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30 दिसंबर 2014

Scholar Ravana Laxman said three things in lifeIs the key to success

महापंडित रावण ने लक्ष्मण को तीन बातें बताई जो जीवन में सफलता की कुंजी है

जिस समय रावण मरणासन्न अवस्था में था, उस समय भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि इस संसार से नीति, राजनीति और शक्ति का महान् पंडित विदा ले रहा है, तुम उसके पास जाओ और उससे जीवन की कुछ ऐसी शिक्षा ले लो जो और कोई नहीं दे सकता। श्रीराम ीकी  बात मानकर लक्ष्मण मरणासन्न अवस्था में पड़े रावण के सिर के नजदीक जाकर खड़े हो गए। रावण ने कुछ नहीं कहा। लक्ष्मणजी वापस रामजी के पास लौटकर आए... तब भगवान ने कहा कि यदि किसी से ज्ञान प्राप्त करना हो तो उसके चरणों के पास खड़े होना चाहिए न कि सिर की ओर। यह बात सुनकर लक्ष्मण जाकर इस बार रावण के पैरों की ओर खड़े हो गए। उस समय महापंडित रावण ने लक्ष्मण को तीन बातें बताई जो जीवन में सफलता की कुंजी है......

1- पहली बात जो रावण ने लक्ष्मण को बताई वह ये थी कि शुभ कार्य जितनी जल्दी हो कर डालना और अशुभ को जितना टाल सकते हो टाल देना चाहिए यानी शुभस्य शीघ्रम्। मैंने श्रीराम को पहचान नहीं सका और उनकी शरण में आने में देरी कर दी, इसी कारण मेरी यह हालत हुई।

2- दूसरी बात यह कि अपने प्रतिद्वंद्वी, अपने शत्रु को कभी अपने से छोटा नहीं समझना चाहिए, मैं यह भूल कर गया। मैंने जिन्हें साधारण वानर और भालू समझा उन्होंने मेरी पूरी सेना को नष्ट कर दिया। मैंने जब ब्रह्माजी से अमरता का वरदान मांगा था तब मनुष्य और वानर के अतिरिक्त कोई मेरा वध न कर सके ऐसा कहा था क्योंकि मैं मनुष्य और वानर को तुच्छ समझता था। यही मेरी गलती हुई।

3- रावण ने लक्ष्मण को तीसरी और अंतिम बात ये बताई कि अपने जीवन का कोई राज हो तो उसे किसी को भी नहीं बताना चाहिए। यहां भी मैं चूक गया क्योंकि विभीषण मेरी मृत्यु का राज जानता था।


Scholar Ravana Laxman said three things in lifeIs the key to success

The time Ravana was at death's door, at that time Lord Rama Laxman said that the policy of the world, politics and The great scholar of the power take off, you go to him and her Take some lessons of life that no one else can give. Sriram Ravana Laxman obeyed head lying at death's door Stood close by. Ravana did not say anything. Laxman back Ramji ... Then God said to come back if someone If you have to gain knowledge must not stand near her feet Side of the head. Laxman, Ravana went to hear it this time Stood on feet. At that time, three scholar Ravana Laxman The key to success in life is told

1- The first thing she said was that auspicious Ravana Laxman Pour off as soon as you can and avoid unlucky That should give Shigrm Shubsy. I could not recognize Ram and Were delayed in their shelter, why was my condition.

2. The second thing is that your opponent, your enemy than ever Should not be small, I was able to forget it. I have some simple Monkeys and bears explaining he destroyed my entire army. When I When asked for the boon of immortality from Brahma humans and apes Additional someone told me that because I did not slaughter humans and Apes belittled. That was my mistake.

3. The third and final thing Laxman told Ravana that his If a rule of life, he should not tell anyone. It was also missed because I knew the secret of my death catastrophically. 

