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27 जनवरी 2015

Jago Bahnon Jago, Jago Mahilaon Jago : apne Haq or Kanoon ko Pahchanon

जागो बहनों जागो, जागो महिलाओं जागो
अपने हक़ और कानून को पहचानो : राजेश मिश्रा 


बेटी बचाओ! बेटी बचाओ! .... सभी चिल्ला रहे हैं.. लेकिन एक बेटी को बहन-पत्नी, माँ लेकर वृद्ध बनने तक किन-किन समस्याओं से जूझना पड़ता है इसका कभी उल्लेख किसी ने नहीं किया.. लेकिन मैं अपने "धर्ममार्ग" के जरिये उन सभी बहन एवं माताओं को जगाना चाहता हूँ जो आज भी अपने हक़ के लिए सिंस्कियां ले रही हैं... ये सिर्फ मज़बूर और अबला महिलाओं के लिए ही नहीं बल्कि मैं उन बहनों के लिए भी अच्छा पैगाम देना चाहता हूँ जो अपने घर और समाज में आगे बढ़ना तो चाहती हैं पर अपने हक़ और कानून से अनजान हैं... : राजेश मिश्रा 


सामाजिक तौर पर महिलाओं को त्याग, सहनशीलता व शर्मीलेपन का ताज पहनाया गया है, जिसके भार से दबी महिला कई बार जानकारी होते हुए भी इन कानूनों का उपयोग नहीं कर पातीं तो बहुत केसों में महिलाओं को पता ही नहीं होता कि उनके साथ हो रही घटनाएं हिंसा हैं और इससे बचाव के लिए कोई कानून भी है। आमतौर पर शारीरिक प्रताड़ना यानी मारपीट, जान से मारना आदि को ही हिंसा माना जाता है और इसके लिए रिपोर्ट भी दर्ज कराई जाती है।
इसके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 498 के तहत ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा की गई क्रूरता, जिसके अंर्तगत मारपीट से लेकर कैद में रखना, खाना न देना व दहेज के लिए प्रताड़ित करना आदि आता है, के तहत अपराधियों को 3 वर्ष तक की सजा दी जा सकती है, पर शारीरिक प्रताड़ना की तुलना में महिलाओं के साथ मानसिक प्रताड़ना के केस ज्यादा होते हैं।
मनपसंद कपड़े न पहनने देना, मनपसंद नौकरी या काम न करने देना, अपनी पसंद से खाना न खाने देना, बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद से विवाह न करने देना या ताने देना, मनहूस आदि कहना, शक करना, मायके न जाने देना, किसी खास व्यक्ति से मिलने पर रोक लगाना, पढ़ने न देना, काम छोड़ने का दबाव डालना, कहीं आने-जाने पर रोक लगाना आदि मानसिक प्रताड़ना है।
आमतौर पर एक सीमा तक महिलाएं इसे बर्दाश्त करती हैं, क्योंकि परंपरा के नाम पर बचपन से वे यह देखती सहती आती हैं, लेकिन घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 इन स्थितियों में भी महिला की मदद करता है। खास बात यह है कि घरेलू हिंसा अधिनियम में सभी महिलाओं के अधिकार की रक्षा की संभावना है।
इसके तहत विवाहित महिला के साथ-साथ अविवाहित, विधवा, बगैर शादी के साथ रहने वाली महिला, दूसरी पत्नी के तौर पर रहने वाली महिला व 18 वर्ष से कम के लड़की व लड़का सभी को संरक्षण देने का प्रयास किया गया है। इस कानून में घर में रहने का अधिकार, संरक्षण, बच्चों की कस्टडी व भरण-पोषण प्राप्त करने का अधिकार महिलाओं को मिलता है, जो किसी और कानून में संभव नहीं है।
आईपीसी की धारा 125 के तहत विवाहित महिलाओं को भरण-पोषण का अधिकार मिलता है, लेकिन बगैर विवाह के या दूसरी पत्नी के तौर पर रहने वाली महिला कआज वह समय है, जब एक तरफ महिलाएं आसमान छू रही हैं, हर क्षेत्र में पुरुषों से कंधा मिलाकर चल रही हैं तो कहीं बहुत आगे भी निकल गई हैं, परंतु यह भी सच है कि महिलाओं व लड़कियों के साथ होने वाली हिंसा भी सीमा से आगे बढ़ चुकी है।
हर व्यक्ति जन्म से ही कुछ अधिकार लेकर आता है चाहे वह जीने का अधिकार हो या विकास के लिए अवसर प्राप्त करने का, परंतु इस पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के साथ लैंगिक आधार पर किए जा रहे भेदभाव की वजह से महिलाएं इन अधिकारों से वंचित रह जाती हैं। इसी विचार के चलते महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने हेतु हमारे संविधान में अलग से कानून बनाए गए हैं या समय-समय पर इनमें संशोधन किया गया है।
- अपराध - - भा,द,स, की धारा - - सजा -
अपहरण, भगाना या औरत को शादी के लिए मजबूर करना- -धारा 366 -10 वर्ष
पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह करना- -धारा 494 -7 वर्ष
पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता- -धारा 498 ए -3 वर्ष
बेइज्जती करना, झूठे आरोप लगाना- -धारा 499 -2 वर्ष
दहेज- -धारा 304 क -आजीवन कारावास
दहेज मृत्यु- -धारा 304 ख -आजीवन कारावास
आत्महत्या के लिए दबाव बनाना- -धारा 306 -10 वर्ष
सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कार्य एवं अश्लील गीत गाना -धारा 294 -3 माह कैद या जुर्माना या दोनों-
महिला की शालीनता भंग करने की मंशा से की गई अश्लील हरकत- -धारा 354 -2 वर्ष
महिला के साथ अश्लील हरकत करना या अपशब्द कहना- -धारा 509 -1 वर्ष
बलात्कार- -धारा 376 -10 वर्ष तक की सजा या उम्रकैद-
महिला की सहमति के बगैर गर्भपात कारित करना- -धारा 313 -आजीवन कारावास या 10 वर्ष कैद/ जुर्माना

