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आप जो पढना चाहते हैं इस ब्लॉग में खोजें :: राजेश मिश्रा

06 फ़रवरी 2013

Temple Treasure: Richest Temples of India!

The staggering wealth discovered inside the secret vault of the Sri Ananda Padmanabhaswamy Temple in Thiruvanathapuram has brought back images of wealth of Indian shrines. An ancient tradition of making donations to the temples has meant that these temples are flush with wealth.

A look at the some of the richest of Indian shrines…

Tirumala Tirupati Venkateswara Temple,
Tirupati Ballaji, Andhra Pradesh




Donations: Rs 650 crore (2010-11)

Reserve of five tonnes of gold

Rs 560 crore in fixed deposits

Deity clad in 1000 kg gold



Shirdi Sai Baba Temple, Shirdi, Maharashtra



Donations every year: Rs 350 crore (approx)

Ornaments and jewellery worth Rs 32 crore (approx)

Investments: Rs 427 crore



Siddhivinayak Temple, Mumbai




Siddhi Vinayak Trust Income: Rs 48 crore (2010-11)

Fixed Deposits: Rs 125 crore



Sri Harmandir Sahib (Golden Temple), Amritsar




Gold plating on the Harmandir Sahib

Inside Harmandir Sahib: inlay work in silver and gold

Palanquin that bears Adi Granth: set with precious stones and has silver poles and a gold canopy

Trust pays for food: 40,000 visitors per day



Vaishno Devi Temple, Jammu




Daily Income of Shrine board: Rs 40 crore

Annual income Shrine board: Rs 500 crore



Guruvayur Temple, Guruvayur, Kerala




Guruvayur Devaswom Board: 230 acres of land

Guruvayur Devaswom Board: corpus of Rs 400 crore

Hundi collection per month: Rs. 2.5 crore






Treasure worth: Rs 1 lakh crore (approx)





Other notable mentions would include:

Jagannath Temple, Puri






Meenakshi Temple, Madurai






Amarnath Shrine, Kashmir





India shines…?

शक्तिपीठ : महामाया मंदिर

भारत में देवी माता के अनेक सिद्ध मंदिर हैं। महामाया मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। शक्तिपीठ वे पूजा स्थल कहलाते हैं जहां अपने पिता दक्ष से अपमानित हुई सती ने योगबल द्वारा अपने प्राण त्याग दिए थे। सती की मृत्यु से त्रस्त महादेव उनके मृत शरीर को लेकर तीनों लोकों में घूमते रहे। जहां-जहां माता के अंग गिरे, वहीं-वहीं शक्तिपीठ स्थापित हुए। महामाया मंदिर में माता का स्कंध गिरा था। श्रद्धापूर्वक भगवती महामाया के साथ-साथ भोलेनाथ के लिंग की पूजा करने का नवरात्रों में विशेष महत्व है। मान्यता है कि नवरात्र में यहां की गई पूजा का अधिक फल मिलताहै। नवरात्रों में यहां उत्सव सा माहौल होता है। यहां भगवान सती के अंग तथा आभूषण की पूजा होती है। मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना एवं देवी के अभिषेक का आयोजन किया जाता है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण लगभग 12वीं शताब्दी में हुआ था। यहां पहला अभिषेक और पूजा-अर्चना कलिंग के महाराज रत्रदेव ने 1050 में रतनपुर में की थी। आज भी यहां उनके किलों के अवशेष देखे जा सकते हैं।ऐतिहासिक, धार्मिक तथा पर्यटन की दृष्टि से यह प्रदेश के सर्वाधिक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। बिलासपुर-अंबिकापुर राजमार्ग पर बिलासपुर से 25 किलोमीटर दूर रतनपुर शहर स्थित है। वहां से निजी अथवा सरकारी वाहन से महामाया मंदिर पहुंचा जा सकता है।

गुप्त नवरात्र और देवी उपासना



धार्मिक ग्रंथों के अनुसार साल में चार नवरात्र होते हैं। साल के प्रथम मास चैत्र शुक्ल में प्रथम नवरात्र होते हैं, जो ‘वासंती नवरात्र’ कहलाते हैं। आषाढ़ शुक्ल में गुप्त नवरात्र होते हैं। आश्विन मास में प्रमुख नवरात्र होते हैं, जो शारदीय नवरात्र कहलाते हैं।