29 दिसंबर 2014

नववर्ष की माया अधिकांश त्यौहार शनिवार को

2015 में अधिकमास के कारण पहले होंगे कई त्योहार, जाने कैसे व क्यों

वर्ष 2015 में अधिकांश प्रमुख त्योहार शनिवार को होंगे। यही नहीं, 21 मार्च को विक्रम संवत् 2072 का शुभारंभ भी शनिवार के दिन ही होगा, इसलिए पूरे संवत्सर के राजा शनिदेव ही होंगे। 15 अगस्त को मनाने वाला राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस भी इस वर्ष शनिवार के दिन ही है। इस पूरे वर्ष में चार माह जनवरी, मई, अगस्त और अक्टूबर ऐसे होंगे, जिनमें पांच शनिवार होंगे।

नए साल में प्रशासनिक क्षेत्रों में राजा शनि कार्यों में स्थायित्व प्रदान करेंगे, जबकि मंत्री मंगल अनुशासन को बढ़ावा देंगे। जिन लोगों पर शनि की साढ़े साती ढैया चल रही है, उन्हें हनुमान जी की पूजा करने से लाभ होगा। ज्योतिषियों की मानें तो नए वर्ष में अधिकांश बड़े पर्व शनिवार को होने से इस वार के स्वामी शनिदेव का वर्चस्व रहेगा। शनि पूरे वर्ष में कभी वक्री तो कभी मार्गी होगा। वर्तमान में शनि मंगल के आधिपत्य वाली राशि वृश्चिक में हैं।

आगामी 15 मार्च से यह वक्री स्थिति में रहेगा। वहीं विक्रम संवत 2072 का राजा शनि होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार विक्रम संवत्सर जिस वार को शुरू होता है, पूरे वर्ष उसी वार का स्वामी राजा होता है। मंत्री मंगल, दुर्गेश चंद्रमा होंगे। इससे देश में सुख-शांति अधिक खाद्यान्न उत्पादन की आशा की जा सकती है . 

  • जनवरी- 3,10,17, 24 31 
  • मई- 2, 9,16, 23, 30
  • अगस्त 1, 8,15, 22, 29
  • अक्टूबर 3,10,17, 24, 31
  • चार माह में 5-5 शनिवार
  • वर्ष 2015 में ये त्योहार होंगे शनिवार को
  • बसंत पंचमी 24 जनवरी
  • भाई दूज 07 मार्च
  • चैत्र नवरात्र 21 मार्च
  • राम नवमी 28 मार्च
  • हनुमान जयंती 04 अप्रैल
  • बैसाख अमावस्या 18 अप्रैल
  • रक्षा बंधन 29 अगस्त
  • जन्माष्टमी 05 सितंबर
  • श्राद्ध अमावस्या 12 सितंबर
  • छठ 19 सितंबर
  • इदुल फितर 18 जुलाई
  • मोहर्रम 24 अक्टूबर
  • 15 अगस्त-स्वतंत्रता दिवस (शनिवार)
  • खग्रास चंद्र ग्रहण-4 अप्रैल (शनिवार)
  • अन्य संयोग- नए वर्ष में 1 जनवरी को गुरुवार, 31 दिसंबर को भी गुरूवार।
  • चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 21 मार्च शनिवार को और नवमी पर समापन भी 28 मार्च शनिवार को

आने वाले साल 2015 में प्रमुख त्योहारों की तिथियां काफी बदला

इसके अलावा,  आने वाले साल 2015 में प्रमुख त्योहारों की तिथियां काफी बदला हुआ रहेगा। 2015 के जनवरी से जून तक आने वाले त्योहार इस साल 2014 के मुकाबले कुछ दिन पहले की तारीखों में पड़ेंगे।

यह स्थिति अधिकमास के कारण बनेगी। यानि गत 18 अगस्त से 13 सितंबर 2012 में अधिकमास होने के कारण दो भादों थे और 2015 में दो आषाढ़ होंगे, जबकि 2018 में 16 मई से 13 जून तक दो जेठ होंगे। यानी नए वर्ष के शुरू के छह माह में त्योहार गत वर्ष की अपेक्षा दस दिन पहले और बाद के छह माह में देरी से होंगे। ज्योतिषी इसकी वजह नए साल में दो आषाढ़ होना मान रहे हैं।

वहीं जानकार भी नए साल में दो आषाढ़ मास होने की बात कह रहे हैं। यानी जून में अधिक मास की स्थिति बनेगी, इसलिए इसके खत्म होने के बाद जो त्योहार आएंगे, वे दस से 20 दिन की देरी से होंगे। इस साल की अपेक्षा आगामी वर्ष 2015 में जनवरी से जून तक आने वाले त्योहार 10 से 11 दिन पहले और जुलाई से दिसंबर तक होने वाले त्योहार 10 से 15 दिन की देरी से आएंगे।