20 जनवरी 2015

Hari ka Dwar : Haridwar | हरि से मिलन का द्वार : हरिद्वार

 हर की पौड़ी जहां समुद्र मंथन के समय अमृत की कुछ बूंदें गिरी थी : राजेश मिश्रा

'हरिद्वार' का अर्थ है एक ऐसा स्थान, जहाँ पहुँचते ही एक अलग-सी अनुभूति हो। ऐसा लगे कि हम भगवान श्री हरि विष्णु के नगर में पहुँच गए हैं। पहली बार जब हम भी हरिद्वार पहुंचे "जगकल्याण" टीम के साथ धर्मशाला बनाने के उद्देश्य से तो वातावरण और वहां के धार्मिक प्रवृति को देखकर स्तब्ध रह गया. पुरे 8 दिन प्रवास के दौरान सभी मंदिरों और गंगा मैया के माहात्म्य को जाना जो आज भी जेहन में रचा बसा हुआ है. याद करने पर लगता है जैसे कल ही की बात है… राजेश मिश्रा (समाचार संपादक, जगकल्याण धार्मिक पत्रिका, कोलकाता)
हरिद्वार के वातावरण में अनूठी पवित्रता और धार्मिकता नजर आती है। नगर में चारों ओर भगवान के भजन गूँजते रहते हैं। गंगा के निर्मल जल की कल-कल ध्वनि से मुग्ध कर देने वाला संगीत पैदा होता है, जो यहाँ आने वाले हर व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करता है। हरिद्वार को भारत की धार्मिक राजधानी माना जाता है। यहाँ के घाटों पर साधु-संतों का डेरा लगा रहता है।

साल भर यहाँ श्रद्धालु आते रहते हैं। कुछ श्रद्धालु यहाँ पर गंगा स्नान के लिए आते हैं। कुछ यहाँ घूमने व दर्शनीय स्थलों को देखने आते हैं। कुछ यहाँ पर अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनका तर्पण कराने के लिए आते हैं।
हरिद्वार की एक और खास बात यहाँ के पंडितों का लेखा-जोखा है। हरिद्वार के पंडितों के पास आपके परिवार का पीढ़ी-दर-पीढ़ी का लेखा-जोखा रहता है। यह लेखा-जोखा हजारों वर्षों से वर्तमान पंडितों के पूर्वजों के द्वारा सँभालकर रखा गया है।

मुख्य आकर्षण :

