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19 नवंबर 2015

Ekadashi Vrat Niyam or Khaanpan

एकादशी व्रत का नियम और खानपान : राजेश मिश्रा 

भगवान श्री कृष्णा के चरणों में अरदास करते राजेश मिश्रा 


एकादशी का व्रत भगवान विष्णु जी या भगवान कृष्ण जी का व्रत होता है. एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना पड़ेगा।

दशमी के दिन

दशमी के दिन एक ही समय दिन में ही भोजन करना चाहिये रात्रि में नहीं. एक समय भोजन करके एकादशी व्रत का संकल्प लेना चाहिये-
1. इस दिन मांस, प्याज, मसूर की दाल आदि का निषेध वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए.
2. फलाहारी को गाजर, शलजम, गोभी, पालक, इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए। केला, आम, अंगूर, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करें। प्रत्येक वस्तु प्रभु को भोग लगाकर तथा तुलसीदल छोड़कर ग्रहण करना चाहिए.
3. रात्रि को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तथा भोग-विलास से दूर रहना चाहिए। एकादशी को अन्न नहीं खाते.स्वयं किसी का दिया हुआ अन्न आदि कदापि ग्रहण न करें। और किसी अन्य के घर में नहीं खाना चाहिये.
4. एकादशी के दिन "चावल" न खाने के विषय में यह जानना आवश्यक है कि चावल और अन्य अन्नों की खेती में अंतर है। यह सर्वविदित है कि चावल की खेती के लिए सर्वाधिक जल की आवश्यकता होती है। एकादशी का व्रत इंद्रियों सहित मन के निग्रह के लिए किया जाता है। ऎसे में यह आवश्यक है कि उस वस्तु का कम से कम या बिलकुल नहीं उपभोग किया जाए जिसमें जलीय तत्व की मात्रा अधिक होती है। कारण-चंद्र का संबंध जल से है। वह जल को अपनी ओर आकर्षित करता है।

यदि व्रती चावल का भोजन करे तो चंद्रकिरणें उसके शरीर के संपूर्ण जलीय अंश को तरंगित करेंगी। परिणाम जिस एकाग्रता से उसे व्रत के अन्य कर्म-स्तुति पाठ, जप, श्रवण करने होगे. उन्हें सही प्रकार से नहीं कर पाएगा। ज्ञातव्य हो कि औषधि के साथ पथ्य का भी ध्यान रखना आवश्यक होता है।

एकादशी के दिन

  • एकादशी के दिन प्रात: लकड़ी का दातुन न करें, नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ साफ कर लें, वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी ‍वर्जित है। अत: स्वयं गिरा हुआ पत्ता लेकर सेवन करें। यदि यह संभव न हो तो पानी से बारह बार कुल्ले कर लें। फिर स्नानादि कर मंदिर में जाकर गीता पाठ करें, प्रभु के सामने इस प्रकार संकल्प करना चाहिए- कि 'आज मै एकादशी का व्रत करूँगा आप मेरे संकल्प को पूरा करे ,मैं चोर, पाखंडी और दुराचारी मनुष्यों से बात नहीं करूँगा और न ही किसी का दिल दुखाऊँगा। रात्रि को जागरण कर कीर्तन करूँगा।'
  • 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' इस द्वादश मंत्र का जाप करें। राम, कृष्ण, नारायण आदि विष्णु के सहस्रनाम को कंठ का भूषण बनाएँ। भगवान विष्णु का स्मरण कर प्रार्थना करें कि- हे त्रिलोकीनाथ! मेरी लाज आपके हाथ है, अत: मुझे इस प्रण को पूरा करने की शक्ति प्रदान करना।
  • इस दिन बाल नहीं कटवाना चाहिए, हजामत नहीं करवानी चाहिये , नाख़ून नहीं कटना चाहिये, क्रोध नहीं करना चाहिये, अधिक नहीं बोलना चाहिए। अधिक बोलने से मुख से न बोलने वाले शब्द भी निकल जाते हैं।झूठ नहीं बोलना चाहिये, चोरी नहीं करनी चाहिये, किसी के साथ धोखा न करे, जुआ न खेले, दिन में नही सोना चाहिये.
  • यदि भूलवश किसी निंदक से बात कर भी ली तो भगवान सूर्यनारायण के दर्शन कर धूप-दीप से श्री‍हरि की पूजा कर क्षमा माँग लेना चाहिए। एकादशी के दिन घर में झाड़ू नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है।
  • इस दिन यथा‍शक्ति दान करना चाहिए। दशमी के साथ मिली हुई एकादशी वृद्ध मानी जाती है। वैष्णवों को योग्य द्वादशी मिली हुई एकादशी का व्रत करना चाहिए। त्रयोदशी आने से पूर्व व्रत का पारण करें।

द्वादशी के दिन

द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को मिष्ठान्न, भोजन करना चाहिये, दक्षिणा देना चाहिए। फिर अपने व्रत का पारण करना चाहिये, क्रोध नहीं करते हुए मधुर वचन बोलना चाहिए। तुलसी से पूजा करे.

धर्ममार्ग परिवार की ओर से राजेश मिश्रा के साथ आप सभी बोलें- "जय जय श्री राधे"

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