पंडितों का कहना है कि हर तीसरे वर्ष में अधिक मास होता है।

ज्योतिष के मुताबिक 6, 7 दिसंबर वर्ष 2014 में विवाह के अंतिम श्रेष्ठ मुहूर्त थे। 16 दिसंबर को सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही मलमास शुरू हो गया है। मलमास में शादी-ब्याह शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं निकलेंगे। अब मलमास खत्म होने 16 जनवरी तक इंतजार करना होगा। वर्ष 2015 में जनवरी से जुलाई देवताओं तक कुल 34 दिन विवाह के शुभ मुहूर्त आएंगे।

सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्रांति होना कहते हैं। सौर मास 12 और राशियां भी 12 होती हैं। जब दो पक्षों में संक्रांति नहीं होती, तब अधिकमास होता है। आमतौर पर यह स्थिति 32 माह और 16 दिन में एक बार यानी हर तीसरे वर्ष में बनती है। ऐसा सूर्य और पृथ्वी की गति में होने वाले परिवर्तन से तिथियों का समय घटने-बढऩे के कारण होता है। नए वर्ष में आषाढ़ 3 जून को शुरू होकर 30 जुलाई तक रहेगा। इस अवधि में 17 जून से 16 जुलाई तक की अवधि को अधिकमास माना जाएगा। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।

मौजूदा वर्ष की तुलना में पर्वों की तारीख हर तीन साल में घट-बढ़ गईं हैं। अब साल 2015 में आने वाले त्योहार 20 दिन बाद तक 10 दिन पहले आएंगे। ये पर्व वर्ष 2015 में अधिकमास के कारण बदल रहे हैं। त्योहारों की तिथियों का गणित, आषाढ़ के दो महीने पहले से आने के कारण हुआ है।

सूर्य और पृथ्वी की गति में होने वाले परिवर्तन से तिथियों का समय घटने-बढऩे के कारण होता है। नए वर्ष में आषाढ़ 3 जून को शुरू होकर 30 जुलाई तक रहेगा। इस अवधि में 17 जून से 16 जुलाई तक की अवधि को अधिकमास माना जाएगा। इसे पुरूषोत्तम मास भी कहा जाता है।

त्योहार वर्ष 2014 वर्ष 2015

माघी(मौनी) अमावस्या- 30 जनवरी 20 जनवरी
वसंत पंचमी- 4 फरवरी 24 जनवरी
मां नर्मदा जयंती- 6 फरवरी 26 जनवरी
महाशिवरात्रि- 27 फरवरी 17 फरवरी
होली- 17 मार्च 6 मार्च
चैत्र नवरात्र(गुड़ी पड़वा)- 31 मार्च 21 मार्च
राम नवमी- 8 अप्रैल 28 मार्च
महावीर जयंती- 13 अप्रैल 2 अप्रैल
हनुमान जयंती- 15 अप्रैल 4 अप्रैल
अक्षय तृतीया- 2 मई 21 अप्रैल
कबीर जयंती- 13 जून 2जून
त्योहार वर्ष- 2014 वर्ष 2015
भड़लीनवमी- 6 जुलाई 25 जुलाई
चातुर्मास प्रारंभ- 8 जुलाई 27 जुलाई
रक्षाबंधन- 10 अगस्त 29 अगस्त
जन्माष्टमी- 18 अगस्त 5 सितंबर
गणेश चतुर्थी- 29 अगस्त 17 सितंबर
शारदीय नवरात्र- 25 सितंबर 13 अक्टूबर
दशहरा- 3 अक्टूबर 22 अक्टूबर
शरद पूर्णिमा- 8 अक्टूबर 27 अक्टूबर
दीपावली- 23 अक्टूबर 11 नवंबर
काल भैरव अष्टमी- 14 नवंबर 3 दिसंबर

25 दिसंबर 2014

लोहार्गल : जहाँ पांडवों के हथियार गले थे :