हर की पोड़ी- हरिद्वार में माँ गंगा का पावन स्थान ‘हर की पोड़ी’ को कहा जाता है। यहाँ पर गंगा माता का प्राचीन मंदिर बना हुआ है। रोज शाम को सूर्यास्त के समय गंगा माता की आरती होती है। उस समय यहाँ भक्तों का मेला-सा लग जाता है। इस आरती को देखने के लिए लाखों विदेशी पर्यटक हरिद्वार की तरफ खिंचे चले आते हैं।
यह मुख्य घाट है और पवित्र स्थान है जहां से गंगा पहाड़ों को छोड़कर मैदानी भाग में प्रवेश करती है। लोग यहां डुबकी लगाते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यहां पाप धुल जाते हैं। इस घाट पर जो पद-चिह्न बने हैं, माना जाता है कि वे भगवान विष्णु के हैं। प्रत्येक संध्या में यहां गंगा की आरती/नदी की पूजा की जाती है, इस दौरान छोटे-छोटे दीये पानी पर तैराए जाते हैं।
हरिद्वार में माँ गंगा एक सिरे से दूसरे सिरे तक बहती हैं, लेकिन जो पुण्य हर की पौड़ी में स्थित ‘ब्रह्मकुंड’ में स्नान से मिलता है, वह कहीं नहीं मिलता। माना जाता है कि अमृतमंथन के बाद अमृत की कुछ बूँदें यहाँ गिरी थीं, इसलिए इसे ब्रह्मकुंड कहा जाता है।
मंदिर- यह पावन नगरिया कई मंदिरों से भरी हुई है। हरिद्वार में हर की पौड़ी के सामने की पहाड़ी पर माता मनसा देवी का प्राचीन मंदिर है। वहीं दूसरी ओर पहाड़ी पर माता चंडीदेवी का प्राचीन मंदिर है। यहाँ पर काफी संख्या में भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं।
माँ चण्डी 


मनसा देवी मंदिर :

यह मंदिर शहर के नजदीक पहाड़ी पर स्थित है। यदि आपमें पैदल चलने की हिम्मत है तो आपको लगभग 1.5 कि.मी. चलना पड़ेगा और शर्तिया ही आपको एक सुंदर दृश्य दिखाई देगा। पूजा करने के लिए यहां दुकानों पर पूजा की सामग्री मिल जाती है, इसमें नारियल, गेंदे के फूल और सुगंधित अगरबत्तियां शामिल होती हैं।

माँ मनसा 

माँ मनसा 


यहाँ पर ट्रस्ट के द्वारा यात्रियों की सुविधा के लिए उड़नखटोला (रोप वे) बनाया गया है, जिससे दो जगहों पर यात्री कुछ समय में ही माता के दर्शन कर लौट सकते हैं। हरिद्वार में हजारों मंदिर हैं। यहाँ की हर गली हर नुक्कड़ में एक नया मंदिर मिलेगा। इन्हें देखने का एक ही नियम है बस आप पैदल घूमते जाएँ-दर्शन करते जाएँ।

बड़ा बाजार :

यह शहर का तड़क-भड़क वाला बाजार है। यहां फेरीवाले विभिन्न प्रकार के व्यंजन, आयुर्वेदिक दवाएं, पीतल का सामान, कांच की चूड़ियां, शालें, लकड़ी से बनी विभिन्न वस्तुएं और बांस से बनी टोकरियां बेचते नज़र आते हैं।

परमेश्वर महादेव मंदिर :

यह मंदिर हरिद्वार से लगभग 4 कि.मी. दूर है, यहां पारे से बना एक पवित्र शिवलिंग है।

पवन धाम मंदिर :

शहर से लगभग 2 कि.मी. दूर पवन धाम मंदिर है। उत्कृष्ट आईनों और शीशे पर किए गए कार्य के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर में व्यापक रूप से अलंकृत मूर्तियां हैं।

लाल माता मंदिर :

यह मंदिर जम्मू-कश्मीर में स्थित वैष्णों देवी मंदिर का प्रतिरूप है। यहां एक नकली पहाड़ी और बर्फ से जमाया हुआ शिवलिंग है जो अमरनाथ के शिवलिंग का प्रतिरूप है।

यहां अनेक दर्शनीय मंदिर हैं जिनमें दक्ष महादेव मंदिर, भारत माता मंदिर और चंदा देवी प्रमुख हैं। जय राम आश्रम, आनंदमयी मां आश्रम, सप्त ऋषि आश्रम और परमार्थ आश्रम अन्य दर्शनीय स्थल हैं।

बाबा रामदेव का आश्रम- हरिद्वार के पास कनखल नामक एक स्थान है, जहाँ पर विश्व प्रसिद्ध योगाचार्य बाबा रामदेव' का आश्रम है। यह आश्रम प्रकृति की गोद में बेहद सुरम्य स्थान पर बना है। यहाँ हर साल कई लोग अपने मर्ज भगाने और योग सीखने आते हैं।


