आपका स्वागत है...

मैं
135 देशों में लोकप्रिय
इस ब्लॉग के माध्यम से हिन्दू धर्म को जन-जन तक पहुचाना चाहता हूँ.. इसमें आपका साथ मिल जाये तो बहुत ख़ुशी होगी.. इस ब्लॉग में पुरे भारत और आस-पास के देशों में हिन्दू धर्म, हिन्दू पर्व त्यौहार, देवी-देवताओं से सम्बंधित धार्मिक पुण्य स्थल व् उनके माहत्म्य, चारोंधाम,
12-ज्योतिर्लिंग, 52-शक्तिपीठ, सप्त नदी, सप्त मुनि, नवरात्र, सावन माह, दुर्गापूजा, दीपावली, होली, एकादशी, रामायण-महाभारत से जुड़े पहलुओं को यहाँ देने का प्रयास कर रहा हूँ.. कुछ त्रुटी रह जाये तो मार्गदर्शन करें...
वर्ष भर (2017) का पर्व-त्यौहार नीचे है…
अपना परामर्श और जानकारी इस नंबर
9831057985 पर दे सकते हैं....

धर्ममार्ग के साथी...

लेबल

आप जो पढना चाहते हैं इस ब्लॉग में खोजें :: राजेश मिश्रा

07 अगस्त 2014

Ram_Laxman or Rukmini_Krishn

राम-लक्ष्मण और कृष्ण-रुक्मिणी
मृत्यु के कारण एक ही व्यक्ति!

एक समाचार पत्र लिखता है कि- "दुर्वासा अपने गुस्से के लिए जाने जाते हैं और जब वो द्वारका आते हैं तो श्री कृष्ण पूरी कोशिश करते हैं कि महर्षि दुर्वासा को थोड़ा सा भी गुस्सा नहीं आए। इसी कोशिश में श्री कृष्ण अपनी पत्नी रुक्मिणी के साथ पूरे नग्न तक हो जाते हैं।"

यह किस्सा तर्क से परे है लगता है की यह दुर्वासा नाम का चरित्र महाभारत में जबरजस्ती घुसाया गया है , क्यों की दुर्वासा की उपस्थिति रामायण में है । कहा जाता है की रामायण और महाभारत में हजारो सालो का अंतर है। क्या यह संभव है की कोई इन्सान पांच हजार सालो से अधिक तक जीवित रहे? हरगिज नहीं... यह तर्क और सच्चाई के विपरीत है ।
रामजी-लक्ष्मणजी 
मुझे तो लगता है की यह दुर्वासा का चरित्र कृष्ण की महत्वता को कम करने के लिए गढ़ा गया है महाभारत में क्यूँ की आप देखेंगे की रामायण में भी राम जी और लक्ष्मण जी की मृत्यु का कारण भी दुर्वासा ऋषि ही था । कहानी इस प्रकार है की काल और राम जी कमरे में बात कर रहे होते हैं और लक्ष्मण कमरे की पहरेदारी का आदेश मिला हुआ था ।

लक्ष्मण को आज्ञा थी की वह किसी को अन्दर नहीं आने दें, यदि कोई अन्दर आ गया तो उसे मृत्यु दंड दिया जायेगा, यह राम जी का वचन था। तभी दुर्वासा ऋषि उपस्थित होता है और राम जी से मिलने की इच्छा जाहिर करता है। बात यह थी की उसका एक व्रत पूरा हुआ था और वह इसके लिए राम जी से भोजन चाहता था। 

लक्ष्मण के मना करने के बाद भी दुर्वासा लक्ष्मण को परिवार सहित भस्म हो जाने और राज्य के अनिष्ठ होने का श्राप देने की धमकी देता है। जिससे घबरा के लक्ष्मण राम जी के कमरे में चले जाते हैं जंहा काल और राम जी मंत्रणा कर रहे होते हैं। वचन के अनुसार राम जी लक्ष्मण को मारने की आज्ञा दे देते हैं पर बाद में दया दिखाते हुए सिर्फ राज्य निकाला दे देते हैं। पर इससे अपमानित होके लक्ष्मण जी सरयू में जल समाधी ले लेते हैं और बाद में राम जी भी लक्ष्मण के वियोग में जल समाधी ले लेते हैं।
जय श्री कृष्णा_ जय श्री रुक्मिणी
कहने का मतलब यह की दुर्वासा ऋषि राम जी के मृत्यु का कारण था परन्तु पांच हजार साल बाद कृष्ण जी और उनकी पत्नी के अपमान और मृत्यु का कारण भी वही दुर्वासा ऋषि हो यह सत्य नहीं जान पड़ता। यदि फिर भी ऐसा है की दुर्वासा रामायण से लेके महाभारत तक के काल में उपस्थित हो तो इसका कारण सिर्फ एक हो सकता है। और वह संभावित कारण है की दुर्वासा ऋषि जोकि एक पुजारी वर्ग से थे, उन्होंने अपनी जातीय श्रेष्टता का प्रभुत्व दिखाने के लिए कृष्ण, जो की उनसे नीची जात के थे, अपमानित किया और अंत में उनकी मृत्यु का कारण बने।

मेरी ब्लॉग सूची

  • World wide radio-Radio Garden - *प्रिये मित्रों ,* *आज मैं आप लोगो के लिए ऐसी वेबसाईट के बारे में बताने जा रहा हूँ जिसमे आप ऑनलाइन पुरे विश्व के रेडियों को सुन सकते हैं। नीचे दिए गए ल...
    8 माह पहले
  • जीवन का सच - एक बार किसी गांव में एक महात्मा पधारे। उनसे मिलने पूरा गांव उमड़ पड़ा। गांव के हरेक व्यक्ति ने अपनी-अपनी जिज्ञासा उनके सामने रखी। एक व्यक्ति ने महात्मा से...
    6 वर्ष पहले

LATEST:


Windows Live Messenger + Facebook