यहां पानी में गल गई थी भीम की गदा, पांडवों को मिली थी हत्या के पाप से मुक्ति

सूर्य मंदिर 

महाभारत युद्ध समाप्त हो चुका था, पर पांडव स्वजनों की हत्या के पाप से व्यथित थे। श्री कृष्ण के निर्देश पर वह सभी तीर्थ स्थलों के दर्शन करते भटक रहे थे। श्री कृष्ण ने उन्हें बताया था कि जिस तीर्थ में तुम्हारे हथियार पानी में गल जायेंगे वहीं तुम्हारा मनोरथ पूर्ण होगा। घूमते-घूमते पांण्ड़व लोहार्गल आये तथा जैसे ही उन्होंने यहां के सूर्य कुंड़ में स्नान किया उनके सारे हथियार गल गये। उन्होंने इस स्थान की महिमा को समझ इसे तीर्थ राज की उपाधी से विभूषित किया। फिर शिव जी की आराधना कर मोक्ष की प्राप्ति की।
राजस्थान की धरती पर अनेक सांस्कृतिक रंग रह पग पर नजर आते हैं। वीर सपूतों की इस धरती पर धर्म और आध्यात्म के भी कई रंग दिखाई देते हैं। कहीं बुलट की बाबा के रूप में पूजा होती है तो कहीं तलवारों के साये में मां की आरती की जाती है तो एक मंदिर ऐसा भी है जिसने 1965 के युद्ध में पाकिस्तान के हमले किए थे नाकाम। 'झलक राजस्थान की' सीरीज में एक ऐसे स्थान के बारे में बता रहा है जहां पानी में गल गई थी भीम की गदा और जिस जगह पर पत्नी संग रहने के लिए भगवान सूर्य को झेलने पड़े थे कष्ट।


लोहार्गल कुंड
महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था, लेकिन जीत के बाद भी पांडव अपने पूर्वजों की हत्या के पाप से चिंतित थे। लाखों लोगों के पाप का दर्द देख श्री कृष्ण ने उन्हें बताया कि जिस तीर्थ स्थल के तालाब में तुम्हारे हथियार पानी में गल जायेंगे वहीं तुम्हारा मनोरथ पूर्ण होगा। घूमते-घूमते पांण्ड़व लोहार्गल आये तथा जैसे ही भीम ने यहां के सूर्य कुंड़ में स्नान किया उनके हथियार गल गये। इसके बाद शिव जी की आराधना कर मोक्ष की प्राप्ति की।मान्यता है यह देश का पहला ऐसा मंदिर है जहां पत्नी छाया संग विराजते हैं सूर्य भगवान। घने जंगलों के बीच बसा है भगवान सूर्य का यह पवित्र धाम। यहां सूर्यदेव के लिए जगह पाना आसान नहीं था। इसके लिए उन्हें कठोर तप से गुजरना पड़ा था। कहते हैं कि यह स्थान मालकेतू पर्वत से पूरी तरह ढ़का हुआ था। तब सूर्यदेव ने भगवान विष्णु की घोर तपस्या की। उनकी तपस्या से खुश होकर भगवान विष्णु उनके सामने प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा। तब भगवान सूर्य ने पत्नी संग रहने के लिए स्थान की मांग की थी। भगवान ने उनकी मनोकामना पूरी की। तभी से इस कूंड का नाम सूर्यकुंड पड़ गया।


राजस्थान के शेखावाटी इलाके के झुन्झुनू जिले से 70 कि.मी. दूर आड़ावल पर्वत की घाटी में बसे उदयपुरवाटी कस्बे से करीब दस कि.मी. की दूरी पर स्थित है लोहार्गल। जिसका अर्थ होता है जहाँ लोहा गल जाए। पुराणों में भी इस स्थान का जिक्र मिलता है। झुन्झुनू जिले में अरावली पर्वत की शाखायें उदयपुरवाटी तहसील से प्रवेश कर खेतड़ी , सिंघाना तक निकलती हैं, जिसकी सबसे ऊँची चोटी 1050 मीटर लोहार्गल में है।