माघ शुक्ल में फिर गुप्त नवरात्र आते हैं। गुप्त नवरात्र मनाने और इनकी साधना का विधान देवी भागवत व अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। श्रृंग ऋषि ने गुप्त नवरात्रों के महत्व को बतलाते हुए कहा है कि जिस प्रकार वासंतिक नवरात्र में विष्णु पूजा की और शारदीय नवरात्र में देवी शक्ति की नौ देवियों की पूजा की प्रधानता रहती है, उसी तरह गुप्त नवरात्र दस महाविद्याओं के होते हैं, यदि कोई इन महाविद्याओं के रूप में शक्ति की उपासना करे, तो जीवन धन-धान्य, राज्य सत्ता, ऐश्वर्य से भर जाता है।

गुप्त नवरात्रों की प्रमुख देवी के स्वरूप का नाम सर्वेश्वर्यकारिणी देवी है। पूजा पाठ न कर सकने वाला भी यदि इन दिनों श्रद्धा के साथ इन दस महाविद्याओं में से किसी की भी पूजा-साधना करके घर में उनका यंत्र स्थापित करता है, तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जन्म कुंडली में कोई भी प्रतिकूल ग्रह नीच या शत्रुक्षेत्रीय प्रभाव में होकर अनिष्टकारक हों, उनकी दशा अन्तर्दशा में अनिष्ट प्रभाव पड़ रहा हो या अनिष्ट की आशंका हो तो नवरात्र में देवी की पूजा आराधना से सभी नौ ग्रह और बारह राशियों के प्रतिकूल प्रभाव शांत होकर घर में सुख, समृद्धि और शांति लाते हैं।

देवी की दस महाविद्याएं
ये दस देवियां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला हैं। इनकी प्रवृति के अनुसार इन्हें तीन समूह में बांटा गया है। 1. सौम्य कोटि-त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, मातंगी, और कमला। 2. उग्र कोटि- काली, छिन्नमस्ता, धूमावती और बगलामुखी। 3. सौम्य-उग्र कोटि- तारा और त्रिपुर भैरवी। ये महाविद्याएं तंत्र की प्रमुख देवी हैं। इनकी पूजा और जप आदि शुद्ध आचरण के साथ करने चाहिए। तंत्र और शाक्त मत का तो यह सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। वैष्णो, पारम्बा देवी, कामाख्या देवी और हिन्गुलाज देवी का यही मुख्य पर्व है। गुप्त नवरात्र में की गई मंत्र साधना निष्फल नहीं जाती।

जन्म कुंडली में यदि नवग्रहों में से कोई भी ग्रह अनिष्ट फल दे रहा हो तो गुप्त नवरात्र में शक्ति उपासना करने से खास लाभ मिलता है। सूर्य ग्रह के कमजोर होने पर स्वास्थ्य लाभ के लिए शैल पुत्री की उपासना से लाभ मिलता है। चंद्रमा के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए कूष्मांडा देवी की आराधना करें। मंगल ग्रह के लिए स्कंदमाता, बुध की शांति और अर्थव्यवस्था में वृद्धि के लिए कात्यायनी देवी, गुरु के लिए महागौरी, शुक्र के शुभत्व के लिए सिद्धिदात्री और शनि के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए कालरात्रि की उपासना सार्थक रहती है।
राहु की शुभता के लिए ब्रह्मचारिणी की उपासना और केतु के विपरीत प्रभाव को दूर करने के लिए चंद्रघंटा देवी की साधना करनी चाहिए।

जब किसी की जन्म पत्रिका उपलब्ध नहीं हो या फिर जन्म समय की पुख्ता जानकारी न हो और जीवन में लगातार परेशानियां आ रही हों, जैसे बार-बार दुर्घटनाएं होना, मानसिक परेशानी, किसी भी काम में बार-बार विफल होना, संतान के विवाह में विलम्ब या अन्य कष्ट होना, पूजा पाठ में मन नहीं लगना, व्यापार में नुक्सान, रोजगार की समस्या, भय, शारीरिक व्याधि, दाम्पत्य जीवन में क्लेश आदि समस्याओं के समाधान के लिए गुप्त नवरात्र में देवी की आराधना और यंत्र सहित मंत्र जप करें, सफलता मिलेगी। इन देवियों में से सौम्य देवियां जल्द प्रसन्न होने वाली और तुरंत फल देने वाली मानी जाती हैं। किसी भी राशि का जातक पूरी मानसिक और शारीरिक शुद्धता के  साथ देवी का  स्मरण और पूजा-पाठ करता है तो शीघ्र लाभ मिलता है।

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