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आप जो पढना चाहते हैं इस ब्लॉग में खोजें :: राजेश मिश्रा

29 दिसंबर 2014

नववर्ष की माया अधिकांश त्यौहार शनिवार को

2015 में अधिकमास के कारण पहले होंगे कई त्योहार, जाने कैसे व क्यों

वर्ष 2015 में अधिकांश प्रमुख त्योहार शनिवार को होंगे। यही नहीं, 21 मार्च को विक्रम संवत् 2072 का शुभारंभ भी शनिवार के दिन ही होगा, इसलिए पूरे संवत्सर के राजा शनिदेव ही होंगे। 15 अगस्त को मनाने वाला राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस भी इस वर्ष शनिवार के दिन ही है। इस पूरे वर्ष में चार माह जनवरी, मई, अगस्त और अक्टूबर ऐसे होंगे, जिनमें पांच शनिवार होंगे।

नए साल में प्रशासनिक क्षेत्रों में राजा शनि कार्यों में स्थायित्व प्रदान करेंगे, जबकि मंत्री मंगल अनुशासन को बढ़ावा देंगे। जिन लोगों पर शनि की साढ़े साती ढैया चल रही है, उन्हें हनुमान जी की पूजा करने से लाभ होगा। ज्योतिषियों की मानें तो नए वर्ष में अधिकांश बड़े पर्व शनिवार को होने से इस वार के स्वामी शनिदेव का वर्चस्व रहेगा। शनि पूरे वर्ष में कभी वक्री तो कभी मार्गी होगा। वर्तमान में शनि मंगल के आधिपत्य वाली राशि वृश्चिक में हैं।

आगामी 15 मार्च से यह वक्री स्थिति में रहेगा। वहीं विक्रम संवत 2072 का राजा शनि होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार विक्रम संवत्सर जिस वार को शुरू होता है, पूरे वर्ष उसी वार का स्वामी राजा होता है। मंत्री मंगल, दुर्गेश चंद्रमा होंगे। इससे देश में सुख-शांति अधिक खाद्यान्न उत्पादन की आशा की जा सकती है . 

  • जनवरी- 3,10,17, 24 31 
  • मई- 2, 9,16, 23, 30
  • अगस्त 1, 8,15, 22, 29
  • अक्टूबर 3,10,17, 24, 31
  • चार माह में 5-5 शनिवार
  • वर्ष 2015 में ये त्योहार होंगे शनिवार को
  • बसंत पंचमी 24 जनवरी
  • भाई दूज 07 मार्च
  • चैत्र नवरात्र 21 मार्च
  • राम नवमी 28 मार्च
  • हनुमान जयंती 04 अप्रैल
  • बैसाख अमावस्या 18 अप्रैल
  • रक्षा बंधन 29 अगस्त
  • जन्माष्टमी 05 सितंबर
  • श्राद्ध अमावस्या 12 सितंबर
  • छठ 19 सितंबर
  • इदुल फितर 18 जुलाई
  • मोहर्रम 24 अक्टूबर
  • 15 अगस्त-स्वतंत्रता दिवस (शनिवार)
  • खग्रास चंद्र ग्रहण-4 अप्रैल (शनिवार)
  • अन्य संयोग- नए वर्ष में 1 जनवरी को गुरुवार, 31 दिसंबर को भी गुरूवार।
  • चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 21 मार्च शनिवार को और नवमी पर समापन भी 28 मार्च शनिवार को

आने वाले साल 2015 में प्रमुख त्योहारों की तिथियां काफी बदला

इसके अलावा,  आने वाले साल 2015 में प्रमुख त्योहारों की तिथियां काफी बदला हुआ रहेगा। 2015 के जनवरी से जून तक आने वाले त्योहार इस साल 2014 के मुकाबले कुछ दिन पहले की तारीखों में पड़ेंगे।

यह स्थिति अधिकमास के कारण बनेगी। यानि गत 18 अगस्त से 13 सितंबर 2012 में अधिकमास होने के कारण दो भादों थे और 2015 में दो आषाढ़ होंगे, जबकि 2018 में 16 मई से 13 जून तक दो जेठ होंगे। यानी नए वर्ष के शुरू के छह माह में त्योहार गत वर्ष की अपेक्षा दस दिन पहले और बाद के छह माह में देरी से होंगे। ज्योतिषी इसकी वजह नए साल में दो आषाढ़ होना मान रहे हैं।