महाभारत युद्ध समाप्त हो चुका था, पर पाण्डव स्वजनों की हत्या के पास से व्यथित थे। श्री कृष्ण के निर्देश पर वह सभी तीर्थ स्थलों के दर्शन करते भटक रहे थे। श्री कृष्ण ने उन्हें बताया था कि जिस तीर्थ में तुम्हारे हथियार पानी में गल जायेंगे वहीं तुम्हारा मनोरथ पूर्ण होगा। घूमते-घूमते पाण्डव लोहार्गल आये तथा जैसे ही उन्होंने यहाँ के सूर्य कुण्ड में स्नान किया उनके सारे हथियार गल गये। उन्होंने इस स्थान की महिमा को समझ इसे तीर्थ राज की उपाधि से विभूषित किया। फिर शिव जी की आराधना कर मोक्ष की प्राप्ति की।

लोहार्गल में सिर्फ पाण्डवों ने ही कुल हत्या का पाप नहीं धोया था, बल्कि ये जगह गवाह है परशुराम के पश्चाताप की भी, विष्णु के छठें अंश अवतार ने परशुराम ने क्रोध में क्षत्रियों का संहार कर दिया था, लेकिन शान्त होने पर उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ।

पहले यहाँ सिर्फ साधू-सन्यासी ही रहा करते थे, पर अब गृहस्थ लोग भी रहने लगे हैं। यहाँ एक बहुत विशाल बावड़ी है जो महात्मा चेतन दास जी ने बनवाई थी, यह राजस्थान की बड़ी बावडि यों में से एक है। साथ के पहाड पर प्राचीन सूर्य मन्दिर बना हुआ है। साथ ही वनखण्डी जी का मन्दिर है। कुण्ड के पास ही प्राचीन शिव मन्दिर, हनुमान मन्दिर तथा पाण्डव गुफा स्थित है। इनके अलावा चार सौ सीढियाँ चढने पर मालकेतु जी के दर्शन किये जा सकते हैं। यहाँ समय-समय पर मेले लगते रहते हैं। हजारों नर-नारी यहाँ आ कुण्ड में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।

लोहार्गल एक प्राचीन, धार्मिक, ऐतिहासिक स्थल है। लोगों की इसके प्रति अटूट आस्था भी है। भक्तों का यहाँ आना-जाना लगा रहता है फिर भी इस क्षेत्र की हालत सोचनीय है। सरकार की ओर से पूर्णतया उपेक्षित इस जगह पर प्राथमिक सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं है। चारों ओर गन्दगी का आलम है। पशु-मवेशी खुले आम घूमते रहते हैं। सड़कों की हालत दयनीय है। नियमित बस सेवा भी उपलब्ध नहीं है। रहने खाने का भी कोई माकूल इन्तजाम नहीं है। यदि इस ओर थोडा सा भी ध्यान पर्यटन विभाग दे तो यहाँ देशी-विदेशी पर्यटकों का आना शुरू हो सकता है।

24 दिसंबर 2014

हनुमान जी का ऐसे हुआ था विवाह

यहाँ दर्शन देते हैं हनुमानजी पत्नी सुवर्चला के साथ : राजेश मिश्रा 


हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी माना जाता है इसलिए हनुमान जी लंगोट धारण किए हर मंदिर और तस्वीरों में अकेले दिखते हैं। कभी भी अन्य देवताओं की तरह हनुमान जी को पत्नी के साथ नहीं देखा होगा। लेकिन अगर आप हनुमान के साथ उनकी पत्नी को देखना चाहते हैं तो आपको आंध्रप्रदेश जाना होगा।

आंध्रप्रदेश के खम्मम जिले में हनुमान जी का एक प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में हनुमान जी के साथ उनकी पत्नी के भी दर्शन प्राप्त होते हैं। यह मंदिर इकलौता गवाह है हनुमान जी के विवाह का। ऎसी मान्यता है कि हनुमान जी जब अपने गुरु सूर्य देव से शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। उस दौरान सूर्य देव ने हनुमान जी के सामने शर्त रख दी कि अब आगे कि शिक्षा तभी प्राप्त कर सकते हो जब तुम विवाह कर लो।

ऎसे में आजीवन ब्रह्मचारी रहने का प्राण ले चुके हनुमान जी के लिए दुविधा की स्थिति उत्पन्न हो गई। शिष्य को दुविधा में देखकर सूर्य देव ने हनुमान जी से कहा कि तुम मेरी पुत्री सुवर्चला से विवाह कर लो। सुवर्चला तपस्विनी थी। हनुमान जी से विवाह के बाद सुवर्चला वापस तपस्या में लीन हो गई। इस तरह हनुमान जी ने विवाह की शर्त पूरी कर ली और ब्रह्मचारी रहने का व्रत भी कायम रहा। हनुमान जी के विवाह का उल्लेख पराशर संहिता में भी किया गया है।

