा द्वारा

लोगों के महान आस्था का प्रतीक, मढ़ौरा की धरोहर, शक्ति और उपासना का प्रतीक मां गढ़देवी मंदिर वर्षो से सिद्धि प्राप्ति का केंद्र रहा है। नवरात्र के अवसर पर माता के भक्तों के साथ तांत्रिक सिद्धि प्राप्त करने वालों की भी भीड़ यहां जुटती है। भक्तों की यहां सभी मुरादें पूरी होती है और कोई खाली हाथ नहीं लौटता। मढ़ौरावासी भी मंदिर को अपना सौभाग्य मानते हैं। इस मंदिर की महिमा के कारण वैसे तो पूरे वर्ष माता के भक्तों का यहां तांता लगा रहता है, लेकिन नवरात्र के अवसर पर तो माता का दरबार विशेष हो जाता है और मंदिर का कोना-कोना भक्तों से भर जाता है। नवरात्र पर लोग माता के दर्शन कर खुद को धन्य समझते हैं।

मंदिर की प्रसिद्धी में इससे जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार माता गोपालगंज के प्रसिद्ध थावे स्थान पहुंचने के पूर्व यहां विश्राम की थीं। इससे यह स्थल शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता है। गोपालगंज के माता के उपासक रहषु भगत ने जब माता का आह्वान किया था तब माता कामरूपकामख्या से भक्त की पुकार सुनकर चल पड़ी थीं। इस दौरान माता मढ़ौरा में रुकी थीं।

दूसरी मान्यता के अनुसर जब भगवान शिव सती के भस्म शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु अनहोनी की आशंका को टालने के लिये अपने चक्र से सती के शरीर के कई टुकड़े कर दिये। इसी क्रम में माता के पावन खून के छींटे इस स्थल पर गिरे थे।

एक अन्य मान्यता के अनुसार मंदिर से सटे चीनी मिल द्वारा मंदिर की अवहेलना कर निर्माण कार्य कराया जा रहा था। काफी प्रयास के बाद कई बार में भी निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया जा सका। तब माता की कई दिन पूजा-अर्चना की गयी और एक बार के ही प्रयास में निर्माण कार्य पूरा हो गया। इसके साथ ही भक्तों को मिलती कृपा से मंदिर की ख्याति लगातार बढ़ रही है। नवरात्र के अवसर पर माता की भक्तों पर विशेष कृपा रहती है। तभी तो इस पवित्र स्थल से कोई भी नाउमीद नहीं होता। जिला मुख्यालय से 25 किमी दूरी पर स्थित इस मंदिर तक बस व ट्रेन से पहुंचा जा सकता है। यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन मढ़ौरा जंक्शन है।

पुजारियों की नजर में मंदिर

-मार्कण्डेय पुराण में मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठ व 51 उपपीठ का उल्लेख है। इसके अंतर्गत गढ़देवी मंदिर को साधना पीठ का दर्जा प्राप्त है। सारण गजेटियर में भी इस मंदिर की चर्चा है। माता का यह शक्ति पीठ पूरे क्षेत्र में विख्यात है। समय के साथ इसकी कीर्ति लगातार बढ़ रही है। भक्तों के सक्रिय सहयोग से मंदिर के स्वरूप में भी परिवर्तन हुआ है। पिंडी रूप में स्थित यह स्थल भव्य मंदिर का स्वरूप प्राप्त कर रहा है।

-मनोज शर्मा, मंदिर के पुजारी

प्राचीन ग्रंथ शिव पुराण में शिलनिधि नगरी के साथ-साथ मढ़ौरा के गढ़देवी स्थान की भी चर्चा है। भगवती के तीन रूप महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती के तीनों रूपों में मां भगवती की पूजा यहां संपन्न होती है। पूजा तांत्रिक और वैदिक दोनों विधियों से होती है। पूर्व में यहां भी पशु बली का विधान था, परंतु धीरे-धीरे इसमें कमी होती गयी। इसके स्थान पर अब नारियल व फलों की बली चढ़ाई जाती है।

टुकाई बाबा, मंदिर के पुजारी


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