वहीं जानकार भी नए साल में दो आषाढ़ मास होने की बात कह रहे हैं। यानी जून में अधिक मास की स्थिति बनेगी, इसलिए इसके खत्म होने के बाद जो त्योहार आएंगे, वे दस से 20 दिन की देरी से होंगे। इस साल की अपेक्षा आगामी वर्ष 2015 में जनवरी से जून तक आने वाले त्योहार 10 से 11 दिन पहले और जुलाई से दिसंबर तक होने वाले त्योहार 10 से 15 दिन की देरी से आएंगे।

पंडितों का कहना है कि हर तीसरे वर्ष में अधिक मास होता है।

ज्योतिष के मुताबिक 6, 7 दिसंबर वर्ष 2014 में विवाह के अंतिम श्रेष्ठ मुहूर्त थे। 16 दिसंबर को सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही मलमास शुरू हो गया है। मलमास में शादी-ब्याह शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं निकलेंगे। अब मलमास खत्म होने 16 जनवरी तक इंतजार करना होगा। वर्ष 2015 में जनवरी से जुलाई देवताओं तक कुल 34 दिन विवाह के शुभ मुहूर्त आएंगे।

सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्रांति होना कहते हैं। सौर मास 12 और राशियां भी 12 होती हैं। जब दो पक्षों में संक्रांति नहीं होती, तब अधिकमास होता है। आमतौर पर यह स्थिति 32 माह और 16 दिन में एक बार यानी हर तीसरे वर्ष में बनती है। ऐसा सूर्य और पृथ्वी की गति में होने वाले परिवर्तन से तिथियों का समय घटने-बढऩे के कारण होता है। नए वर्ष में आषाढ़ 3 जून को शुरू होकर 30 जुलाई तक रहेगा। इस अवधि में 17 जून से 16 जुलाई तक की अवधि को अधिकमास माना जाएगा। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।

मौजूदा वर्ष की तुलना में पर्वों की तारीख हर तीन साल में घट-बढ़ गईं हैं। अब साल 2015 में आने वाले त्योहार 20 दिन बाद तक 10 दिन पहले आएंगे। ये पर्व वर्ष 2015 में अधिकमास के कारण बदल रहे हैं। त्योहारों की तिथियों का गणित, आषाढ़ के दो महीने पहले से आने के कारण हुआ है।

सूर्य और पृथ्वी की गति में होने वाले परिवर्तन से तिथियों का समय घटने-बढऩे के कारण होता है। नए वर्ष में आषाढ़ 3 जून को शुरू होकर 30 जुलाई तक रहेगा। इस अवधि में 17 जून से 16 जुलाई तक की अवधि को अधिकमास माना जाएगा। इसे पुरूषोत्तम मास भी कहा जाता है।

त्योहार वर्ष 2014 वर्ष 2015

माघी(मौनी) अमावस्या- 30 जनवरी 20 जनवरी
वसंत पंचमी- 4 फरवरी 24 जनवरी
मां नर्मदा जयंती- 6 फरवरी 26 जनवरी
महाशिवरात्रि- 27 फरवरी 17 फरवरी
होली- 17 मार्च 6 मार्च
चैत्र नवरात्र(गुड़ी पड़वा)- 31 मार्च 21 मार्च
राम नवमी- 8 अप्रैल 28 मार्च
महावीर जयंती- 13 अप्रैल 2 अप्रैल
हनुमान जयंती- 15 अप्रैल 4 अप्रैल
अक्षय तृतीया- 2 मई 21 अप्रैल
कबीर जयंती- 13 जून 2जून
त्योहार वर्ष- 2014 वर्ष 2015
भड़लीनवमी- 6 जुलाई 25 जुलाई
चातुर्मास प्रारंभ- 8 जुलाई 27 जुलाई
रक्षाबंधन- 10 अगस्त 29 अगस्त
जन्माष्टमी- 18 अगस्त 5 सितंबर
गणेश चतुर्थी- 29 अगस्त 17 सितंबर
शारदीय नवरात्र- 25 सितंबर 13 अक्टूबर
दशहरा- 3 अक्टूबर 22 अक्टूबर
शरद पूर्णिमा- 8 अक्टूबर 27 अक्टूबर
दीपावली- 23 अक्टूबर 11 नवंबर
काल भैरव अष्टमी- 14 नवंबर 3 दिसंबर

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