मान्यता है कि हनुमान जी के इस मंदिर में आकर जो दंपत्ति हनुमान और उनकी पत्नी के दर्शन करते हैं उनके वैवाहिक जीवन में प्रेम और आपसी तालमेल बना रहता है। वैवाहिक जीवन में चल रही परेशानियों से मुक्ति दिलाते हैं विवाहित हनुमान जी। 

18 दिसंबर 2014

SriKrishna ki Maya

श्रीकृष्ण की माया

सुदामा ने एक बार श्रीकृष्ण ने पूछा कान्हा, मैं आपकी माया के दर्शन करना चाहता हूं… कैसी होती है?”
श्री कृष्ण ने टालना चाहा, लेकिन सुदामा की जिद पर श्री कृष्ण ने कहा, “अच्छा, कभी वक्त आएगा तो बताऊंगा|”
और फिर एक दिन कहने लगे… सुदामा, आओ, गोमती में स्नान करने चलें| दोनों गोमती के तट पर गए| वस्त्र उतारे| दोनों नदी में उतरे… श्रीकृष्ण स्नान करके तट पर लौट आए| पीतांबर पहनने लगे… सुदामा ने देखा, कृष्ण तो तट पर चला गया है, मैं एक डुबकी और लगा लेता हूं… और जैसे ही सुदामा ने डुबकी लगाई… भगवान ने उसे अपनी माया का दर्शन कर दिया|
सुदामा को लगा, गोमती में बाढ़ आ गई है, वह बहे जा रहे हैं, सुदामा जैसे-तैसे तक घाट के किनारे रुके| घाट पर चढ़े| घूमने लगे| घूमते-घूमते गांव के पास आए| वहां एक हथिनी ने उनके गले में फूल माला पहनाई| सुदामा हैरान हुए| लोग इकट्ठे हो गए| लोगों ने कहा, “हमारे देश के राजा की मृत्यु हो गई है| हमारा नियम है, राजा की मृत्यु के बाद हथिनी, जिस भी व्यक्ति के गले में माला पहना दे, वही हमारा राजा होता है| हथिनी ने आपके गले में माला पहनाई है, इसलिए अब आप हमारे राजा हैं|”
सुदामा हैरान हुआ| राजा बन गया| एक राजकन्या के साथ उसका विवाह भी हो गया| दो पुत्र भी पैदा हो गए| एक दिन सुदामा की पत्नी बीमार पड़ गई… आखिर मर गई… सुदामा दुख से रोने लगा… उसकी पत्नी जो मर गई थी, जिसे वह बहुत चाहता था, सुंदर थी, सुशील थी… लोग इकट्ठे हो गए… उन्होंने सुदामा को कहा, आप रोएं नहीं, आप हमारे राजा हैं… लेकिन रानी जहां गई है, वहीं आप को भी जाना है, यह मायापुरी का नियम है| आपकी पत्नी को चिता में अग्नि दी जाएगी… आपको भी अपनी पत्नी की चिता में प्रवेश करना होगा… आपको भी अपनी पत्नी के साथ जाना होगा|
सुना, तो सुदामा की सांस रुक गई… हाथ-पांव फुल गए… अब मुझे भी मरना होगा… मेरी पत्नी की मौत हुई है, मेरी तो नहीं… भला मैं क्यों मरूं… यह कैसा नियम है? सुदामा अपनी पत्नी की मृत्यु को भूल गया… उसका रोना भी बंद हो गया| अब वह स्वयं की चिंता में डूब गया… कहाभी, ‘भई, मैं तो मायापुरी का वासी नहीं हूं… मुझ पर आपकी नगरी का कानून लागू नहीं होता… मुझे क्यों जलना होगा|’ लोग नहीं माने, कहा, ‘अपनी पत्नी के साथ आपको भी चिता में जलना होगा… मरना होगा… यह यहां का नियम है|’ आखिर सुदामा ने कहा, ‘अच्छा भई, चिता में जलने से पहले मुझे स्नान तो कर लेने दो…’ लोग माने नहीं… फिर उन्होंने हथियारबंद लोगों की ड्यूटी लगा दी… सुदामा को स्नान करने दो… देखना कहीं भाग न जाए…
रह-रह कर सुदामा रो उठता| सुदामा इतना डर गया कि उसके हाथ-पैर कांपने लगे… वह नदी में उतरा… डुबकी लगाई… और फिर जैसे ही बाहर निकला… उसने देखा, मायानगरी कहीं भी नहीं, किनारे पर तो कृष्ण अभी अपना पीतांबर ही पहन रहे थे… और वह एक दुनिया घूम आया है| मौत के मुंह से बचकर निकला है…सुदामा नदी से बाहर आया… सुदामा रोए जा रहा था|
श्रीकृष्ण हैरान हुए… सबकुछ जानते थे… फिर भी अनजान बनते हुए पूछा, “सुदामा तुम रो क्यों रो रहे हो?”सुदामा ने कहा, “कृष्ण मैंने जो देखा है, वह सच था या यह जो मैं देख रहा हूं|” श्रीकृष्ण मुस्कराए, कहा, “जो देखा, भोगा वह सच नहीं था| भ्रम था… स्वप्न था… माया थी मेरी और जो तुम अब मुझे देख रहे हो… यही सच है… मैं ही सच हूं…मेरे से भिन्न, जो भी है, वह मेरी माया ही है| और जो मुझे ही सर्वत्र देखता है,महसूस करता है, उसे मेरी माया स्पर्श नहीं करती| माया स्वयं का विस्मरण है…माया अज्ञान है, माया परमात्मा से भिन्न… माया नर्तकी है… नाचती है… नाचती है… लेकिन जो श्रीकृष्ण से जुड़ा है, वह नाचता नहीं… भ्रमित नहीं होता… माया से निर्लेप रहता है, वह जान जाता है, सुदामा भी जान गया था… जो जान गया वह श्रीकृष्ण से अलग कैसे रह सकता है!!!!

