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06 जनवरी 2015

Makar Sankranti Mahasanyog


15 को मनेगी मकर संक्रांति, 15 अंक का विशेष संयोग




वर्ष2015 के जनवरी माह में 15 तारीख को विशेष संयोग बन रहा है। मकर संक्रांति का महापर्व इस बार साल 2015 में 15 तारीख को ही मनेगा। खास बात यह कि 15 तारीख को 15 वां नक्षत्र स्वाति और 15 मुहूर्त तिथि होगी। यही नहीं इस दिन पांचवां वार गुरुवार 10वीं तिथि का योग भी 15 होगा। ज्योतिषविदों की मानें तो इस बार तिथि काल और सूर्य-पृथ्वी की गति के कारण इस बार एक बार फिर मकर संक्रांति का पर्व 15 तारीख को मनेगा। सूर्य यूं तो 14 जनवरी को शाम 7.28 बजे मकर राशि में प्रवेश कर जाएगा। पंडित दिनेश दिनकर के मुताबिक शास्त्रों में संक्रांति काल से पहले के 6 घंटे 24 मिनट और बाद 16 घंटे पुण्यकाल के लिए वर्णित हैं। खासकर ये समय सूर्योदय के समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है। चूंकि संक्रांति काल संध्या काल में है, इसलिए इस दिन का कोई महत्व नहीं रहेगा, पुण्य काल का समय अगले दिन सुबह 11.28 बजे तक रहेगा।

हर 2 साल में बदलेगा क्रम

साल2016 में भी मकर संक्रांति 15 को ही मनेगी। फिर मकर संक्रांति मनाए जाने का ये क्रम हर दो साल के अंतराल में बदलता रहेगा। लीप ईयर वर्ष आने के कारण मकर संक्रांति वर्ष 2017 2018 में वापस 14 को ही मनेगी। साल 19 20 को 15 को मनेगी। ये क्रम 2030 तक चलेगा।

ज्योतिषीय मत

ज्योतिषिअश्विन दवे के मुताबि पृथ्वी की गति प्रतिवर्ष 50 वि कला (5 वि कला =2 मि नट) पीछे रह जाती है, वहीं सूर्य संक्रमण आगे बढ़ता जाता है। हालांकि लीप ईयर में ये दोनों वापस उसी स्थिति में जाते हैं। इस बीच प्रत्येक चौथे वर्ष में सूर्य संक्रमण में 22 से 24 मिनट का अंतर जाता है। यह अंतर बढ़ते -बढ़ते 70 से 80 वर्ष में एक दिन हो जाता है। इस कारण मकर संक्रांति का पावन पर्व वर्ष 2080 से लगातार 15 जनवरी को ही मनाया जाने लगेगा।

15 का मूलांक 6, ये प्रभाव

सोमनाथमंदिर पुजारी परिवार के सदस्य महेंद्र रावल के अनुसार 15 का मूलांक 6 है और 6 अंक का स्वामी शुक्र रहता है। शुक्र सुंदरता, प्रकृति सौंदर्य और चकाचौंध का परिचायक है। शुक्र प्रकृति और उन्नति का ग्रह है। इस दि दान-पुण्य वि शेष फलदायी रहेगा। वहीं ये पर्व प्रगति कारक समृद्धिकारक माना गया है।

संक्रांति का पर्व मनाए जाने का क्रम

1617 वीं शताब्दी में 9 10 जनवरी
17 18वीं शताब्दी

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