ऋषिकेश- हरिद्वार से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर ऋषिकेश है। यहाँ पर ही विश्व प्रसिद्ध राम झूला एवं लक्ष्मण झूला नामक पुल हैं, जो गंगा नदी पर बने हैं। इनकी सुंदरता देखते ही बनती है। यहाँ से पहाड़ों के बीच से बहती हुई गंगा नदी का दर्शन बड़ा मनोरम प्रतीत होता है। यहाँ पर भी कई प्राचीन मंदिर हैं। पहाड़ों से घिरा होने के कारण यह नगर अत्यंत ही सुंदर लगता है।

ऋषिकेश : यह वही जगह है जहाँ भगवान शिव की आदमकद मूर्ति माँ गंगा
के बीच  विराजमान था लेकिन कुछ वर्ष पहले आये विनाशकारी परलय में
वह भी बह गया.  सिर्फ चबूतरा का ही दर्शन होता है जो मेरे फोटो में
(सदा टीला जैसा) दिखाई दे  रहा है… 

यहाँ से ही देहरादून, मसूरी, उत्तरकाशी, चमोली टिहरी धारायु, चम्बा जोशीमठ एवं उत्तर भारत के पर्यटन एवं मनोरम स्थल के लिए रास्ता जाता है। उत्तर भारत की चारधाम यात्रा भी इसी रस्ते से होकर जाती है।

हरिद्वार नगर, हरिद्वार जनपद का मुख्यालय है। यह नगर हिन्दुओं का एक अति प्राचीन तीर्थ एवं धार्मिक स्थल है। संस्कत भाषा तथा हिन्दुओं के अन्य धार्मिक कलापों का भी प्रमुख केन्द्र है। वर्तमान में इस नगर में कुछ उधोगों का विकास हुआ है। यह नगर मेरठ से 141 किमी0 सहारनपुर से 81 किमी0 लखनउ से 494 किमी0 तथा देहरादून से 52 किमी0 पर स्थित है।

नगर की आबादी मुख्यतः चार भागों में विभाजित हैं 1- हरिद्वार 2- ज्वालापुर 3- कनखल4- भारत हैवी इलैक्ट्रिकल टाउनशिप।

हरिद्वार नगर पश्चिम उत्तर प्रदेश में जडी बूटियों एवं जंगल से प्राप्त लकडी की एक प्रमुख मण्डी है। यह नगर राजकीय राजमार्ग संख्या 45 दिल्ली से प्रारम्भ होकर मेरठ, मुजपफरनगर, रूडकी, हरिद्वार होती हुई भारत तिब्बत सीमा पर स्थित नीतीपास नामक स्थान पर जाकर समाप्त होती है।

हरिद्वार की जलवायु उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्र के लगभग समान है जो अत्यन्त स्वास्थ्यप्रद है। मई तथा जून के महीनों में भीषण गर्मी पडती है। नगर का तापमान 1.3 से 41.1 डिग्री सेंटीग्रेट के मध्य रहता है। नगर में पानी की सतह की औसत गहराई 25x35 फीट है।


कब जाएँ- हरिद्वार जाने के लिए मई माह से अक्टूबर-नवंबर माह तक का समय काफी अच्छा है। इस समय यहाँ का मौसम बेहद सुहावना होता है। वैसे भारी बारिश को छोड़कर यहाँ साल भर जाया जा सकता है।

कैसे जाएँ- हरिद्वार देश के सभी बड़े शहरों से सड़क-रेल-वायु तीनों मार्गों से जुड़ा हुआ है। आप चाहें तो चार-धाम टूरिस्ट पैकेज भी ले सकते हैं।

कहाँ ठहरे- इस देवस्थल में अच्छे होटलों से लेकर कई धर्मशालाएँ हैं। सभी अखाड़ों के आश्रम हैं। आप अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी का भी चुनाव कर सकते हैं।
चोटीवाला होटल 

लेखक आनन्दाश्रम में 


गीता भवन ऋषिकेश 

गायत्री मंदिर ऋषिकेश 

माँ गंगा मंदिर हर की पौड़ी 

दक्ष मंदिर, कनखल 

राम झूला 



श्रीयंत्र मंदिर 


बजट- हरिद्वार और आसपास के दर्शनीय स्थानों पर घूमने के लिए दस हजार से लेकर जितनी आपकी क्षमता हो, उतना बजट बनाया जा सकता है। यहाँ कई सस्ती धर्मशालाएँ हैं, जहाँ बुजुर्ग और श्रद्धालु लोग महीने भर भी ठहर सकते हैं। ऐसे में बजट पहले से बना लें तो बेहतर होगा।