04 दिसंबर 2014

2015 हिन्दू त्यौहारों का कैलेण्डर-2015 में एकादशी-2015 में अमावस्या-पूर्णिमा

kalash जनवरी २०१५  kalash
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०१बृहस्पतिवारपौष पुत्रदा एकादशी
०५सोमवारपौष पूर्णिमा
०८बृहस्पतिवारसकट चौथ
१५बृहस्पतिवारपोंगल , मकर संक्रान्ति
१६शुक्रवारषटतिला एकादशी
२०मंगलवारमौनी अमावस
२४शनिवारवसन्त पञ्चमी
२६सोमवाररथ सप्तमी
२७मंगलवारभीष्म अष्टमी
३०शुक्रवारजया एकादशी
kalash फरवरी २०१५  kalash
decoration
०३मंगलवारमाघ पूर्णिमा
१३शुक्रवारकुम्भ संक्रान्ति
१५रविवारविजया एकादशी
१७मंगलवारमहा शिवरात्रि
kalash मार्च २०१५  kalash
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०१रविवारआमलकी एकादशी
०५बृहस्पतिवारहोली , होलिका दहन
०६शुक्रवाररंगवाली होली
१४शनिवारबसोड़ा , शीतला अष्टमी
१५रविवारमीन संक्रान्ति
१६सोमवारपापमोचिनी एकादशी
१७मंगलवारपापमोचिनी एकादशी
२०शुक्रवारसूर्य ग्रहण
२१शनिवारचैत्र नवरात्रि , गुड़ी पड़वा , युगादी
२२रविवारगौरीपूजा , गणगौर
२५बुधवारयमुना छठ
२८शनिवारराम नवमी
३१मंगलवारकामदा एकादशी
kalash अप्रैल २०१५  kalash
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०४शनिवारहनुमान जयन्ती , चन्द्र ग्रहण
१४मंगलवारसोलर नववर्ष , मेष संक्रान्ति
१५बुधवारबरूथिनी एकादशी
२०सोमवारपरशुराम जयन्ती
२१मंगलवारअक्षय तृतीया
२५शनिवारगंगा सप्तमी
२७सोमवारसीता नवमी
२९बुधवारमोहिनी एकादशी
kalash मई २०१५  kalash
decoration
०२शनिवारनरसिंघ जयन्ती
०४सोमवारबुद्ध पूर्णिमा
०५मंगलवारनारद जयन्ती
१४बृहस्पतिवारअपरा एकादशी
१५शुक्रवारवृषभ संक्रान्ति
१७रविवारवट सावित्री व्रत
१८सोमवारशनि जयन्ती
२८बृहस्पतिवारगंगा दशहरा
२९शुक्रवारनिर्जला एकादशी
kalash जून २०१५  kalash
decoration
०२मंगलवारवट पूर्णिमा व्रत
१२शुक्रवारयोगिनी एकादशी
१५सोमवारमिथुन संक्रान्ति
२८रविवारपद्मिनी एकादशी
kalash जुलाई २०१५  kalash
decoration
१२रविवारपरम एकादशी
१६बृहस्पतिवारकर्क संक्रान्ति
१८शनिवारजगन्नाथ रथयात्रा
२७सोमवारदेवशयनी एकादशी
३१शुक्रवारगुरु पूर्णिमा
kalash अगस्त २०१५  kalash
decoration
१०सोमवारकामिका एकादशी
१७सोमवारहरियाली तीज , सिंह संक्रान्ति
१९बुधवारनाग पञ्चमी
२६बुधवारश्रावण पुत्रदा एकादशी
२८शुक्रवारवरलक्ष्मी व्रत
२९शनिवाररक्षा बन्धन , नारली पूर्णिमा
kalash सितम्बर २०१५  kalash
decoration
०१मंगलवारकजरी तीज
०५शनिवारकृष्ण जन्माष्टमी
०८मंगलवारअजा एकादशी
१३रविवारसूर्य ग्रहण
१६बुधवारहरतालिका तीज
१७बृहस्पतिवारगणेश चतुर्थी , कन्या संक्रान्ति , विश्वकर्मा पूजा
१८शुक्रवारऋषि पञ्चमी
२१सोमवारराधा अष्टमी
२४बृहस्पतिवारपरिवर्तिनी एकादशी
२७रविवारअनन्त चतुर्दशी , गणेश विसर्जन
२८सोमवारभाद्रपद पूर्णिमा , चन्द्र ग्रहण , प्रतिपदा श्राद्ध
kalash अक्टूबर २०१५  kalash
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०८बृहस्पतिवारइन्दिरा एकादशी
१२सोमवारसर्वपित्रू अमावस्या
१३मंगलवारनवरात्रि प्रारम्भ
१८रविवारसरस्वती आवाहन , तुला संक्रान्ति
१९सोमवारसरस्वती पूजा
२१बुधवारदुर्गा अष्टमी , महा नवमी
२२बृहस्पतिवारदशहरा , विजयदशमी
२३शुक्रवारपापांकुशा एकादशी
२४शनिवारपापांकुशा एकादशी
२६सोमवारकोजागर पूजा , शरद पूर्णिमा
३०शुक्रवारकरवा चौथ
kalash नवम्बर २०१५  kalash
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०३मंगलवारअहोई अष्टमी
०७शनिवाररमा एकादशी , गोवत्स द्वादशी
०९सोमवारधन तेरस , काली चौदस
१०मंगलवारनरक चतुर्दशी
११बुधवारदीवाली , लक्ष्मी पूजा
१२बृहस्पतिवारगोवर्धन पूजा
१३शुक्रवारभैया दूज
१७मंगलवारछट पूजा , वृश्चिक संक्रान्ति
२१शनिवारकंस वध
२२रविवारदेवुत्थान एकादशी
२३सोमवारतुलसी विवाह
२५बुधवारकार्तिक पूर्णिमा
kalash दिसम्बर २०१५  kalash
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०३बृहस्पतिवारकालभैरव जयन्ती
०७सोमवारउत्पन्ना एकादशी
१६बुधवारविवाह पञ्चमी , धनु संक्रान्ति
२१सोमवारमोक्षदा एकादशी , गीता जयन्ती
२४बृहस्पतिवारदत्तात्रेय जयन्ती
२५शुक्रवारमार्गशीर्ष पूर्णिमा
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