11 जनवरी 2015

Gangasagar : गंगासागर

गंगासागर में जनसमुद्र का दर्शन 

द वेक (कोलकाता से प्रकाशित हिदी मासिक पत्रिका) के जनवरी 2015 अंक में गंगासागर एवं
मकर संक्रांति  से सम्बंधित छपी मेरी  आलेख.....




06 जनवरी 2015

Makar Sankranti Mahasanyog


15 को मनेगी मकर संक्रांति, 15 अंक का विशेष संयोग




वर्ष2015 के जनवरी माह में 15 तारीख को विशेष संयोग बन रहा है। मकर संक्रांति का महापर्व इस बार साल 2015 में 15 तारीख को ही मनेगा। खास बात यह कि 15 तारीख को 15 वां नक्षत्र स्वाति और 15 मुहूर्त तिथि होगी। यही नहीं इस दिन पांचवां वार गुरुवार 10वीं तिथि का योग भी 15 होगा। ज्योतिषविदों की मानें तो इस बार तिथि काल और सूर्य-पृथ्वी की गति के कारण इस बार एक बार फिर मकर संक्रांति का पर्व 15 तारीख को मनेगा। सूर्य यूं तो 14 जनवरी को शाम 7.28 बजे मकर राशि में प्रवेश कर जाएगा। पंडित दिनेश दिनकर के मुताबिक शास्त्रों में संक्रांति काल से पहले के 6 घंटे 24 मिनट और बाद 16 घंटे पुण्यकाल के लिए वर्णित हैं। खासकर ये समय सूर्योदय के समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है। चूंकि संक्रांति काल संध्या काल में है, इसलिए इस दिन का कोई महत्व नहीं रहेगा, पुण्य काल का समय अगले दिन सुबह 11.28 बजे तक रहेगा।

हर 2 साल में बदलेगा क्रम

साल2016 में भी मकर संक्रांति 15 को ही मनेगी। फिर मकर संक्रांति मनाए जाने का ये क्रम हर दो साल के अंतराल में बदलता रहेगा। लीप ईयर वर्ष आने के कारण मकर संक्रांति वर्ष 2017 2018 में वापस 14 को ही मनेगी। साल 19 20 को 15 को मनेगी। ये क्रम 2030 तक चलेगा।

ज्योतिषीय मत

ज्योतिषिअश्विन दवे के मुताबि पृथ्वी की गति प्रतिवर्ष 50 वि कला (5 वि कला =2 मि नट) पीछे रह जाती है, वहीं सूर्य संक्रमण आगे बढ़ता जाता है। हालांकि लीप ईयर में ये दोनों वापस उसी स्थिति में जाते हैं। इस बीच प्रत्येक चौथे वर्ष में सूर्य संक्रमण में 22 से 24 मिनट का अंतर जाता है। यह अंतर बढ़ते -बढ़ते 70 से 80 वर्ष में एक दिन हो जाता है। इस कारण मकर संक्रांति का पावन पर्व वर्ष 2080 से लगातार 15 जनवरी को ही मनाया जाने लगेगा।

15 का मूलांक 6, ये प्रभाव

सोमनाथमंदिर पुजारी परिवार के सदस्य महेंद्र रावल के अनुसार 15 का मूलांक 6 है और 6 अंक का स्वामी शुक्र रहता है। शुक्र सुंदरता, प्रकृति सौंदर्य और चकाचौंध का परिचायक है। शुक्र प्रकृति और उन्नति का ग्रह है। इस दि दान-पुण्य वि शेष फलदायी रहेगा। वहीं ये पर्व प्रगति कारक समृद्धिकारक माना गया है।

संक्रांति का पर्व मनाए जाने का क्रम

1617 वीं शताब्दी में 9 10 जनवरी
17 18वीं शताब्दी

मेरी ब्लॉग सूची

  • World wide radio-Radio Garden - *प्रिये मित्रों ,* *आज मैं आप लोगो के लिए ऐसी वेबसाईट के बारे में बताने जा रहा हूँ जिसमे आप ऑनलाइन पुरे विश्व के रेडियों को सुन सकते हैं। नीचे दिए गए ल...
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